क्यों इतना इंतजार करना पड़ता है न्याय मिलने में? यानी देर है तो अंधेर है. पूरे देश में एक सवाल है - एक रेप को लेकर, एक इंसाफ को लेकर. करीब 15 दिनों से चल रहा है ये सवाल. पहली बार एनकाउंटर पर पुलिस पर लोग फूल बरसा रहे हैं. क्या ये इंसाफ था. क्या लोगों का अदालत से भरोसा उठ गया है. एजेंडा आजतक के पहले दिन आयोजित सेशन 'देर है तो अंधेर है' में पूर्व जज ऊषा मेहरा, पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार, तिहाड़ जेल के पूर्व लॉ अफसर सुनील गुप्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता जॉन दयाल शामिल थे.
तिहाड़ जेल के पूर्व लॉ अफसर सुनील गुप्ता ने कहा कि अगर निर्भया केस के चारों मुजरिम एक-एक करके मर्सी पेटिशन फाइल करते रहे तो फांसी होने में देरी होगी. क्योंकि एक भी मुजरिम ने मर्सी पेटिशन फाइल कर दी तो बाकी तीनों की सजा रुक जाती है. अगर ये अपराधी किसी अच्छे वकील को बुला लें तो इनकी फांसी अगले एक-दो साल रुक जाएगी. एक ने भी मर्सी पेटिशन फाइल कर दी, तो बाकी तीनों की फांसी भी रुक जाएगी. इसी तरह चारों मिलकर सजा को काफी आगे बढ़ा सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि ब्लैक वारंट की कॉपी अपराधी, उसके वकील, उसके परिजन को देना होगा. ये ब्लैक वारंट के बाद भी मर्सी पेटिशन फाइल कर सकते हैं. इससे सजा मिलने में टाइम बढ़ जाएगा. ब्लैक वारंट वह होता है जिसमें लिखा होता है कि अपराधी को किस वक्त, किस दिन फांसी दी जाएगी. चुंकि यह मौत का वारंट होता है, इसलिए इसे ब्लैक वारंट कहते हैं.
मैंने आठ लोगों की फांसी देखी हैः सुनील गुप्ता
सुनील गुप्ता ने बताया कि जिसको फांसी की सजा होती है वो पल-पल मरता है. लोग सुसाइड करने की कोशिश करते है. लोगों को नुकसान करने का प्रयास करते हैं. मैंने आठ लोगों की फांसी देखी है. सबसे पहले रंगा, बिल्ला, मो. मकबूल भट्ट, करतार सिंह, उजागर सिंह, सतवंत सिंह, केअर सिंह और अफजल गुरू.
जेलों में अंडरट्रायल कैदियों की संख्या ज्यादा है
कैदियों की बढ़ती संख्या सबसे बड़ा कारण है. 2016 में 1412 जेलें थीं. 2017 में ये 65 कम हो गईं हैं. जरूरत से ज्यादा कैदी जेल में हैं. 115 फीसदी ओवर क्राउडिंग है. 70 फीसदी कैदी तो अंडरट्रायल हैं जेलों में. अगर आपकी जेलों में अंडरट्रायल ज्यादा हैं यानी आपकी सिस्टम धीमा है. हर दिन हमारी क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम काफी धीमा है. यह और खराब हो रहा है.
एकसाथ संभव है चारों कैदियों की फांसी
सुनील गुप्ता ने कहा कि तिहाड़ जेल में निर्भया केस के चारों अपराधियों को एकसाथ फांसी दी जा सकती है. फांसी के तख्त पर थोड़ा सा बदलाव करके ऐसा किया जा सकता है. एक ही लीवर खींचने से चारों अपराधी मौत के घाट उतारे जा सकते हैं.