Agenda Aaj Tak 2023: भारतीय शिक्षा क्षेत्र में आने वाले बड़े बदलाव पर केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री की क्या सोच है? आजतक के 'एजेंडा आजतक' कार्यक्रम के सेशन 'भारतीयता का पाठ' की शुरुआत इस सवाल के जवाब से हुई. सेशन के दौरान मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Education Minister Dharmendra Pradhan) ने शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव (राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020) पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'अमृत काल' के अंदर सभी को आह्वान किया है कि 2040 को भारत को एक विकसित देश बनाकर रही रहेंगे, हमारे सामने और कोई ऑप्शन नहीं है. यह सिर्फ भारत की आवश्यकता नहीं है, यह दुनिया की आवश्यकता है कि भारत जैसे एक संतुलित सभ्यता, दुनिया के विकास का केंद्र बिंदु बने, इसलिए हमें विकसित, आत्मनिर्भर और स्वावलंबी होना पड़ेगा तब जाकर दुनिया में एक जाकर सही संतुलन रहेगा और ये तभी संभव होगा जब सभी रचनाओं के केंद्र सही शिक्षा होगी. शिक्षा सही होगी, शिक्षा की उपज सही निकलेगी और दिशा सही होगी तो जिस अपेक्षित समाज और विकसित देश की हम कल्पना कर रहे हैं, उसी दिशा में जा सकेंगे.
स्कूलों में 10+2 की जगह आया 5+3+3+4 फार्मेट क्या है?
इसपर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 34 सालों के बाद भारत में एक पैराडाइम शिफ्ट करने का प्रयास किया गया है. 2020 से 34 साल पहले शिक्षा के बारे में एक नीति थी, 34 साल बाद पीएम मोदी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लाए जिसे संविधान सभा की तर्जी पर बहुत बड़े विमर्श के बाद सभी अनुभव को समाहित करते हुए एक मसौदा प्रस्तूत किया गया है. इसके कई रूप, रंग और आयाम हैं. इससे कई उपलब्धियां हासिल होने की प्रतिबद्धता है.
उन्होंने आगे कहा पहले हमारी पहली क्लास से पढ़ाई शुरू होती थी, 1 से 12वीं तक जो 12 साल की व्यवस्था थी जिसे अब 15 साल (5+3+3+4) किया गया है. बच्चे की तीन से आठ वर्ष की आयु में मानसिक विकास 85 प्रतिशत हो जाता है. इसलिए भारत में शिक्षा को, नई चीजों को व्यवस्थित तरीके से सीखने की प्रक्रिया को एज-3 से शुरू किया गया है.
5+3+3+4 फॉर्मेट को ऐसे समझें
शिक्षा मंत्री ने समझाया कि 5+3+3+4 फॉर्मेट में 5 यानी फाउंडेशनल स्टेज जिसे दो भागों में बांटा गया है. पहला बाल वाटिका या प्री-स्कूल के 3 साल + प्राथमिक स्कूल में 2 साल. 8 साल की उम्र में बच्चा दूसरी क्लास पास कर लेगा. इसके बाद पहले 3 में तीसरी से 5वीं, फिर क्लास 8 तक +3 और फिर 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं तक +4 फॉर्मेट होगा. इसमें दो बार बोर्ड परीक्षा होगी.
जादुई पिटारा
15 साल की पढ़ाई की शुरुआत किताबों से नहीं होगा बल्कि खिलौनों, कहानियों, मैजिक, गीत, डांस से होगी. बच्चों के प्ले स्कूलों को फॉर्मल रूप देना है. इसलिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिश पर NCF बनी और उनका लर्निंग और टीचिंग लर्निंग मैटेरियल भी आ गया है, जिसे जादुई पिटारा नाम दिया गया है. उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में गणित और भाषा का इंट्रो खेल-खेल में शुरू होगा. 8 साल तक इसपर ध्यान देते हैं तो बच्चे की क्रिटिकल थिंकिंग बनेगी. देशभर में इसका इंप्लीमेंट शुरू हो चुका है. आने वाले 3-4 सालों में लाभ देखने को मिलेगा.