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'ASI बताएगा कि हम कहां नमाज पढ़ें, कहां वजू करें...' संभल विवाद पर बोले इमरान मसूद

Agenda Aaj Tak 2024 Imran Masoud: एजेंडा आजतक 2024 के 'मामला लीगल है' सेशन में इमरान मसूद ने एएसआई सर्वेक्षण को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि एएसआई प्रोटेक्टर है, लेकिन अब यह तय करने लगा है कि मुसलमान कहां नमाज पढ़ें. सुधांशु त्रिवेदी ने प्रतिक्रिया में इतिहास और पहचान की बात करते हुए कहा कि सत्य सामने आने पर घबराहट क्यों है.

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कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Photo - अरुण कुमार)
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Photo - अरुण कुमार)

Agenda Aaj Tak 2024: एजेंडा आजतक के मंच पर 'मामला लीगल है' सेशन में शामिल हुए इमरान मसूद ने संभल मस्जिद में एएसआई सर्वे को लेकर सवाल उठाए. मस्जिदों में किए जा रहे सर्वे को लेकर इमरान मसूद ने कहा कि एएसआई की स्थापना हुई 1872 में और काम शुरू हुआ 1905 में. यह मस्जिद बनी है उससे भी तीन सौ साल पहले. एएसआई तो प्रोटेक्टर है. एएसआई ने मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया. कांग्रेस सांसद ने कहा कि अब एएसआई बताएगा कि हम कहां नमाज पढ़ें, कहां वजू करें. 

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इमरान मसूद ने कहा कि एएसआई प्रोटेक्टर है. रेलिंग लगी है, वह हो सकता है उसके बाद लगी हो. सर्वे की बात है तो उसी दिन न्यायालय का आदेश आया और सर्वे शुरू हो गया. भीड़ आ गई.  मुसलमान होकर यह कह रहा हूं कि सबसे ज्यादा सुखी और सुरक्षित हिंदुस्तान में हूं.

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कहते हैं एएसआई प्रोटेक्टर है, और फिर...

इमरान मसूद के इस प्रतिक्रिया पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि दिल की आरजू जुबान पर आ ही गई. कहते हैं कि एएसआई तो प्रोटेक्टर है. फिर कहते हैं कौन होता है एएसआई यह तय करने वाला कि हम कहां वजू करेंगे और कहां नमाज. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि तीन सौ साल पुराना कहेंगे तो ये भी देखा जाएगा कि तीन हजार साल पहले क्या था.

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बीजेपी सांसद ने कहा कि अकबर इलाहाबादी से लेकर मजरुह सुल्तानपुरी तक का जिक्र करते हुए कहा कि ये पहले पहचान हुआ करते थे. अब आपने जाकिर नाइक, बुरहान वानी से जोड़ लिया है. उन्होंने ये भी कहा कि सारी चीजों पर 15 अगस्त 1947 आ जाए. सर्वे जमीन के अंदर का हो या शरीर के डीएनए का हो, घबराहट इस बात की होती है कि असलियत निकल आएगी कि डीएनए रामदास का है, बाबर का नहीं है.

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अकबर से लेकर बाबर तक का इतिहास...

सुधांशु त्रिवेदी ने अकबर से लेकर बाबर तक, इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि सारे उदाहरण भरे पड़े हैं कि मारकर ही गाजी की उपाधि ली गई. आरजी रमल ने रिसर्च में कहा है कि पिछले दो हजार साल में सरकार की ओर से मारे गए लोगों का आंकड़ा एक करोड़ से अधिक है. 13वीं सदी तक किसी को नहीं मारा गया. इसके बाद क्या हुआ, नहीं मालूम है.

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