Agenda AajTak 2024: एजेंडा आजतक के दूसरे दिन सेशन- 'हंसी खुशी' में कवि सुरेंद्र शर्मा और अशोक चक्रधर ने शिरकत की. इस दौरान खिलखिलाहट और सीरियस दोनों तरह की गुफ़्तगू हुई. लोगों तक ख़ुद की बात पहुंचाने के तरीक़े के सवाल पर कवि सुरेंद्र शर्मा ने कहा, "जब मैं आपका ट्रेड सीक्रेट नहीं पूछ रहा हूं, तो अपना ट्रेड सीक्रेट क्यों बताऊं." कवि के इस जवाब से प्रोग्राम में शामिल लोगों के चेहरे पर खिलखिलाहट छा गई और पूरे ऑडिटोरियम में हंसी गूंज पड़ी."
'आपके जैसा बनने के लिए लोगों को क्या करना होगा?', इस सवाल पर सुरेंद्र शर्मा ने कहा, "मेरे जैसे बनने के लिए लोगों खुद की उम्र अस्सी साल करनी होगी. हम युद्ध नहीं करते, प्यार और मोहब्बत की बातें करते हैं. मुल्क प्यार, मोहब्बत से चलता है, नफरत से नहीं. "
इसके बाद उन्होंने एक शेर सुनाया, जो इस तरह है...
पानी की मदद तो तुम्हें लेनी होगी,
ख़ून से ख़ून नहीं जाता धोया.
वहीं, हिंदी के मशहूर कवि अशोक चक्रधर ने कवि गोपालदास नीरज की कविता सुनाते हुए अपनी बात की शुरुआत की...
खुशी जिसने खोजी, वो धन ले के लौटा
हंसी जिसने खोजी, चमन ले के लौटा
मगर प्यार की खोज में जो चला जो
न तन ले के लौटा, न मन ले के लौटा
अशोक चक्रधर ने कहा, "खुशी की खोज में जो जाता है धन लेकर आता है, लेकिन आज तक जो खुशी की खोज में जाता है, वो चमन लेकर आता है और हंसी की खोज में जो जाता है, वो धन ले के आता है."
ये घर है दर्द का घर पर्दे हटा के देखो
ग़म है हंसी के अंदर पर्दे हटा के देखो
- अशोक चक्रधर
उन्होंने आगे कहा, "हम वक़्त के बोर्ड के लोग हैं, वक़्फ के बोर्ड या किसी धार्मिक स्थान के नहीं हैं बल्कि हम मार्मिक स्थान के हैं. जहां देश के प्रति प्रेम है, हम वहां के हैं. हम लड़ाई वाले नहीं, हम प्रेम वाले हैं.
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कवि ने बताया एक और एक का साहित्यिक गणित
अशोक चक्रधर ने आगे कहा, "एक और एक दो होता है सामान्य नर-नारियों के लिए, एक और तीन होता व्यापारियों के लिए, एक और एक ग्यारह होता है सिद्धहस्थों के लिए, एक और एक सिर्फ एक होता है इश्क़ परस्तों के लिए."
उन्होंने आगे कहा कि हम प्यार और मोहब्बत वाले लोग हैं. कई बार भारी बातें होती है और हम उनके प्रति आभारी नहीं हो पाते हैं. ऐसे वक़्त पर सुरेंद्र जी काम आते हैं. कोई सद्भाव में भी पूछ रहा है, तो उससे भी कहते हैं, क्यों.
अशोक चक्रधर ने कहा, "जनता का तेवर कवियों को बहुत जल्दी पता चल जाता है, अगर कवि निर्पेक्ष ढंग से जनता के बीच जाएं, कविता सुनाएं और तालियों की गणना करें, तो आपको पता चल जाएगा कि वैलेट में कितना वोट किसके लिए गिरने वाले हैं. तापमान कभी भी बदल सकता है."