एजेंडा आजतक के दूसरे दिन यानी शनिवार को एक हैं तो सेफ हैं सेशन में कांग्रेस की प्रवक्ता मुमताज पटेल, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया, भाजपा की तरफ से शहजाद पूनावाला , शिवसेना शिंदे नेता शायना एनसी, वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष, राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी ने भी हिस्सा लिया. इस मुद्दे पर सभी वक्ताओं ने जोरदार तरीके से अपनी बात रखी. कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने एक हैं तो सेफ है नारे पर भाजपा को आड़े हाथों लिया.
ये नारा संविधान की भावना के खिलाफ
मुमताज पटेल इस स्लोगन पर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि हमें किससे सेफ होना है. कौन हमारा दुश्मन है. पहली नजर में ये नारा एकता का अपील लगता है. लेकिन गहराई से सोचेने पर समझ आता है कि यह नारा अपने उद्देश्य, प्रभाव और भारत के विचार और संविधान के भावना से मेल ही नहीं खाता है.
ये भाषा विभाजनकारी
मुमताज पटेल आगे कहती हैं कि हमें किसके खिलाफ एक होने की आवश्यकता है. इस तरह की भाषा हमारे देश के लिए विभाजनकारी हो सकती है. क्या इस नारे के जरिए हमें किसी विशेष समुदाय, विचारधारा या समुह के खिलाफ एकजूट होने को कहा जा रहा है. क्या हमें किसी विशेष संस्कृति और धर्म के हिसाब से चलना होगा. अगर ऐसा है तो यह संविधान के खिलाफ हैं. देश के हर नागरिक को अपनी पहचान का अधिकार है. क्या बीजेपी राजनीतिक असहमति, अल्पसंख्यकों या उन लोगों के खिलाफ एक होने की कह रही है जो उनसे उनके कामों की जवाबदेही मांगते हैं. ऐसी सोच देश के बहुत ही खतरनाक साबित होगी.
बीजेपी ध्यान भटकाना चाहती है
मुमताज पटेल कहती हैं कि एक हैं तो सेफ हैं का नारा भारत के विचार को कमजोर करता है. विविधिता में एकता ही हमारे देश का सिद्धांत है. बीजेपी इस नारे के माध्यम से आर्थिक असमानता, बेरोजगारी से ध्यान हटाकर बेकार मुद्दों में ध्यान भटकाना चाहती है. ये ऐसा नारा है जो जोड़ता नहीं बांटता है. हमको बंटना नहीं है. हमने तो यही सीखा है यूनाइटेड इंडिया सेफ इंडिया.