एजेंडा आजतक के कार्यक्रम में यह पूछने पर कि कृषि कानून वापस लेने पर विचार हो रहा है, मोदी के इस इस फैसले के बारे में क्या आपको पता था? इस पर केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री के इस फैसले की जानकारी थी. किसानों की मांग के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ये फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि किसानों की मांग थी कि कानून वापस ले लीजिए. अब तो कानून वापस ले लिए गए.
रुपाला ने कहा कि इसके बावजूद अब तक किसानों ने आंदोलन खत्म नहीं किया है. उन्होंने कहा कि मांग पूरी होने के बाद भी किसानों का यह आंदोलन खत्म न होना बताता है कि इसके पीछे कोई था.
एमएसपी गारंटी की मांग कर रहे किसानों ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मांग की थी. रूपाला ने कहा कि किसानों से बातचीत भी की गई. उन्होंने कहा कि बातचीत में कभी भी उनमें किसी का भी दिल दुखा हो, ऐसी एक भी बात कृषि मंत्री के माध्यम से नहीं कही गई. उनके बीच बातचीत में भी कभी कड़वाहट नहीं आई.
उन्होंने कहा कि इतने लंबे दौर में हमारे ही मंत्रिमंडल के साथियों ने और हमारे कृषि मंत्री के नेतृत्व में किसानों से बात की. उन्होंने कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला की टिप्पणी पर कहा कि हम पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया जा रहा है, कहा जा रहा है कि हमारी सरकार ने धोखा दिया. यह गलत आरोप हैं.
कांग्रेस के नेताओं ने नहीं की थी स्वामीनाथन रिपोर्ट पर बात
रूपाला ने कहा कि सरकार ने कहा था कि किसानों को 50% का मुनाफा मिलना चाहिए. मंत्री रूपाला ने कहा कि स्वामीनाथन ने यह सिफारिश की थी. उन्होंने कहा कि स्वामीनाथन की सिफारिश को रिपोर्ट पेश होने के बाद लागू नहीं किया था, जब डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे, तब उनके सामने यह बात कभी भी कांग्रेस के दोस्तों ने किसानों के सामने नहीं रखी.
उन्होंने कहा कि मैं आज भी कहता हूं कि कानून वापस हो जाने के बाद भी मेरे पास कई किसानों ने आकर कहा है कि किसानों के लिए कानून होना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छोटे किसानों के लिए बीमा योजना का जिक्र भी सुरजेवाला ने किया है कि वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को बदल दिया गया. उन्होंने कहा कि योजना में जब मॉडिफिकेशन हुआ, सबसे अहम मुद्दा था. लोन फार्म के लिए प्रीमियम कंपलसरी कर दिया गया. सभी प्रांतों के लिए इसे दो प्रतिशत कर दिया गया. प्रधानमंत्री ने यह प्रीमियम स्वैच्छिक कर दिया था.