'एजेंडा आजतक' के सत्र 'यंगिस्तान में है दम' में क्रिकेटर सुरेश रैना, अभिनेता रणदीप हुडा और केंद्र में राज्यमंत्री सचिन पायलट ने गर्मजोशी से शिरकत की और सवालों के बड़े बेबाकी से जवाब दिए.
देश जवां हो, तो तकदीर भी जवां
सुरेश रैना ने कहा कि जब देश जवां हो, तो तकदीर भी जवां होती है. रैना ने कहा कि एक आर्मी मैन का बेटा होने के कारण ही उन्होंने लड़ते रहना सीखा है. उन्होंने स्वीकार किया कि युवाओं की तरह सोचना बहुत जरूरी है.
'सचिन का टीम में रहना जरूरी'
क्रिकेट की दुनिया के 'भगवान' माने जा रहे सचिन तेंदुलकर के बारे में सुरेश रैना ने कहा कि उनका भारतीय टीम में बना रहना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि टी-20 भरपूर मनोरंजन वाला क्रिकेट है. साथ ही उन्होंने कहा कि वे टेस्ट टीम का हिस्सा बनने को इच्छुक हैं. उन्होंने कहा कि उनके खेलने का तरीका एकदम अलग है.
देश के युवाओं के ख्वाब बड़े: रणदीप हुडा
'यंगिस्तान में है दम' सत्र में अभिनेता रणदीप हुडा ने कहा कि इस देश के युवाओं के ख्वाब बड़े हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे ही युवाओं के साथ मिलकर देश बहुत आगे निकल सकता है.
खाप का तरीका है गलत
खाप और ऑनर किलिंग के बढ़ते मामलों पर रणदीप हुडा ने कहा कि खाप जो बातें करती हैं, वो कुछ हद तक सही हैं, पर उसका तरीका गलत है. उन्होंने कहा कि खाप गोत्र शादी को लेकर सही बोलती हैं. उन्होंने कहा कि खाप पंचायतें जिस तरह अपनी बातें थोपती हैं, वह बिल्कुल गलत है.
हर कोई बनता है राजनीति का हिस्सा
सचिन पायलट ने कहा कि राजनीति से युवा वर्ग को बड़ी उम्मीदें हैं, क्योंकि युवा देश के बारे में सबसे ज्यादा सोचता है. उन्होंने कहा कि चाहे वह क्रिकेटर हो या अभिनेता, आखिरकार राजनीति का हिस्सा हर कोई बनता है.
जनता के बीच पैठ बनाए रखना अहम
राजनीति में अपने अनुभव को साझा करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि जनता के बीच में पैठ बनाए रखना सबसे अहम और सबसे कठिन काम है. उन्होंने कहा, 'मैं अपनी जनता के लिए जिम्मेदार हूं, जिसने मुझे चुना'. उन्होंने कहा, 'जनता आपके साथ न हो, तो आप सरपंच भी नहीं बन सकते. मैंने अपने अनुभवों से सीखा कि मैं अपनी क्षमता का इस्तेमाल राजनीति में ही कर सकता हूं. राजनीति में आने के लिए मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं था'.
सिर्फ बातों से नहीं मिटेगा भ्रष्टाचार
सचिन पायलट ने कहा कि अच्छे लोग अगर चुनकर आए, तो स्वभाविक रूप से देश में बदलाव आ सकता है. उन्होंने कहा कि देश में संवाद में कमी आई है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का जमीनी तौर पर निराकरण सिर्फ बातें करने से नहीं होगा. उन्होंने स्वीकार किया कि भारत बदलना उनके वश की बात नहीं है, भले ही इसमें वे योगदान करने को इच्छुक हैं.
परिवार का फायदा तो मिलता है...
सचिन पायलट ने कहा कि अगर आप लोगों की उम्मीदों पर खड़े नहीं उतरते हैं, तो परिवार का फायदा खत्म हो जाता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि परिवार का नुकसान यह है कि इससे आपकी तुलना होने लगती है. फिर भी उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीतिक परिवार का सदस्य होने से फायदा तो मिलता ही है.