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e-एजेंडा: शेखावत बोले- कोरोना पर भीलवाड़ा मॉडल के पीछे गहलोत सरकार नहीं, जनता का हाथ

कोरोना से निपटने के लिए राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल की काफी चर्चा है. इसमें राजस्थान सरकार का कितना रोल है या जनता ने किया इसे सफल? लॉकडाउन से जल स्रोतों पर क्या असर हुआ. गंगा की सफाई में किन फैक्टरों ने मदद की. और आगे के लिए क्या प्लान है सरकार का. इस बारे में आजतक के e-एजेंडा में बात की केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने. इस कार्यक्रम में मोदी कैबिनेट के 17 मंत्री हिस्सा ले रहे हैं.

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केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत (फाइल फोटो)
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत (फाइल फोटो)

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  • 'संकट में सामाजिक संस्थाओं ने राजस्थान को संभाला'
  • 'बस के बाद रेल और बाद में किराये पर राजनीति हुई'

आजतक के खास कार्यक्रम 'ई-एजेंडा जान भी, जहान भी' में शनिवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने हिस्सा लिया. उन्होंने बांधों में पानी की उपलब्धता, गंगा सफाई और आईसीएमआर को भेजे गए उस प्रस्ताव के बारे में भी बताया जिसमें कोविड-19 के इलाज में गंगा जल के क्लीनिकल टेस्ट की बात कही गई है. जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान में कोरोना वायरस के संक्रमण और भीलवाड़ा मॉडल पर भी बात की जिसकी चर्चा पूरे देश में है. हालांकि उन्होंने भीलवाड़ा मॉडल का श्रेय राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार को न देकर भीलवाड़ा की जनता को दिया.

गजेंद्र शेखावत राजस्थान से आते हैं, जहां कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है. राजस्थान की प्रदेश सरकार ने इसे रोकने के क्या उपाय किए या आगे इस दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इस पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने कहा कि राजस्थान में कोरोना को लेकर चूक हुई है. जो सरकार भीलवाड़ा के नाम पर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहां मुख्यमंत्री के क्षेत्र में क्या हालत है. वहां कोरोना के इतने मरीज क्यों मिल रहे हैं. गजेंद्र शेखावत ने कहा, इस (कोरोना) मुद्दे पर राजनीति की गई.

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किराये पर राजनीति

अभी हाल में कोटा से छात्रों और पूरे राजस्थान से मजदूरों की वापसी पर काफी विवाद हुआ, खासकर किराये को लेकर. इस पर शेखावत ने कहा, बस की अनुमति दी गई तो रेल की मांग की गई. जब रेल शुरू की गई तो किराए को लेकर राजनीति हुई. राजस्थान सरकार को सोचना चाहिए कि कहां चूक हुई, अभी राजनीति करने का समय नहीं है. भीलवाड़ा मॉडल पर उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में भीलवाड़ा मॉडल क्यों सफल नहीं हुआ? अगर भीलवाड़ा में कोरोना पर सफलता मिली है तो इसका पूरा श्रेय वहां के लोगों को जाता है. जनता इसमें मदद करने के लिए खुद आगे आई थी.

शेखावत ने कहा- बता दूं, राजस्थान में समाज और सामाजिक संस्थाओं ने काफी कुछ माहौल संभाला है, उस पर हमें गौर करना चाहिए. सामाजिक संस्थाओं ने लोगों को भोजन पहुंचाया. आज संस्थाओं ने हाथ खींच लिए तो सच्चाई सामने आ गई. अंत में उन्होंने कहा कि कोरोना के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. संकट के इस काल में हमें मिलजुल कर आगे बढ़ना होगा.

गंगा जल का क्लीनिकल टेस्ट

इससे पहले गंगा जल के क्लीनिकल ट्रायल के बारे में गजेंद्र शेखावत ने कहा कि उनके मंत्रालय के साथ नदियों पर काम करने वाले कई संगठनों ने इसका प्रस्ताव भेजा था. उसमें कहा गया था कि कोविड-19 के इलाज में क्या गंगा के पानी का इस्तेमाल हो सकता है, इसका क्लीनिकल टेस्ट किया जाना चाहिए. वह भी ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है. गजेंद्र शेखावत ने कहा, गंगा का पानी 100 साल भी रख दें तो खराब नहीं होता. गंगा के पानी में अन्य नदियों की तुलना में खास विशेषता है, यह हम सदियों से जानते हैं. कोविड के जांच में गंगा के पानी का इस्तेमाल हो सकता है, इस बारे में अध्ययन के लिए आईसीएमआर को प्रस्ताव भेजा था.

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पहले से स्वच्छ हुई गंगा

गंगा स्वच्छता मिशन के बारे में जलशक्ति मंत्री ने कहा कि पिछले 5 साल में मिशन मोड पर काम हुआ है, इसका प्रभाव दिख रहा है. इसमें कई संगठनों ने मदद की है. मैंने गंगा नदी का पानी पी कर देखा है, यह ऋषिकेश तक पीने लायक है. लॉकडाउन के दौरान जो बरसात हुई, उससे भी नदियों में प्रवाह बढ़ा है. पानी का प्रवाह ज्यादा होने से क्वालिटी सुधरी है. नदी में अगर प्रवाह बढ़ाया जाए तो प्रदूषण कम किया जा सकता है. प्रवाह निरंतर बना रहे, इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा. गजेंद्र शेखावत ने कहा, गंगा में सीवेज रोकने में हम कामयाब हुए हैं. कानपुर में जहां कोई एक्वेटिक लाइफ नहीं बची थी, उसमें सुधार हुआ है. दुनिया की नदियों की तुलना करें तो हमारी गंगा सबसे स्वच्छ है.

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