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e-एजेंडा: मंत्री शेखावत बोले- कोरोना को रोकने को भेजा था गंगाजल के टेस्ट का प्रस्ताव

क्या कोविड-19 के इलाज में उपयुक्त हो सकता है गंगा का पानी, इसके लिए आईसीएमआर को प्रस्ताव भेजा गया है. लॉकडाउन से जल स्रोतों पर क्या असर हुआ. गंगा की सफाई में किन फैक्टरों ने मदद की. और आगे के लिए क्या प्लान है सरकार का. इस बारे में e-एजेंडा में बात की केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने. इस कार्यक्रम में मोदी कैबिनेट के 17 मंत्री हिस्सा ले रहे हैं.

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जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत (फाइल फोटो)
जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत (फाइल फोटो)

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  • गंगा पर काम करने वाले संगठनों का था प्रस्ताव
  • प्रस्ताव में गंगा जल के क्लीनिकल टेस्ट की बात

आजतक के खास कार्यक्रम 'ई-एजेंडा जान भी, जहान भी' में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम में उन्होंने गंगा स्वच्छता मिशने से लेकर नदियों में पानी की उपलब्धता जैसे विषयों पर विस्तार से बात की. गजेंद्र शेखावत ने राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल के बारे में भी बताया. जलशक्ति मंत्री से यह भी पूछा गया कि कोविड-19 के इलाज को लेकर गंगा जल के इस्तेमाल के लिए आएसीएमआर को पत्र भेजा गया था, उसका क्या हुआ. इस बारे में भी गजेंद्र शेखावत ने अपने मंत्रालय की बात बताई.

गंगा जल के क्लीनिकल ट्रायल के बारे में गजेंद्र शेखावत ने कहा कि उनके मंत्रालय के साथ नदियों पर काम करने वाले कई संगठनों ने इसका प्रस्ताव भेजा था. उसमें कहा गया था कि कोविड-19 के इलाज में क्या गंगा का पानी का इस्तेमाल हो सकता है, इसका क्लीनिकल टेस्ट किया जाना चाहिए. वह भी ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है. गजेंद्र शेखावत ने कहा, गंगा का पानी 100 साल भी रख दें तो खराब नहीं होता. गंगा के पानी में अन्य नदियों की तुलना में खास विशेषता है, यह हम सदियों से जानते हैं. कोविड के जांच में गंगा के पानी का इस्तेमाल हो सकता है, इस बारे में अध्ययन के लिए आईसीएमआर को प्रस्ताव भेजा था.

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बता दें, अभी हाल में आईसीएमआर ने गंगा जल के क्लीनिकल टेस्ट करने से मना कर दिया था और कहा था कि कोविड-19 के इलाज में गंगा का पानी इस्तेमाल हो सकता है या नहीं, इसका कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है. बिना वैज्ञानिक तथ्य या आंकड़ों के टेस्ट करने की जरूरत नहीं बनती. गंगा के पानी में बैक्टीरियोफेज का अंश होता है, लेकिन यह बैक्टीरिया को मारता है न कि वायरस को. कोविड-19 बीमारी वायरस से जुड़ी है, इसलिए बैक्टीरिया का इसपर असर नहीं देखा जा सकता.

आजतक की खास चर्चा में हिस्सा लेते हुए जलशक्ति मंत्री ने कहा, देश में जो भी बांध हैं, उनके इनफ्लो और आउटफ्लो पर ध्यान है. 132 बांधों की जहां तक बात है तो 56 फीसदी बांधों में औसत से ज्यादा पानी है. इस बार पहाड़ों पर बर्फबारी भी खूब हुई है, इसका फायदा हमें मिलेगा. इस बार हालात पिछली बार की तुलना में अच्छे रहेंगे. नदियां बहुत स्वच्छता से बह रही हैं, इस पर जलशक्ति मंत्री ने कहा कि इसकी संभावना का हमें अंदाजा पहले ही हो गया था. वॉटर क्वालिटी मैनेजमेंट के लिए जो भी संस्थाएं काम करती हैं, उनसे पहले ही बात हुई थी कि गंगा-यमुना आदि नदियों पर हमें काम करना है. एक साथ इंडस्ट्री बंद हुई हैं, इसका नदियों पर क्या असर पड़ा है, इस पर हम अभी स्टडी करेंगे. अभी इस बारे में स्पष्ट कुछ नहीं कहा जा सकता.

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गंगा स्वच्छता मिशन के बारे में जलशक्ति मंत्री ने कहा कि पिछले 5 साल में मिशन मोड पर काम हुआ है, इसका प्रभाव दिख रहा है. इसमें कई संगठनों ने मदद की है. मैंने गंगा नदी का पानी पी कर देखा है, यह ऋषिकेश तक पीने लायक है. लॉकडाउन के दौरान जो बरसात हुई, उससे भी नदियों में प्रवाह बढ़ा है. पानी का प्रवाह ज्यादा होने से क्वालिटी सुधरी है. नदी में अगर प्रवाह बढ़ाया जाए तो प्रदूषण कम किया जा सकता है. प्रवार निरंतर बना रहे, इसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा. गजेंद्र शेखावत ने कहा, गंगा में सीवेज रोकने में हम कामयाब हुए हैं. कानपुर में जहां कोई एक्वेटिक लाइफ नहीं बची थी, उसमें सुधार हुआ है. दुनिया की नदियों की तुलना करें तो हमारी गंगा सबसे स्वच्छ है.

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