जर्मनी के आम चुनावों में कंजर्वेटिव पार्टी की जीत के साथ ही फ्रेडरिक मर्ज के चांसलर बनने का रास्ता साफ हो गया. इस वक्त जब अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में बर्फ जमती दिख रही है, ऐन तभी मर्ज ने बड़ा बयान देते हुए जर्मनी को असल मायनों में अमेरिका से आजाद कराने की बात कर दी. बर्लिन को लेकर ऐसी बातें पहले भी हो चुकीं.
हमास और इजरायल के बीच अस्थाई युद्ध विराम का पहला चरण शनिवार को खत्म होगा. इससे पहले हमास ने वो काम किया, जो इजरायल के गुस्से को दोबारा हवा दे सकता है. दरअसल 600 से कुछ ज्यादा फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले उसने तेल अवीव को चार बंधकों के शव सौंपे. अब इसपर अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी नाराजगी जताई है.
अगर 2026 में प्रस्तावित देशव्यापी परिसीमन को सिर्फ आबादी के आधार पर किया गया तो इसके परिणाम देश में सत्ता का संतुलन व्यापक रूप से बदल सकते हैं. इसमें हो सकता है कि दक्षिणी राज्यों को कुछ नुकसान हो. और यूपी-बिहार का पलड़ा एकदम से भारी हो जाए. लेकिन देश के दक्षिणी नेतृत्व को आश्वस्त करते हुए केंद्र ने कहा है कि उनकी लोकसभा सीटें घटेंगी नहीं. फिर परिसीमन का आधार क्या होगा ये बड़ा सवाल है.
बीते साल दुनियाभर में आजादी का स्तर नीचे गिरा, ये भारत पर भी लागू है. अमेरिका में बैठकर लगभग सारे देशों के लोकतंत्र पर नजर रखने वाले फ्रीडम हाउस ने साल 2021 में ही भारत को 'आजाद' से 'आंशिक तौर पर स्वतंत्र' देश की श्रेणी में डाल दिया था. अब रिपोर्ट के अनुसार, इसमें और गिरावट आ चुकी. लेकिन फ्रीडम हाउस का सर्वे खुद ही अपनी निष्पक्षता के लिए सवालों से घिरा रहा.
अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में डोनाल्ड ट्रंप के वाइट हाउस पहुंचते ही दरार पड़नी शुरू हो गई. पहले तो ट्रंप ने कनाडाई लीडर जस्टिन ट्रूडो को घेरते हुए उनके देश को अमेरिका से जुड़ने का न्यौता दे दिया. बाद में टैरिफ को लेकर धमकी दी. अब इससे एक कदम आगे निकलते हुए ट्रंप प्रशासन के प्रमुख पीटर नवारो ने कथित तौर पर ओटावा को जासूसी गुट फाइव आईज से हटाने का प्रस्ताव दे दिया.
पोप फ्रांसिस की नाजुक सेहत के बीच चर्चाएं चल रही हैं कि रोमन कैथोलिक चर्च का अगला लीडर कौन हो सकता है. वेटिकन सिटी में अब तक एशियाई या अफ्रीकी मूल के पोप नहीं पहुंचे, जबकि दोनों ही कॉन्टिनेंट्स में ग्लोबल कैथोलिक आबादी का 31 फीसदी हिस्सा बसा हुआ है, वो भी तब जबकि चीन के कैथोलिक्स इसमें शामिल नहीं.
Donald Trump एक तरफ तो अवैध प्रवासियों को निकाल रहे हैं, दूसरी तरफ वे अमीरों को अपने यहां बसने का आमंत्रण दे रहे हैं. राष्ट्रपति की मानें तो अगले कुछ हफ्तों में वहां गोल्ड कार्ड मिलना शुरू हो जाएगा, जो ग्रीन कार्ड से ज्यादा एडवांस होगा. लगभग 43 करोड़ में मिलने वाला ये कार्ड इनवेस्टमेंट पर मिलने वाली नागरिकता की तर्ज पर काम करेगा.
रूस और यूक्रेन के बीच जंग खत्म तो नहीं हुई, बल्कि लड़ाई रोकने की बात कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी जुबानी युद्ध में उलझ पड़े. हाल में उन्होंने यूक्रेन के लीडर वलोडिमिर जेलेंस्की पर तानाशाही का आरोप लगा दिया. ट्रंप कीव में स्थगित चुनावों को लेकर यूक्रेनी नेता को घेर रहे हैं. वहीं लोकप्रियता पर हुआ ताजा सर्वे कुछ और ही कहता है.
हरियाणा की खाप पंचायतें अपने सख्त चेहरे के लिए जानी जाती रहीं लेकिन बदलते वक्त के साथ वे भी नर्म पड़ रही हैं. इसी महीने की शुरुआत में झज्जर जिले के छह गांवों ने मिलकर बड़ा फैसला लेते हुए सदियों पुरानी उस परंपरा को तोड़ा, जिसमें इन गांवों में आपसी शादी-ब्याह बिल्कुल बंद था. दिलचस्प बात ये है कि रिश्तेदारी न होने की वजह दुश्मनी नहीं, बल्कि गहरी दोस्ती थी.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद अब पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने भी एयरलाइन्स की टूटी हुई सीटों पर गुस्सा दिखाया. इसे लेकर एयर इंडिया से लेकर इंडिगो तक घिरे हुए हैं. वैसे काफी लंबे समय से कई एयरलाइन्स स्टैंडिंग रूम फ्लाइट की बात करती रहीं, जिसमें यात्री खड़े होकर सफर करें.
नब्बे के दशक में सोवियत संघ से टूटकर 15 देश बने थे, लेकिन मॉस्को लगातार यूक्रेन पर हमलावर रहा. बीते साढ़े तीन दशक में उसने न केवल इसके कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया, बल्कि कई इलाकों में रूसी अलगाववाद को भी हवा दी. क्या रूस की आक्रामकता यूक्रेन को लेकर वाकई ज्यादा रही, या फिर ट्रंप के अमेरिका की तरह रूस भी खुद को ग्रेटर रशिया की तरह देख रहा है?
महिला IAS की पोस्ट पर हंसी वाला इमोजी बनाने पर असम के एक युवक को पुलिस केस का सामना करना पड़ गया. ये पहला मामला नहीं. फेसबुक या किसी भी सोशल प्लेटफॉर्म पर इमोजी बनाने को लेकर अक्सर बखेड़ा होता रहा. यहां तक कि कई देशों में इसपर लोग जेल तक जा चुके, या भारी जुर्माना देना पड़ा.
'द ग्रेट स्टिंक' ने सचमुच अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था. नाक पर रूमाल रखकर ताजा हवा के लिए लगभग हांफते ब्रिटेन के सांसदों ने अर्बन प्लानिंग की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाया. ये फैसला टेम्स की धारा को नया जीवन देने वाली थी. ये फैसला लंदन में व्यापक सीवरेज सिस्टम बनाने का. ब्रिटेन इसमें सफल भी हुआ. लेकिन फिर आया सेकेंड वर्ल्ड वॉर. और जर्मनी ने लंदन के इस सिविल कंस्ट्रक्शन को तबाह कर दिया.
यूरोप और अमेरिका के संबंधों में दिन-ब-दिन खटास बढ़ रही है. डोनाल्ड ट्रंप आक्रामक बयान दे रहे हैं, जिससे यूरोपियन यूनियन (ईयू) को चिंता सताने लगी कि कहीं ये जोड़ कमजोर होते-होते टूट तो नहीं जाएगा. माना जा रहा है कि ईयू के लिए ये रूस से भिड़ंत से भी ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकती है क्योंकि वो काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर हो चुका है.
कर्नाटक के बेंगलुरु में गर्मियां आने से पहले ही पानी का संकट गहरा चुका है. हाल में बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने पीने के पानी के गैरजरूरी इस्तेमाल पर पाबंदी लगाते हुए बड़ा जुर्माना तय कर दिया. इसके लिए एक नंबर भी जारी हो चुका, जिसपर पानी बर्बाद कर रहे लोगों की शिकायत की जा सकती है.
जनवरी में राष्ट्रपति पद पर आने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप 50 से भी ज्यादा एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स पर दस्तखत कर चुके. इनमें कई आदेश उनके अपने ही देश में बेहद विवादित हैं, वहीं कई ऐसे हैं जिनकी वजह से पूरी दुनिया में कोहराम मचा हुआ है. भारत भी उनमें शामिल है.
उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने के बाद अब एक और बड़ा फैसला हुआ, जिसके तहत दूसरे राज्यों के लोग वहां खेती-किसानी की जमीन नहीं खरीद सकेंगे. बुधवार को मंजूरी पाए कानून में स्टेट के 13 में से 11 जिले शामिल हैं, जहां बाहरियों पर पाबंदी रहेगी. इस फैसले की नौबत आने के पीछे भी एक नहीं, दो-दो बड़ी वजहें रहीं.
डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल खर्चों में कटौती के मूड में हैं और इसका जिम्मा मिला हुआ है एलन मस्क को. दोनों का मानना है कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे विदेशियों पर क्यों खर्च हों! इसी तर्क के साथ फंडिंग रोकी जा रही है. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है. अमेरिका दुनिया का मुखिया भी तभी तक है, जब तक वो मदद करता दिखे, फिर चाहे वो आर्थिक हो, या सैन्य.
जल्द ही डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन मिलने वाले हैं. ये भेंट रूस और यूक्रेन की लड़ाई रोकने को लेकर होगी, लेकिन इसमें यूक्रेन के नेता ही पिक्चर से गायब हैं. इस 'पीस टॉक' पर वहां के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की एतराज जता चुके. वैसे ये पहला मौका नहीं, जब किसी देश के फैसले में वही शामिल नहीं, जबकि ताकतवर मुल्क आपस में उसकी किस्मत तय कर रहे हैं.
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान यूक्रेन के लीडर वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अलग ही अपील कर डाली. उन्होंने यूरोपियन देशों से अपनी एक अलग सेना बनाने की गुजारिश की ताकि अमेरिकी मूड-स्विंग्स में भी वे सेफ रह सकें. तो क्या यूरोप खुद ही NATO का विकल्प तैयार कर सकता है, या फिर ये गुस्सा वक्ती है?
इंडियाज गॉट लेटेंट में भद्दा मजाक करने पर यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया पर कई राज्यों में केस दर्ज हुए. उन्हें रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई गई थी, जिसपर सुनवाई करते हुए अदालत ने भी यूट्यूबर के 'दिमाग में भरी गंदगी' पर फटकार लगा दी. वैसे ये तो हुई मानसिक कूड़े की बात, लेकिन असल में भी ब्रेन में गंदगी बनती रहती है.