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आंध्र प्रदेश में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी को देखते हुए चंद्रबाबू नायडू की सरकार एक नया कानून लाने जा रही है. इस कानून के बाद, आंध्र में स्थानीय निकायों का चुनाव वही लोग लड़ पाएंगे, जिनके दो या उससे ज्यादा बच्चे होंगे. इसके साथ ही उन्होंने ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील भी की है.
मुख्यमंत्री नायडू ने दक्षिण भारत, खासकर आंध्र प्रदेश में बढ़ती बुजुर्ग आबादी पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि चीन, जापान और कई यूरोपीय देशों में भी बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है.
उन्होंने दक्षिणी राज्यों में गिरती फर्टिलिटी रेट का भी जिक्र किया. देश में फर्टिलिटी रेट 2.1 है, जबकि आंध्र में ये 1.6 है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही जारी रहा तो 2047 तक आंध्र में बुजुर्गों की आबादी बहुत होगी, इसलिए हमें अभी से इस पर काम करना होगा.
मगर क्या सीएम नायडू की चिंता वाजिब है? केंद्र सरकार 'यूथ इन इंडिया 2022' नाम की रिपोर्ट बताती है कि भारत में बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है. इसमें अनुमान लगाया गया था कि 2036 तक भारत की आबादी में युवाओं की हिस्सेदारी घटकर 22.7% पर आ जाएगी.
कितना बूढ़ा हो रहा भारत?
पिछले साल संयुक्त राष्ट्र ने 'इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023' जारी की थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि 2050 तक भारत की आबादी में 20.8% हिस्सेदारी बुजुर्गों की होगी. बुजुर्ग यानी जिनकी उम्र 60 साल या उससे ज्यादा होगी. इसका मतलब हुआ कि 2050 तक भारत में हर 100 में से 21 लोग बूढ़े होंगे.
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2010 के बाद से भारत में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है. इसकी वजह से 15 साल से कम उम्र के लोगों की आबादी में हिस्सेदारी घट रही है और बुजुर्ग बढ़ रहे हैं.
अनुमान तो ये भी लगाया गया है कि आने वाले सालों में भारत में 14 साल तक के बच्चों की आबादी से ज्यादा तो बुजुर्ग होंगे. साथ ही 15 से 59 साल के उम्र के लोगों की संख्या भी घट जाएगी.
2050 तक 35 करोड़ लोग बुजुर्ग होंगे
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 1961 के बाद से भारत में बुजुर्ग आबादी कम हो रही थी. बुजुर्ग आबादी बढ़ने की रफ्तार 2001 तक धीमी ही रही. पर उसके बाद ये बढ़ने लगी.
2011-2021 के बीच भारत में बुजुर्गों की आबादी 35.5 फीसदी की दर से बढ़ी. लेकिन 2021 से 2031 के बीच ये दर 40 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान है.
रिपोर्ट के मुताबिक, एक जुलाई 2022 तक देश में बुजुर्गों की आबादी 14.9 करोड़ थी. तब आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 10.5 फीसदी थी. लेकिन 2050 तक भारत में बुजुर्गों की संख्या 34.7 करोड़ होने का अनुमान है. ऐसा हुआ तो उस समय भारत की आबादी में 20.8 फीसदी बुजुर्ग होंगे. जबकि, इस सदी के अंत तक यानी 2100 तक भारत की 36 फीसदी से ज्यादा आबादी बुजुर्ग होगी.
केरल में होंगे सबसे ज्यादा बुजुर्ग
इतना ही नहीं, रिपोर्ट बताती है कि 2021 से 2036 के बीच बुजुर्गों की आबादी और तेजी से बढ़ेगी. बुजुर्गों की आबादी दक्षिण भारत में ज्यादा बढ़ेगी और 2036 तक यहां हर पांच में से एक व्यक्ति बुजुर्ग होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, 2036 तक भारत की आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 15 फीसदी होगी. ज्यादातर दक्षिणी राज्य और पंजाब-हिमाचल जैसे राज्यों की आबादी में बुजुर्गों की आबादी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है. और 2036 तक ये अंतर और ज्यादा होने का अनुमान है.
केरल और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं, जहां आने वाले सालों में बुजुर्ग तेजी से बढ़ेंगे. 2036 तक केरल की आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 22.8% और तमिलनाडु में 20.8% होगी. आंध्र में 19 फीसदी आबादी बुजुर्गों की होगी.
जबकि, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत से कम ही होगी. वो इसलिए क्योंकि यहां फर्टिलिटी रेट ज्यादा है.
चिंता बढ़ाती ये बात!
इस रिपोर्ट में कई ऐसी बातें सामने आई हैं, जो चिंता बढ़ाती हैं. 2022 से 2050 के दौरान भारत की आबादी 18% बढ़ जाएगी. जबकि, बुजुर्गों की आबादी 134% बढ़ने का अनुमान है. वहीं, 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की आबादी 279% तक बढ़ सकती है.
बुजुर्ग बढ़ेंगे तो डिपेंडेंसी रेशियो भी बढ़ेगा. 2021 तक हर 100 कामकाजी लोगों पर 16 बुजुर्ग निर्भर हैं. दक्षिण भारत में ये और ज्यादा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, 1991 में हर एक हजार बुजुर्ग पुरुषों पर 930 बुजुर्ग महिलाएं थीं. लेकिन इसके बाद ये ट्रेंड बदलता गया. 2031 तक हर 951 बुजुर्ग पुरुषों पर 1078 बुजुर्ग महिलाएं होने का अनुमान है.
इसका कारण ये है कि महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से ज्यादा है. अगर कोई पुरुष 60 साल जी लेता है तो वो और 18.3 साल तक जी सकता है. वहीं, अगर महिला 60 साल की उम्र पार कर लेती है तो वो 19 साल और जी सकती है.