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क्या है अराकान आर्मी, जो भारत से सटे शहर पर कब्जे का कर रही दावा, रोहिंग्या मुसलमानों से क्या कनेक्शन?

म्यांमार के एक विद्रोही गुट अराकान आर्मी (AA) ने दावा किया कि उसने म्यांमार के पलेतवा शहर पर कब्जा कर लिया. करीब 30 हजार लड़ाकों वाला ये समूह जिस शहर पर कंट्रोल पाने की बात कर रहा है, वो भारत और बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ है. जानिए, क्या है अराकान आर्मी, और क्यों पड़ोसियों के लिए खतरा बन सकती है.

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म्यांमार में विद्रोही गुट अराकान आर्मी ने तबाही मचाई हुई है. (Photo- Reuters)
म्यांमार में विद्रोही गुट अराकान आर्मी ने तबाही मचाई हुई है. (Photo- Reuters)

म्यांमार लंबे समय से कई मोर्चों पर परेशान है. साल 2021 में वहां चुनी हुई सरकार का तख्तापलट एक विद्रोही गुट की वजह से हुआ. इसके बाद से कई संगठन बन चुके, जो देश में उथल-पुथल मचाए हुए हैं. इन्हीं में से एक है अराकान आर्मी. इसका दावा है कि इसके पास पूरे देश में सबसे ज्यादा लड़ाके हैं, जिनके पास मॉर्डन हथियार और पक्की ट्रेनिंग है. यहां हम सिलसिलेवार ढंग से जानते चलें कि दूसरे देश का मिलिटेंट ग्रुप क्यों हमारे लिए खतरा बन सकता है. 

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सबसे पहले जानते हैं उस शहर के बारे में, जहां कंट्रोल की बात हो रही है. पलेतवा चिन राज्य का एक शहर है, जहां कालाधार नदी है. इसके उत्तर में मणिपुर, पश्चिम में मिजोरम और दक्षिण-पश्चिम में बांग्लादेश है. ये शहर भारत को सीधे म्यांमार से जोड़ने वाले अरबों डॉलर के पोर्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा है. ऐसे में अगर आर्मी की बात सही है, तो इसका सीधा असर दोनों देशों के रिश्ते और कनेक्टिविटी पर भी होगा. 

देश में जो तीन गुट हंगामा मचाए हुए हैं, अराकान उनमें से एक है. ये राखाइन प्रांत का एथनिक समूह है, जिसकी मांग है कि उसे म्यांमार के सेंटर से छुटकारा मिले. यानी ये लोग अपनी पहचान और कल्चर के आधार पर बंटवारा या फिर आजादी चाहते हैं. वैसे इसका शुरुआती मकसद रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों को हक दिलाना था. तब इसका पूरा नाम था, अराकान रोहिंग्या सेल्वेशन आर्मी, जो बाद में अराकान आर्मी ही रह गया. 

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arakan army myanmar claims control over a city bordering india bangladesh photo Reuters

ये देश के उत्तरी हिस्से में एक्टिव है, जहां रोहिंग्या मुस्लिमों की आबादी ज्यादा थी. बर्मीज सरकार का कहना है कि ये लोग बांग्लादेश से आए घुसपैठिए है. यही कहते हुए उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया. इसके बाद ही लड़ाई-झगड़ा शुरू हुआ. अराकान्स की दलील थी कि वे म्यांमार के ही रहने वाले हैं लेकिन वहां की बौद्ध मेजोरिटी उन्हें देश से निकालना चाहती है. 

ग्लोबल थिंक टैंक इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के मुताबिक, अराकान का कनेक्शन पाकिस्तान से है. इसे अताउल्लाह अबू लीड कर रहा था, जो कराची में जन्मा और सऊदी में पला-बढ़ा. म्यांमार में इस गुट ने लगातार कोहराम मचाए रखा. वो पुलिस चौकियों और आम लोगों पर हमले करता था ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके.

हालात इतने बिगड़े के म्यांमार एंटी-टैररिज्म सेंट्रल कमेटी ने उसे आतंकी गुट की लिस्ट में डाल दिया. मलेशिया में भी यहां से काफी लोग पहुंचे और अस्थिरता पैदा करने लगे. इस देश ने भी अराकान्स को आतंकी घोषित कर दिया. 

arakan army myanmar claims control over a city bordering india bangladesh photo Getty Images

संगठन पुलिस और सेना के अलावा आम लोगों पर भी लगातार हमले करने के लिए कुख्यात रहा, वैसे खुद अराकान का कहना है कि उसने लोगों पर कभी हमला नहीं किया. वो सिर्फ बौद्ध बहुमत के की जबर्दस्ती के खिलाफ हथियार उठाता है. 

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अराकान आर्मी पर चरमपंथी इस्लामिक संगठन होने का भी आरोप रहा. हालांकि उसके नेता खुद को सेकुलर बताते हैं. कुछ समय पहले अराकान समेत दो और लड़ाका समूहों ने मिलकर एक नया गुट बना लिया, जिसे थ्री ब्रदरहुड संगठन (3BHA) कहा जाता है. इसमें म्यांमार नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस आर्मी और तांग नेशनल लिबरेशन आर्मी भी हैं. 

वैसे तो ये गुट म्यांमार में ही उठापटक कर रहे हैं, लेकिन खतरा भारत पर भी है. ये वैसा ही है, जैसे पड़ोस के घर में आग लगे तो चिंगारी आप तक भी आ सकती है. म्यांमार में लंबे समय से विद्रोह भड़का हुआ है. खासकर 2017 में रोंहिग्या भागने लगे. इसका सीधा असर भारत पर हुआ. हजारों की संख्या में लोग भागकर हमारे यहां शरण लेने लगे. खासकर नॉर्थ-ईस्टर्न राज्यों में म्यांमार से आए घुसपैठियों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई कि वहां के लोग परेशान हैं. 

arakan army myanmar claims control over a city bordering india bangladesh photo Getty Images

कुछ ही समय पहले कहा गया कि भारत-म्यांमार बॉर्डर पर मुक्त आवागमन व्यवस्था (FMR) को सेंटर खत्म कर देगा. असल में, साल 2018 में देश की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत FMR को छूट मिली है. इससे हुआ ये कि भारत और म्यांमार दोनों देशों के लोग एक-दूसरे की सीमा के 16 किलोमीटर तक भीतर आसानी से आने-जाने लगे. इसके लिए उन्हें सिर्फ एक पास लेना होता था.

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अब यही बंदोबस्त पूर्वोत्तर के गले की हड्डी बन चुका है. वहां की सरकारें लगातार ड्रग्स और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की शिकायत कर रही हैं. 

कई मीडिया रिपोर्ट्स दावा करती हैं कि अकेले मिजोरम में ही 40 हजार से ज्यादा म्यांमार के रिफ्यूजी रह रहे हैं. इसके अलावा मणिपुर और बाकी नॉर्थईस्टर्न राज्यों में भी ये आबादी रहती है.

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