सांपों की दुनिया काफी रहस्यमयी है, जिसकी वजह से वे लगातार चर्चा में भी रहते हैं. हाल में उत्तर प्रदेश का एक मामला सुर्खियों में है, जिसमें एक युवक को कई बार सांप काट चुका. वो हर बार अस्पताल से लौट आता है. इसे लेकर हैरानी भी जताई जा रही है. वैसे अमेरिका में एक शख्स ऐसा था, जिसे लगभग 173 बार बेहद जहरीले सांपों में काटा, लेकिन वो जिंदा रहा. बिल हास्ट उर्फ स्नेक मैन के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में 3 मिलियन से ज्यादा सांप देखे.
बचपन में सांपों के काटने पर जागी दिलचस्पी
न्यू जर्सी में 1910 में जन्मे बिल हास्ट को बचपन से ही सांपों में दिलचस्पी रही. इसकी शुरुआत एक स्काउट कैंप के दौरान हुई, जब जंगल में कैंप लगाते हुए उन्हें एक सांप ने काट लिया. हाथों में सूजन लिए हास्ट को कई घंटों बाद इलाज मिल सका. इसके तुरंत बाद उसी साल उन्हें दोबारा कॉपरहेड नाम के सांप ने डसा. इस बार जहर की वजह से वे हफ्तेभर तक अस्पताल में रहे. इसके बाद ही उनमें सांपों को लेकर अलग ही आकर्षण जागा. वे सांप जमा करने लगे. उनसे करतब करवाने लगे. और फिर मियामी में सांपों का अजायबघर खोल लिया.
लैब में निकालते थे जहर
आगे चलकर हास्ट एक लैब चलाने लगे, जिसका काम सांपों का जहर निकालकर रिसर्च के लिए अस्पताल और यूनिवर्सिटीज को देना था. यहां हर नस्ल के सांप थे, जिनकी जहर की किस्में भी अलग थीं. कुछ तो इतने खतरनाक कि काटने के मिनटभर से भी कम समय में मौत हो जाए. नब्बे के दशक तक हास्ट की लैब सालाना मेडिकल परपस से जहर के 36 हजार सैंपल दिया करती थी.
नंगे हाथों से निकालते थे विष
हास्ट को लगातार सैकड़ों सांपों के काटने की कहानी भी दिलचस्प है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वे जहर निकालने के लिए सांपों को ग्लव्स या किसी उपकरण की मदद से नहीं पकड़ते थे, बल्कि सीधे खुले हाथों से उसका जबड़ा खोलते ताकि उनका जहर एक रबर मेंब्रेन से घिरे ट्यूब में गिर जाए. स्नेक हैंडलिंग के इस खतरनाक तरीके के पीछे हास्ट का तर्क था कि सांपों को उपकरण से पकड़ने पर उन्हें चोट भी लग सकती है. लेकिन यही वजह है कि उन्हें लगातार सांप काटते रहे.
ऐसा नहीं है कि जहर का उनपर कोई असर नहीं हुआ. लगभग दो दर्जन मौके ऐसे भी आए जब हास्ट की हालत काफी खराब हो गई. लंबे समय तक वे पेट की खराबी, आंखों की कमजोरी से लेकर नींद और दिमाग के संतुलन को लेकर भी परेशान रहे लेकिन वे बार-बार ठीक होकर वापस वही काम करने लगते.
फ्लाइट इंजीनियर का भी किया काम
इस बीच लोगों के कहने पर हास्ट ने कई दूसरे काम करने की कोशिश की. यहां तक कि प्रोफेशनल कोर्स भी किए. वे सर्टिफाइट फ्लाइट इंजीनियर थे, जिसने अमेरिकी आर्मी के साथ भी काम किया. हालांकि स्नेक-फार्म के अपने सपने के लिए वे बार-बार काम छोड़ते रहे.
बच्चे की मौत ने छुड़ाया जुनून
मियामी में सांपों का अजायबघर बंद होने के पीछे भी अलग कहानी रही. इस सर्पेन्टाइन को मगरमच्छों के बाड़े से घेरकर रखा गया था ताकि कोई दुर्घटना न घटे, लेकिन यही हादसे की वजह बन गया. परिवार के साथ पहुंचा एक बच्चा मगर के बाड़े में गिर गया और बुरी तरह से मारा गया. इस घटना से बुरी तरह परेशान हास्ट ने उस मगरमच्छ को तो मारा ही, अजायबघर को भी बंद कर दिया. बाद में वे केवल लैब के लिए काम करते रहे.
खून ही बन चुका था एंटीवेनम
दुनिया के कुछ सबसे जहरीले स्नेक्स जैसे कोबरा, वाइपर और रैटल जैसी किस्मों के कई बार काटने पर भी बचने के पीछे एक खास वजह थी. हास्ट अपने जीवन के 6 दशक तक लगातार 32 सांपों के जहर के मेल से बना वेनम पीते रहे. डॉक्टरों ने सचेत किया कि इससे उनकी भयानक मौत हो सकती है, लेकिन हुआ इसका उल्टा. हास्ट ने 100 सालों की उम्र पूरी की. यहां तक कि कई बार ऐसा भी हुआ कि सांपों के काटने के बाद वे तो ठीक रहे, सांप की ही मौत हो गई.
स्नेकबाइट के मरीजों को देते थे ब्लड
सांपों के जहर से हास्ट के खून में एंटीडोट की तरह बन गया यानी सांपों के विष का इलाज करने वाली दवा. फिर हुआ ये कि हास्ट को दुनिया के कई देशों में इमरजेंसी ब्लड डोनेशन के लिए बुलाया गया. उन्होंने 21 मरीजों को अपना खून दिया जो जहरीले सांपों के काटने से मौत के करीब थे. वेनेजुएला ने उन्हें अपना सर्वोच्च नागरिकता पुरस्कार दिया क्योंकि वे घने जंगलों में केवल एक बच्चे को खून देने के लिए जा पहुंचे थे.
अमेरिका के इस स्नेकमैन का सांपों को लेकर जुनून इतना था कि उनकी पहली शादी इसी वजह से टूट गई. बाद में हालांकि उन्होंने दो और शादियां कीं.