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राज्यसभा कैसे चलेगी, सबकुछ जेपी नड्डा की सलाह पर ही होगा... जानें- कितना ताकतवर होता है सदन के नेता का पद?

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा राज्यसभा में सदन के नेता होंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सदन का नेता नियुक्त किया है. नड्डा से पहले पीयूष गोयल सदन के नेता थे. लेकिन अब पीयूष गोयल लोकसभा के सदस्य बन गए हैं. ऐसे में जानते हैं कि राज्यसभा में सदन के नेता का पद कितना ताकतवर होता है?

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प्रधानमंत्री मोदी और जेपी नड्डा. (फाइल फोटो-PTI)
प्रधानमंत्री मोदी और जेपी नड्डा. (फाइल फोटो-PTI)

मोदी सरकार की तीसरी पारी में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को बड़ी जिम्मेदारी मिली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेपी नड्डा को राज्यसभा में सदन का नेता नियुक्त किया है. अब तक राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल थे.

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अब पीयूष गोयल लोकसभा के सदस्य बन गए हैं. इस बार चुनाव में उन्होंने मुंबई उत्तर सीट से जीत दर्ज की है.

मोदी 3.0 में जेपी नड्डा को पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया और अब उन्हें राज्यसभा में सदन का नेता भी बना दिया गया है. जेपी नड्डा इसी साल अप्रैल में तीसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे. नड्डा पहली बार 2012 में राज्यसभा के सदस्य बने थे. फिर 2018 में उन्हें दूसरी बार राज्यसभा का सदस्य चुना गया.

अब जब जेपी नड्डा राज्यसभा में सदन का नेता बन गए हैं, तो जानते हैं कि ये पद कितना ताकतवर होता है? ये भी जानेंगे कि राज्यसभा के सदस्य को सैलरी कितनी मिलती है?

कौन होता है सदन का नेता?

राज्यसभा में सभापति और उपसभापति के बाद सबसे अहम पद सदन के नेता का होता है. राज्यसभा में सदन के नेता आमतौर पर प्रधानमंत्री होते हैं, अगर वो इसके सदस्य हैं. अगर प्रधानमंत्री राज्यसभा के सदस्य नहीं हैं तो फिर वो किसी मंत्री या अपनी पार्टी के किसी सांसद को सदन का नेता नियुक्त करते हैं. 

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सदन के नेता की जिम्मेदारी क्या?

सदन के नेता का काम राज्यसभा की कार्यवाही सुचारू तरीके से चलाना होता है. सार्थक बहस के लिए सदन के सभी सदस्यों के बीच समन्वय बनाए रखने में भी इनकी अहम भूमिका होती है.

सदन के नेता को पहली पंक्ति में पहली सीट दी जाती है, ताकि वो न सिर्फ सरकार बल्कि विपक्ष, मंत्रियों और पीठासीन अधिकारियों के संपर्क में बना रहे.

राज्यसभा के सभापति लगभग सभी काम के लिए सदन के नेता से सलाह लेते हैं. फिर चाहे सदन की कार्यवाही हो या फिर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के लिए दिन और समय का आवंटन हो, सभापति सदन के नेता से सलाह लेते हैं.

फाइनेंस बिल या किसी प्रस्ताव पर चर्चा करनी हो तो उसके लिए भी सभापति सदन के नेता से सलाह लेते हैं. इसके अलावा किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति या नेता का निधन होने पर सदन को स्थगित करना या फिर किसी भी मामले में उनसे सलाह ली जाती है.

सदन के नेता ये भी सुनिश्चित करते हैं कि सदन के सामने लाए किसी भी मामले पर सार्थक चर्चा के लिए सदन को सभी संभव और उचित सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं. इसके साथ ही वो सदन के प्रवक्ता के रूप में भी काम करते हैं.

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कितनी होती है सैलरी?

1954 के सैलरी एंड अलाउंसेस मेंबर ऑफ पार्लियामेंट एक्ट के मुताबिक, राज्यसभा सांसद को हर महीने 2 लाख 30 हजार रुपये मिलते हैं. इसमें एक लाख रुपये बेसिक सैलरी होती है. 70 हजार रुपये निर्वाचन भत्ता और 60 हजार रुपये ऑफिस खर्च के लिए मिलते हैं. इसके अलावा जब संसद सत्र चल रहा होता है तो हर दिन दो हजार रुपये का भत्ता भी मिलता है. इसके साथ ही राज्यसभा सांसद को ट्रैवलिंग अलाउंस और बिजली-पानी फ्री जैसी कई और सुविधाएं भी मिलती हैं. 

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