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तेल मार्केट पर कंट्रोल, 30% जीडीपी, 25% एक्सपोर्ट... नया BRICS बदल देगा दुनिया का पावर बैलेंस!

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका वाले संगठन ब्रिक्स में अब छह और नए देश जुड़ेंगे. हाल ही में हुई ब्रिक्स समिट में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अर्जेंटिना, मिस्र, ईरान और इथियोपिया को शामिल करने पर सहमति बन गई है. लेकिन सवाल ये कि इनके आने से ब्रिक्स को क्या फायदा होगा? कितना बदल जाएगा ब्रिक्स?

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ब्रिक्स में अब 11 सदस्य होंगे. (फोटो क्रेडिटः ट्विटर)
ब्रिक्स में अब 11 सदस्य होंगे. (फोटो क्रेडिटः ट्विटर)

ब्रिक्स में छह और नए देश जुड़ जाएंगे. हाल ही में साउथ अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में हुई 15वीं ब्रिक्स समिट में इन देशों को संगठन में शामिल करने पर सहमति बनी है. ब्रिक्स में अब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अर्जेंटिना, मिस्र, ईरान और इथियोपिया भी शामिल हो जाएंगे. साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के मुताबिक, ये सभी छह नए देश 1 जनवरी 2024 से ब्रिक्स के परमानेंट सदस्य बन जाएंगे. 

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नए देशों के जुड़ने के साथ ही ब्रिक्स में अब दुनिया के 9 सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से 6 इसके सदस्य बन गए हैं. इनमें सऊदी अरब, रूस, चीन, ब्राजील, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. इसका मतलब ये हुआ कि तेल मार्केट पर अब इनका कंट्रोल हो जाएगा. इससे दुनिया का पावर बैलेंस भी बदलने की उम्मीद है.

इतना ही नहीं, यूएन के डिप्लोमेटिक पावर से लेकर ओपेक के तेल पावर तक कई ऐसे संगठन हैं जो दुनिया में पावर बैलेंस तय करते हैं लेकिन हाल में ब्रिक्स में 6 देशों की एंट्री से जैसे पूरा वर्ल्ड ऑर्डर बदलता दिख रहा है. अभी तक ब्रिक्स विकासशील देशों का संगठन था लेकिन अब अरब देशों की एंट्री से तेल कीमतों का बैलेंस भी इसके पास आ गया है. 

इसके अलावा ब्रिक्स के पास अब बिजनेस हब बनने की क्षमता भी आ गई है. जानिए कैसे नया ब्रिक्स दुनिया का पावर बैलेंस सेट कर सकता है और अब बदलाव के बाद क्या नया समीकरण सेट हो सकता है. 

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ये ब्रिक्स है क्या? 

- ब्रिक्स दुनिया की पांच सबसे तेज अर्थव्यवस्थाओं का ग्रुप है. ब्रिक्स का हर एक अक्षर एक देश का प्रतिनिधित्व करता है. ब्रिक्स में B से ब्राजील, R से रूस, I से इंडिया, C से चीन और S से साउथ अफ्रीका.

- साल 2001 में गोल्डमेन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'निल ने एक रिसर्च पेपर में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था. BRIC में ब्राजील, रूस, इंडिया और चीन थे. 

- साल 2006 में पहली बार ब्रिक देशों की बैठक हुई. उसी साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इन चारों देशों के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई तो इस समूह को 'BRIC' नाम दिया गया. 

- ब्रिक देशों की पहली शिखर स्तर की बैठक 2009 में रूस के येकाटेरिंगबर्ग में हुई थी. इसके बाद 2010 में ब्राजील के ब्रासिलिया में दूसरी शिखर बैठक हुई. उसी साल इसमें साउथ अफ्रीका भी शामिल हुआ, तब ये BRIC से BRICS बन गया.

नए सदस्यों की एंट्री से कितना बदलेगा ब्रिक्स?

- अभी कैसा है ब्रिक्सः दुनिया की 41 फीसदी आबादी इन पांच देशों में रहती है. दुनिया की जीडीपी में इनकी हिस्सेदारी लगभग 31.5 फीसदी है. वहीं, वैश्विक कारोबार में इनका हिस्सा 16 फीसदी है.

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- अब कैसा होगा ब्रिक्सः छह नए देशों के आने से ब्रिक्स और ज्यादा ताकतवर हो जाएगा. इन 11 देशों में दुनिया की 46 फीसदी आबादी रहती है. दुनिया का 43 फीसदी से ज्यादा तेल का उत्पादन इन्हीं देशों में होता है. इसके अलावा 25% एक्सपोर्ट भी इन्हीं 11 देशों से होगा.

छह देशों के जुड़ने से ब्रिक्स कैसे मजबूत होगा?

1. सऊदी अरबः सबसे बड़े तेल उत्पादकों में से एक है. चीन का करीबी और अमेरिका का विरोधी है. इसी साल फरवरी में बीजिंग में एक समझौते पर हस्ताक्षर कर ईरान के साथ सऊदी अरब ने राजनयिक संबंध बहाल किए हैं. तीन करोड़ से ज्यादा की आबादी वाला देश है. ब्रिक्स देशों के साथ सऊदी अरब का सालाना 160 अरब डॉलर का कारोबार है.

2. अर्जेंटीनाः ब्राजील और मैक्सिको के बाद लैटिन अमेरिका की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था अर्जेंटीना की ही है. इसकी आबादी 4.6 करोड़ है. हालांकि, पिछले एक साल से अर्जेंटीना आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. इसकी 40 फीसदी आबादी गरीब हो चुकी है. हालिया सालों में अर्जेंटीना के साथ चीन के साथ वित्तीय संबंध मजबूत हुए हैं.

3. ईरानः दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गैस भंडार होने के साथ-साथ एक-चौथाई तेल का भंडार भी यहीं हैं. अमेरिका के सबसे बड़े विरोधियों में से एक है. ईरान दुनिया की 22वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसकी जीडीपी 2 ट्रिलियन डॉलर है.

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4. मिस्रः ये वो देश है जो अमेरिकी मदद पर निर्भर है. लेकिन बीते कुछ समय में रूस और चीन के साथ इसके रिश्ते मजबूत हुए हैं. मिस्र की जीडीपी 1.8 ट्रिलियन डॉलर है. पहले कोविड और फिर रूस-यूक्रेन जंग की वजह से मिस्र का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से कम हुआ है. मिस्र डॉलर की बजाय अपनी करंसी में कारोबार करने की वकालत करता रहा है.

5. संयुक्त अरब अमीरातः 90 लाख से ज्यादा की आबादी वाले देश की अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर है. संयुक्त अरब अमीरात मिडिल ईस्ट में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है. इसकी जीडीपी 1.8 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है.

6. इथियोपियाः अफ्रीकी महाद्वीप का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश इथियोपिया है. यहां 11 करोड़ से ज्यादा लोग रहते हैं. इथियोपिया भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में से है. इसकी जीडीपी 156 अरब डॉलर से ज्यादा है.

इसमें जुड़ना क्यों चाहते हैं देश?

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान, सऊदी अरब, यूएई, अर्जेंटीना, अल्जीरिया, बोलीविया, इंडोनेशिनया, मिस्र, इथियोपिया, क्यूबा, कॉन्गो, कोमोरोस और कजाकिस्तान जैसे 40 से ज्यादा देश ब्रिक्स से जुड़ना चाहते हैं.

- ये वो देश हैं जो ब्रिक्स को पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले वैश्विक संगठनों के विकल्प के रूप में देखते हैं. इन्हें उम्मीद है कि अगर वो ब्रिक्स जैसे संगठन का हिस्सा बन गए तो इससे उनकी अर्थव्यवस्था बढ़ेगी.

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- अचानक से ब्रिक्स से जुड़ने वाले देशों की लिस्ट इसलिए भी बढ़ गई, क्योंकि कोविड महामारी के दौरान बड़े और पश्चिमी देशों ने वैक्सीन की जमाखोरी कर ली थी, लेकिन इन छोटे और विकासशील देशों तक वैक्सीन नहीं पहुंच पाई थी.

- ब्रिक्स से जुड़ने की इच्छा जताने वाले ज्यादातर मुल्क पश्चिम विरोधी हैं. इनके दो मकसद हैं. पहला- जी-7 और पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को कमजोर करना. और दूसरा- कारोबार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करना.

- ब्रिक्स के विस्तार का सबसे ज्यादा समर्थन रूस और चीन करते हैं. यही वो दो देश हैं जो अमेरिका और पश्चिमी देशों के विरोधी हैं. यूक्रेन से जंग के कारण रूस प्रतिबंधों की वजह से पश्चिमी देशों से चिढ़ा बैठा है. तो वहीं चीन खुद को ताकतवर बनाने के लिए छोटे-छोटे देशों को अपने साथ लाने में जुटा है. 

 

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