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मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले बजट में आंध्र प्रदेश और बिहार का खास ख्याल रखा गया है. आंध्र प्रदेश को 15 हजार करोड़ तो बिहार को 60 हजार करोड़ की सौगात मिली है.
बजट में आंध्र और बिहार का खास ध्यान रखे जाने का विपक्ष विरोध कर रहा है. विपक्ष ने केंद्र सरकार पर दूसरे राज्यों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है. इसे लेकर इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया. इंडिया ब्लॉक का दावा है कि जिन राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं, बजट में उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया.
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में कहा कि कल जो बजट पेश हुआ, उसमें दो राज्यों को छोड़कर किसी को कुछ नहीं मिला.
बजट के विरोध में 27 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में होने वाली नीति आयोग की बैठक का भी विपक्ष ने बायकॉट कर दिया है. कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और झारखंड के मुख्यमंत्री ने राज्य को अनदेखा करने का आरोप लगाया है.
ऐसे आरोप इसलिए लग रहे हैं कि क्योंकि चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की जेडीयू केंद्र की एनडीए सरकार में अहम सहयोगी है. लोकसभा में टीडीपी के 16 और जेडीयू के 12 सांसद हैं.
दूसरी ओर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि बजट में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया है. बजट भाषण में राज्यों का जिक्र नहीं करने के आरोपों पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगर किसी राज्य का नाम बजट भाषण में नहीं लिया गया है तो इसका मतलब ये नहीं है कि उसे कवर नहीं किया गया.
ऐसे में जानते हैं कि बिहार और आंध्र प्रदेश को इस बजट में क्या-क्या मिला है? और बाकी राज्यों के लिए बजट में क्या प्रावधान किया गया है?
बिहार को क्या मिला?
2024-25 के बजट में बिहार को लगभग 59 हजार करोड़ रुपये का ऐलान किया गया है. 26 हजार करोड़ रुपये की लागत से पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे और बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे बनेगा. इसी में से बोधगया, राजगीर, वैशाली और दरभंगा के रोड प्रोजेक्ट्स भी पूरे होंगे. इनके अलावा बक्सर में गंगा नदी पर दो लेन वाला एक पुल भी बनेगा, जिसमें केंद्र सरकार मदद करेगी.
इसके साथ ही 21 हजार 400 करोड़ रुपये की लागत से पावर प्रोजेक्ट्स भी शुरू होंगे, जिसमें पिरपैंती में 2,400 मेगावाट का एक नया पावर प्लांट बनाना भी शामिल है. इसके अलावा, 11 हजार 500 करोड़ रुपये बाढ़ से निपटने के लिए दिए जाएंगे.
इन सबके अलावा भी, अमृतसर और कोलकाता के बीच जो इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बन रहा है, उसके बीच में गया में इंडिस्ट्रियल सेंटर को विकसित करने में भी केंद्र मदद करेगा.
इतना ही नहीं, बिहार में नए एयरपोर्ट, मेडिकल कॉलेज और स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जाएगा. गया के विष्णुपद मंदिर और बोधगया के महाबोधि मंदिर को विकसित किया जाएगा. काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर की तर्ज पर ही विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर बनेगा. नालंदा यूनिवर्सिटी को भी टूरिस्ट स्पॉट के रूप में तैयार किया जाएगा.
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आंध्र प्रदेश को क्या मिला?
केंद्र सरकार ने बजट में आंध्र प्रदेश के लिए 15 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. आंध्र को ये रकम नई राजधानी तैयार करने के लिए दी जाएगी. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अमरावती को नई राजधानी बना रहे हैं.
निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए बताया था कि आंध्र की पोलावरण सिंचाई परियोजना को भी जल्द पूरा किया जाएगा.
विशाखापट्टनम-चेन्नई इकोनॉमिक कॉरिडोर में कोप्पाथी क्षेत्र और हैदराबाद-बेंगलुरू इकोनॉमिक कॉरिडोर में ओरवाकल क्षेत्र में पानी, बिजली, रेलवे और सड़कों के लिए फंड उपलब्ध करवाया जाएगा. रायलसीमा, प्रकाशम और उत्तर तटीय आंध्र के पिछ़ड़े इलाकों के लिए भी ग्रांट दी जाएगी.
तो बाकी राज्यों को क्या मिला?
बाकी राज्यों के लिए कोई खास ऐलान नहीं किया गया है. वित्त मंत्री ने बताया कि 'पूर्वोदय' नाम से एक नई योजना शुरू की जाएगी. इस योजना में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को शामिल करते हुए देश के पूर्वी क्षेत्र का विकास किया जाएगा.
इनके अलावा बाढ़ प्रभावित राज्यों का भी जिक्र है. निर्मला सीतारमण ने बताया कि असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई में केंद्र मदद करेगा. असम में बाढ़ से निपटने के लिए चल रहे प्रोजेक्ट्स में भी केंद्र मदद करेगा.
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को 42,277.77 करोड़ रुपये का बजट दिया है. ये पिछले बजट की तुलना में 1.2% ज्यादा है. 42,277 करोड़ रुपये के अलावा केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए 9,789.42 करोड़ रुपये भी रखे हैं.
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और क्या-क्या मिला है बाकी राज्यों को?
बजट दस्तावेज के मुताबिक, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 23,48,980 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेगी. ये रकम 2023-24 की तुलना में लगभग 12 फीसदी ज्यादा है.
इस 23.38 लाख करोड़ में से 12.47 लाख करोड़ रुपये सेंट्रल टैक्स और ड्यूटी में राज्यों की हिस्सेदारी के रूप में मिलेंगे. जबकि, बाकी के 11.01 लाख करोड़ रुपये ग्रांट के तौर पर दिए जाएंगे.
वित्त आयोग की सिफारिशों के मुताबिक, केंद्र को टैक्स और ड्यूटी से होने वाली कमाई में 41% हिस्सेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होनी चाहिए. यानी, केंद्र सरकार ने अगर 100 रुपये की कमाई टैक्स और ड्यूटीज से की है, तो उसमें से 41 रुपये सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेंगे.
बजट दस्तावेज के मुताबिक, 2024-25 में केंद्र सरकार को टैक्स और ड्यूटी से 38.40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई हुई है. इसमें से केंद्र 12.47 लाख करोड़ यानी 32% राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रांसफर करेगी. यानी कि जितना तय है, उससे कम.
इस बार सबसे ज्यादा टैक्स उत्तर प्रदेश को मिलेगा. यूपी को केंद्र सरकार 2.23 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की हिस्सेदारी देगी. वहीं, बिहार को 1.25 लाख करोड़ और आंध्र प्रदेश को 50 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे.
इन सबके अलावा केंद्र सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च के लिए राज्य सरकारों को 1.50 लाख करोड़ रुपये भी देगी.