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क्या फेथ हीलिंग छोड़कर पॉलिटिक्स में उतर पड़ेंगी बुशरा बीबी, क्यों पाकिस्तान में महिला लीडर होना आसान नहीं?

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई को लेकर उनके समर्थक प्रशासन से भिड़ चुके हैं. इस भीड़ की अगुवाई कर रही हैं खान की पत्नी बुशरा बीबी. सपोर्टर उन्हें आयरन लेडी कहते हुए उनके राजनैतिक करियर की बात भी कर रहे हैं, लेकिन फेथ हीलर के तौर पर जानी जाती बुशरा के लिए ये कितना आसान या मुश्किल हो सकता है?

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बुशरा बीबी एक आध्यात्मिक लीडर रह चुकी हैं. (Photo- AFP)
बुशरा बीबी एक आध्यात्मिक लीडर रह चुकी हैं. (Photo- AFP)

क्या बुशरा बीबी के साथ पाकिस्तान को एक और मजबूत महिला लीडर मिल सकती है? पाकिस्तान में फिलहाल जो हो रहा है, उसमें ये कयास भी लग रहा है. अपने पति इमरान खान की रिहाई की डिमांड के साथ बुशरा सड़कों पर हैं, और उनके पीछे हजारों का हुजूम है. बेनजीर भुट्टो के बाद पहली बार कोई महिला लीडर इतनी खुलकर आई. यहां तक कि उनकी वजह से लॉकडाउन जैसे हालात हो चुके. तो क्या पाक राजनीति में एक बार फिर महिला लीडर आ सकती है?

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अभी क्या चल रहा है और क्यों 

खान की पार्टी तहरीक ए इंसाफ (पीटीआई) अपने नेता की रिहाई की मांग के साथ एक और डिमांड भी कर रही है कि मौजूदा सरकार इस्तीफा दे दे. बता दें कि पूर्व पीएम पर फिलहाल 150 से ज्यादा क्रिमिनल चार्ज लगे हुए हैं. कई मामलों में उन्हें सजा भी हो चुकी. अब टैररिज्म के आरोप पर फैसला होना बाकी है, जिससे ऐन पहले ये हुआ. लोगों की ये भी मांग है कि फरवरी में हुए आम चुनावों का फैसला वापस लिया जाए क्योंकि कथित तौर पर उसमें जनादेश से हेरफेर हुई थी. अब अफरा-तफरी का आलम ये है कि इस्लामाबाद में आर्टिकल 245 लगाकर लॉ एंड ऑर्डर के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी. इसके बाद भी शांति नहीं है. 

बुशरा कर रहीं नेतृत्व

पीटीआई कार्यकर्ताओं ने इस प्रदर्शन को फाइनल कॉल नाम दिया है. दबाए जाने के बाद भी समर्थकों में जितना जोश है, उससे लग रहा है कि कुछ न कुछ फैसला होकर रहेगा. इस सबमें खास बात ये है कि जैसे ही प्रोटेस्ट का उफान उतरने लगा, पिक्चर में बुशरा बीबी की एंट्री हो गई. इसके बाद से पीटीआई के लोग करो या मरो पर चलते दिख रहे हैं. यहां तक कि सेना और दंगा कंट्रोल करने वाले तरीकों की भी उन्हें परवाह नहीं. 

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bushra bibi wife of imran khan leading pti during protests pakistan photo AP

एकदम से हासिल किया स्ट्रीट सपोर्ट

खान के जेल जाने के बाद से बुशरा ने वो हासिल किया, जो पीटीआई के किसी भी लीडर को नहीं मिल सका. उन्होंने स्ट्रीट सपोर्ट हासिल कर लिया, जो किसी भी नेता को काफी सालों बाद मिल पाता है. पाकिस्तानी मीडिया, खासकर सोशल मीडिया पर पत्रकार खुद इस चोला बदल की तारीफ कर रहे हैं. याद दिला दें कि बुशरा को एक वक्त पर जादू-टोने के लिए जाना जाता था. 

क्या राजनीति में हो चुकी एंट्री

बुशरा का एजेंडा साफ है. वे अपने पति को जेल से बाहर चाहती हैं. साथ ही उन्हें राजनीति में दोबारा चाहती हैं. निजी सेंटिमेंट्स के साथ बाकियों को जोड़ने के लिए उन्होंने एलान किया कि ये लड़ाई उनके पति के लिए नहीं, बल्कि पाकिस्तान के भविष्य के लिए है. माना जा रहा है कि पीटीआई के दो धड़े हो सकते हैं, जिसमें एक हिस्सा बुशरा की लीडरशिप के साथ होगा, दूसरा बाकी पुराने नेताओं के साथ. 

इमरान के अलावा शाह महमूद कुरैशी जैसे बड़े नेता जेल में हैं. इस बीच डर से कई नेता पाला बदल चुके. नेतृत्व के बगैर पार्टी में बुशरा ने एक तरह से जान फूंक दी. अब उनके चर्चे तो हो रहे हैं लेकिन राजनैतिक तेवरों पर अब भी सवाल है. असल में पाकिस्तान के ही राजनैतिक परिवार ताल्लुक रखने वाली बुशरा ने एक्टिव पॉलिटिक्स में कभी हाथ नहीं आजमाया. इसकी बजाए वे आध्यात्म की तरफ ज्यादा रहीं. यहां तक कि इमरान से उनकी मुलाकात भी ऐसे ही एक मौके पर हुई थी. 

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bushra bibi wife of imran khan leading pti during protests pakistan

आध्यात्मिक हीलर के तौर पर हुई मुलाकात 

पांच बच्चों की मां बुशरा से खान की कथित भेंट एक सूफी संत की मजार पर हुई थी. उस वक्त वे शादीशुदा थीं. चूंकि वे आध्यात्मिक हीलर थीं, लिहाजा खान को उन्होंने सुझाव दिया कि नई शादी ही उन्हें पीएम बना सकती है. पति को छोड़कर बुशरा ने ही खान से शादी कर ली, और छह महीने के भीतर खान पीएम हो चुके थे. 

क्या-क्या आ सकती हैं मुश्किलें

पीएम की पत्नी होने के बाद भी वे सीधी राजनीति से दूर ही रहीं. आलोचकों का ये भी कहना है कि इमरान खुद पारिवारिक राजनीति की बुराई करते रहे, लेकिन बुशरा का आना एक तरह से इसी को बढ़ावा दे रहा है. यानी पीएम का परिवार अपनी ही बात पर स्थिर नहीं. बुशरा के लिए एक मुश्किल ये भी है कि वे कई सारे कानूनी पचड़ों में घिरी हुई हैं. खुद उनके पूर्व पति ने उनके खिलाफ केस किया हुआ है कि उन्होंने तलाक के बाद नई शादी से पहले इस्लामिक नियम नहीं माने.

पाकिस्तान का सोशल ढांचा भी बुशरा के लिए रोड़ा हो सकता है. घोर कट्टरपंथी इस देश में महिलाओं के पास खास संभावना नहीं. यहां तक कि राजनैतिक परिवार से होने के बाद भी उनका लीडर होना पार्टी के बाकी नेताओं को बहुत अखरता रहा. 

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मिसाल के तौर पर बेनजीर भुट्टो को ही लें. जुल्फिकार अली भुट्टो की बेटी को मजबूत जमीन मिली. पिता की फांसी के बाद वे पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की स्वभाविक दावेदार की तरह उभरीं और आगे चलकर पीएम भी बनीं लेकिन पार्टी में ही असंतोष खदबदाता रहा, जो दूसरे कार्यकाल में बेहद बढ़ गया था. सीनियर लीडर नाराज रहते थे और भुट्टो परिवार पर कई आरोप लगाए गए. बेनजीर की हत्या के बाद उस धमक के साथ पाकिस्तान में फिर कोई महिला लीडर नहीं आ सकी.

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