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CBI के छापे, 200 सेल डील और नौकरी के बदले जमीन के आरोप, क्या है land for job scam जिसमें घिरी है लालू फैमिली

Land for Job Scam: 14 साल पुराने लैंड फॉर जॉब स्कैम के सिलसिले में सीबीआई ने बुधवार को 27 ठिकानों पर छापेमारी की. ये छापेमारी लालू यादव और उनके परिवार से जुड़े लोगों के ठिकानों पर की गई थी. सीबीआई ने दावा किया कि छापेमारी में 200 संपत्तियों के बिक्री पत्र और बड़ी नकदी बरामद हुई है.

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लालू यादव पर जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप है. (फाइल फोटो-PTI)
लालू यादव पर जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप है. (फाइल फोटो-PTI)

Land for Job Scam: केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने बुधवार को 27 ठिकानों पर छापेमारी की. ये छापेमारी लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार से जुड़े ठिकानों पर हुई थी. सीबीआई ने जहां छापा मारा, उनमें गुरुग्राम में बन रहा एक मॉल भी शामिल है. ये मॉल कथित तौर पर बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से लिंक था. ये सारी छापेमारी 14 साल पुराने लैंड फॉर जॉब यानी जमीन के बदले नौकरी के घोटाले के सिलसिले में हुई थी.

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तेजस्वी यादव ने दावा किया कि जिस मॉल से उनका नाम जोड़ा जा रहा है, वो हरियाणा के रहने वाले किसी व्यक्ति के नाम पर है और उसका उद्घाटन बीजेपी सांसद ने किया था. हालांकि, सीबीआई का कहना है कि उस मॉल में एक कंपनी के जरिए तेजस्वी यादव ने इन्वेस्ट किया है.

दिल्ली-एनसीआर और बिहार में छापेमारी के दौरान सीबीआई ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राज्यसभा सांसद और दूसरे नेताओं के यहां भी छापा मारा. 

सीबीआई का ये पूरा ऑपरेशन देर शाम पूरा हुआ. इसके बाद सीबीआई ने दावा किया कि छापेमारी के दौरान 200 प्रॉपर्टी के बिक्री पत्र और बड़ी नकदी बरामद हुई है.

क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम?

- लैंड फॉर जॉब स्कैम 14 साल पुराना है. इस मामले में इसी साल 18 मई को सीबीआई ने केस दर्ज किया था. सीबीआई के मुताबिक, लोगों को पहले रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया और जब उनके परिवार ने जमीन का सौदा किया, तब उन्हें रेगुलर कर दिया गया.

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- सीबीआई का कहना है कि पटना में लालू यादव के परिवार ने 1.05 लाख वर्ग फीट जमीन पर कथित तौर पर कब्जा कर रखा है. इन जमीनों का सौदा नकद में हुआ था. यानी, लालू परिवार ने नकद देकर इन जमीनों को खरीदा था. सीबीआई के मुताबिक, ये जमीनें बेहद कम दामों में बेच दी गई थीं.

- सीबीआई ने ये भी पाया कि जोनल रेलवे में सब्स्टीट्यूट की भर्ती का कोई विज्ञापन या पब्लिक नोटिस जारी नहीं किया गया था. लेकिन, जिन परिवारों ने यादव परिवार को अपनी जमीन दी, उनके सदस्यों को रेलवे में मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नियुक्ति दी गई.

- ED के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों के आवेदनों को अप्रूव करने में जल्दबाजी दिखाई गई. कुछ आवेदनों को तीन दिनों में ही अप्रूव कर दिया गया. पश्चिम मध्य रेलवे और पश्चिम रेलवे ने उम्मीदवारों के आवेदनों को बिना पूरे पते के भी अप्रूव कर दिया और नियुक्त कर दिया.

ये सारा खेल कब हुआ?

- 2004 से 2009 में केंद्र में यूपीए सरकार थी. उस सरकार में लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थी. जमीन के बदले नौकरी का ये सारा खेल उसी दौरान हुआ. 

- सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा यादव और हेमा यादव समेत कुछ उम्मीदवारों को आरोपी बनाया है.

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- सीबीआई का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव जब रेल मंत्री थे, तब उन्होंने ग्रुप डी में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती के बदले जमीनें लीं और इन्हें अपने परिवार के नाम पर खरीदा गया. 

इस घोटाले की कुछ डील

# डील 1: सीबीआई ने शुरुआती जांच में पाया था कि 6 फरवरी 2008 को पटना के रहने वाले किशुन देव राव ने अपनी 3,375 वर्ग फीट की जमीन राबड़ी देवी के नाम पर की थी. ये जमीन 3.75 लाख रुपये में बेची गई. उसी साल राव के परिवार के तीन सदस्यों राज कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार को मुंबई में ग्रुप डी में भर्ती किया गया.

# डील 2: नवंबर 2007 में पटना की रहने वालीं किरण देवी ने अपनी 80,905 वर्ग फीटी की जमीन लालू यादव की बेटी मीसा के नाम पर कर दी. ये सौदा 3.70 लाख रुपये में हुआ. बाद में उनके बेटे अभिषेक कुमार को मुंबई में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया

# डील 3: मार्च 2008 में ब्रज नंदर राय ने 3,375 वर्ग फीटी की जमीन गोपालगंज के रहने वाले ह्रदयानंद चौधरी को 4.21 लाख रुपये में बेच दी. ह्रदयानंद चौधरी को 2005 में हाजीपुर में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया था. बाद में ह्रदयानंद चौधरी ने ये जमीन तोहफे में लालू यादव की बेटी हेमा के नाम पर कर दी. सीबीआई ने जांच में ह्रदयानंद चौधरी लालू यादव का रिश्तेदार नहीं था और जिस समय ये जमीन दी गई, उस समय उसकी कीमत 62 लाख रुपये थी.

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