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जलवायु परिवर्तन को 'धोखा' बता चुके Trump वाइट हाउस लौटने पर कौन से बड़े फैसले ले सकते हैं, क्यों विरोध में एक्टिविस्ट?

डोनाल्ड ट्रंप के बारे में पर्यावरण एक्टिविस्ट दावा करते रहे कि वे दोबारा चुनकर आए तो क्लाइमेट चेंज पर अब तक की कोशिश मिट्टी में मिल जाएगी. अपने कार्यकाल में पेरिस एग्रीमेंट से अलग होने जैसे कई फैसले कर चुके ट्रंप दोबारा यही इशारे दे रहे हैं. माना जा रहा है कि पद मिलने पर वे बाइडेन सरकार की कई क्लाइमेट नीतियों को बदल देंगे.

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डोनाल्ड ट्रंप पर क्लाइमेट चेंज की अनदेखी का आरोप लगता रहा. (Photo- AP)
डोनाल्ड ट्रंप पर क्लाइमेट चेंज की अनदेखी का आरोप लगता रहा. (Photo- AP)

नवंबर में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे है. इससे पहले दोनों ही बड़ी पार्टियां कई वादे कर रही हैं. इसी कड़ी में ट्रंप के पूर्व आंतरिक विभाग सचिव डेविड बर्नहार्ट ने बड़ा बयान दे दिया. उन्होंने कह कि वाइट हाउस आने पर ट्रंप उन सारी नीतियों में सुधार करेंगे, जो बाइडेन और हैरिस ने ली थीं, खासकर पर्यावरण से जुड़ी. 

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सत्ता में रहते हुए ट्रंप ने कई छोटे-बड़े ऐसे फैसले लिए, जिनपर पर्यावरण प्रेमियों ने हो-हल्ला किया. आरोप था कि ट्रंप क्लाइमेट की कोई परवाह नहीं करते. चलिए, जानते हैं वे कौन सी बातें थीं, जिनके चलते ट्रंप घेरे में आ गए. 

पेरिस एग्रीमेंट से बनाई दूरी

ट्रंप ने सत्ता संभालने के कुछ ही समय के भीतर पेरिस जलवायु समझौते से हाथ खींच लिया. ये ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने से जुड़ा एग्रीमेंट था. अमेरिका में चूंकि इंडस्ट्रीज के चलते ग्रीन हाउस एमिशन ज्यादा है, लिहाजा उसका टारगेट भी बड़ा था. हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इसे देश के आर्थिक हितों के खिलाफ बताते हुए साफ कर दिया वे इससे अलग हो रहे हैं. बाद में जो बाइडेन दोबारा इससे जुड़ गए. 

अपने कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने एनर्जी के पारंपरिक स्त्रोतों जैसे तेल और नेचुरल गैस के खर्च को बढ़ावा दिया. उन्होंने कोयला उद्योग के लिए कई नियमों में छूट दी, जैसे पॉल्यूशन कंट्रोल से सख्ती हटाई. यहां तक कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कई बार ग्लोबल वार्मिंग को  भ्रम बताते हुए कह दिया कि इसे फालतू में मुद्दा बनाया जा रहा है.

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 donald trump former us president climate change controversy photo AFP

इस बार राष्ट्रपति पद के लिए लड़ते हुए ट्रंप क्लाइमेट चेंज को लेकर वही पुराना रवैया दिखा रहे हैं. उनके पूर्व आंतरिक विभाग सचिव डेविड बर्नहार्ट ने यहां तक कह दिया कि चुने जाने पर वे पहले ही कई ऐसी पॉलिसीज को बदल देंगे, जो मौजूदा सरकार ने बनाई हैं. 

क्या हैं वे मुख्य क्लाइमेट पॉलिसीज, जिनमें हो सकता है बदलाव

इसी अप्रैल में अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) ने ऐसा नियम बनाया जिसमें कोयला प्लांट्स को नई तकनीक अपनाने को कहा जा रहा है ताकि ग्रीन हाउस गैस कम बने. अगर कोई ऐसा न करे तो उसे प्लांट बंद करना पड़ सकता है. बाइडन प्रशासन का अनुमान है कि इससे साल 2047 तक इन प्लांट्स से होते कार्बन उत्सर्जन पर 88 फीसदी कमी आ जाएगी. 

वहीं ट्रंप ने इशारा दिया कि सत्ता में आने पर वे यह आदेश बदल देंगे ताकि कोयला खदानें ठीक से काम कर सकें और अमेरिकियों को कम कीमत पर बिजली मिल सके. 

donald trump former us president climate change controversy photo Reuters

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में उलटफेर

गाड़ियों से हो रहे पॉल्यूशन को रोकने के लिए भी बाइडेन प्रशासन ने कई नियम बनाए. जैसे मार्च में सरकार ने ऑटोमोबाइल पर सख्ती की, ताकि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों का उत्पादन बढ़ सके. 

इसका विरोध करते हुए ट्रंप ने कहा कि ऐसे फैसले अमेरिका में खूनी संघर्ष पैदा करेंगे और देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर देंगे. इससे नौकरियां भी जाएंगी. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, वाइट हाउस लौटने पर ट्रंप इसे भी बदल सकते हैं. 

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बाइडेन प्रशासन ने किया भारी-भरकम खर्च 

साल 2022 में अमेरिकी सरकार ने इनफ्लेशन रिडक्शन एक्ट बनाया. इसे अमेरिका के पॉल्यूशन कंट्रोल में सबसे बड़ा निवेश माना गया, जिसमें थोड़े-बहुत नहीं, बल्कि 340 बिलियन डॉलर से ज्यादा लगेंगे. अमेरिकी सरकार ने इसके तहत क्लीन एनर्जी स्त्रोतों पर काम करने को कहा. इलेक्ट्रिक गाड़ियां इसी का एक रूप हैं. 

ट्रंप ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर भारी-भरकम सब्सिडी को सबसे बड़ी मूर्खता कह दिया. हालांकि ट्रंप चाहें भी तो इस एक्ट को हटाना आसान नहीं, इसपर पूरे कांग्रेस की रजामंदी चाहिए होगी. 

पेरिस एग्रीमेंट पर हम पहले भी बात कर चुके. ट्रंप ने इससे दूरी बना ली थी, जबकि बाइडेन ने पहले दिन ही वापस इसपर सहमति दे दी. अब ट्रंप का कहना है कि चुने जाने वे दोबारा इससे हाथ खींच लेंगे ताकि उद्योग-धंधे आराम से चल सकें, और अमेरिकी जनता को कम कीमत पर उत्पाद मिल सकें. 

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