अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल मल्टी-टास्किंग कर रहे हैं. एक तरफ घुसपैठियों की खोज चल रही है, दूसरी तरफ शांति वार्ताएं जारी हैं. यूरोप समेत कनाडा को डांटने का सिलसिला भी बना हुआ है. इस बीच ट्रंप ने एक और घोषणा कर दी. यूएस में जल्द ही गोल्ड कार्ड बेचे जा सकते हैं, जिससे दौलतमंद व्यापारियों के लिए वहां रहने के रास्ते खुलेंगे. इसमें रूसी अमीर भी शामिल हैं.
ट्रंप ने अमीर लोगों के लिए 5 मिलियन डॉलर वाला गोल्ड कार्ड लॉन्च किया है. ये ग्रीन कार्ड का प्रीमियम रूप है, जिससे ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिलेंगी. बता दें कि ग्रीन कार्ड परमानेंट रेजिडेंट कार्ड है, जिसके लिए दुनियाभर के लोगों में होड़ लगी रहती है. यह स्थाई नागरिकता है, जिसके लिए अलग से पैसे तो नहीं देने होते लेकिन कुछ शर्तों पर खरा उतरना होता है. अब ग्रीन कार्ड का प्रो-मैक्स संस्करण आ रहा है, लेकिन इसके लिए भारी रकम खर्च करनी होगी. ट्रंप भले ही इसे गोल्ड या प्रीमियम कह रहे हों लेकिन असल में यह सिटिजनशिप बाई इनवेस्टमेंट (CBI) है, जो सदियों से दुनिया में चलता रहा.
सीबीआई असल में कब से शुरू हुआ, इसका कोई डेटा नहीं मिलता, लेकिन 19वीं सदी में राजाओं, खासकर यूरोपियन शासकों ने ये स्कीम शुरू कर दी थी. कई अमीर व्यापारी, जो बेहतर देशों में बसना चाहते थे, वे पैसे खर्च करने लगे. युद्ध ने इस स्कीम को और हवा दी. मॉडर्न वक्त की बात करें तो पिछले चार दशकों से अलग-अलग देश सीबीआई शुरू कर चुके. इनमें से कई द्वीपीय और कुदरती तौर पर बेहद खूबसूरत देश हैं. साथ ही वे टैक्स हेवन भी हैं, यानी जहां अपनी आय पर नागरिकों को टैक्स नहीं देना होता. यही वो वजह है कि जिसके चलते दुनियाभर के अमीर ऐसे देशों की नागरिकता ले रहे हैं.
डोमिनिका, सेंट लुसिया, सेंट किट्स एंड नेविस, ग्रेनाडा, एंटीगुआ एंड बारबुडा, तुर्की और माल्टा जैसे कई देश इनमें शामिल हैं.
ट्रंप के एलान के बीच रूसी खरबपतियों का भी जिक्र आया. माना जा रहा है कि इसके बाद अमेरिका में रशियन इनवेस्टमेंट बढ़ेगा. इससे यह संकेत भी मिलता है कि लंबे वक्त से रूस पर लगी पाबंदियां खत्म या कम हो सकती हैं. साल 2024 में पूरी दुनिया में अमीरी के मामले में रूस पांचवे नंबर पर था, यानी उसके पास मौके काफी होंगे. अमेरिकी बाजार को भी इससे फायदे होंगे. नागरिकता के लिए इस तरह की स्कीम तब आ रही हैं, जब ट्रंप ने आते ही जन्म के आधार पर नागरिकता खत्म करने का एलान कर दिया, जो कि बड़ी आबादी का आसरा था.
सीबीआई के कई बड़े नुकसान भी हैं
पैसों के जरिए नागरिकता पाकर ऐसे लोग भी देश में आ सकते हैं, जिनके मंसूबे खतरनाक हों. मसलन, आतंकी इरादों वाले अमेरिका या किसी बड़े देश की शरण लेकर वहीं की जमीन खोखली कर सकते हैं.
दो साल पहले वित्तीय गड़बड़ियों पर नजर रखने वाली इंटरनेशनल संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने डर जताया था कि इससे काले धन को छिपाने या किसी दूसरे अपराध से बचने के लिए भी लोग इनवेस्टमेंट कर सकते हैं. साथ ही इससे स्कीम दे रही सरकारों पर अलग किस्म का दबाव रहेगा. जिन लोगों ने उनके यहां बेतहाशा पैसे लगाए हुए हैं, और टैक्स दे रहे हैं, उनका राजनीति से लेकर पॉलिसी में सीधा दखल बढ़ सकता है. कई बार विदेशी निवेश के बहाने देशविरोधी ताकतें भी घुसपैठ कर सकती हैं, जो सीधे नेशनल सिक्योरिटी पर हमला है.
इन्हीं कारणों को देखते हुए कई सरकारें, जिनके यहां सीबीआई है, उन्होंने कुछ खास देशों के नागरिकों को स्वीकार करने से मना कर दिया. मसलन, डोमिनिका में उत्तर कोरिया, रूस, सूडान, बेलारूस और यूक्रेन के लोग नागरिकता के लिए आवेदन नहीं कर सकते. बहुत से देशों ने अफगानिस्तान, ईरान और सीरिया जैसे देशों पर भी पाबंदी लगाई हुई है. इनवेस्टमेंट पर रजामंदी से पहले ही देश बैकग्राउंड चेक भी करते हैं ताकि लोगों का आपराधिक इतिहास पता लग सके.
फिलहाल यूएस में स्थाई नागरिकता के लिए ग्रीन कार्ड की कई श्रेणियां
- फैमिली बेस्ड ग्रीन कार्ड के तहत अमेरिकी नागरिक का परिवार, जैसे पत्नी या पति, 21 साल से कम उम्र के गैर-शादीशुदा बच्चे और अमेरिकी सिटिजन के पेरेंट्स आते हैं.
- रोजगार के आधार पर भी ग्रीन कार्ड बनते हैं. इसमें भी कई श्रेणियां हैं, जैसे प्रोफेशनल्स से लेकर इनवेस्टर जिनकी वजह से दूसरों को रोजगार मिले.
- रिफ्यूजी स्टेटस मिलने के सालभर के बाद भी लोग ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं.
- जिन देशों के लोगों का अमेरिकी में इमिग्रेशन कम है, उन्हें ज्यादा से ज्यादा लेने के लिए भी एक कैटेगरी है, जिसे डायवर्सिटी लॉटरी कहते हैं.
- हिंसा या ह्यूमन ट्रैफिकिंग के शिकार हो चुके लोग भी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसमें किसी खास क्राइम के पीड़ित को यू वीजा, जबकि मानव तस्करी के पीड़ित को टी वीजा मिलता है.