महात्मा गांधी को पूरी दुनिया में अहिंसा और सत्याग्रह के लिए जाना जाता है, हालांकि बीते कई दशकों से एक और बात जोर पकड़ रही है, वो है ब्रह्मचर्य के साथ उनके प्रयोग. गांधी जी के बारे में अलग-अलग लोगों ने चिट्ठियों या किताबों में दावा किया है कि वे इसे लेकर इतने एक्सट्रीम हो गए थे कि कमउम्र स्त्रियों के साथ सोने या नग्न होने से परहेज नहीं करते थे. कथित तौर पर इस तरह से वे खुद को परखते थे कि वे अपनी सोच में कितने दृढ़ हैं.
कैसे थे पत्नी कस्तूरबा से शुरुआती संबंध
2 अक्टूबर को जन्मे महात्मा गांधी का विवाह 13 साल की उम्र में कस्तूरबा से हुआ. उनका वैवाहिक जीवन शुरुआत में सामान्य रहा, जिससे उनकी 4 संतानें भी हुईं. ये तो हुई ऊपरी बात, लेकिन आगे चलकर खुद गांधी जी ने माना था कि वे यौन संबंधों को लेकर काफी आग्रही थे और लगातार उसी बारे में सोचा करते थे.
पिता की सेवा के दौरान भी पत्नी के बारे में सोचा करते
अपनी किताब 'द स्टोरी ऑफ माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रूथ' में उन्होंने लिखा था- शादीशुदा जीवन के पहले 5 सालों के दौरान हम मुश्किल से छह महीने साथ रहे होंगे. इस पूरे समय मैं स्कूल में भी कस्तूरबा के बारे में सोचता था. रात में हमारी मुलाकात की बात भी मेरे जेहन में चलती रहती थी. मैं उसे देर तक जगाता और बातें करता रहता था. उसी दौरान मेरे पिता बीमार पड़े. उनकी देखभाल करते हुए भी मेरे दिमाग में यौन संभोग की बातें चलती रहती थीं. ये बात आगे चलकर मुझे काफी ग्लानि देने लगी.
इस दौरान लिया ब्रह्मचारी होने का व्रत
दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए साल 1906 में 38 साल की उम्र में उन्होंने ब्रह्मचर्य अपनाया, इसके बाद से उनकी सोच लगातार कट्टर होती गई, लेकिन जिस बात से फर्क पड़ा, वो थी इसे लेकर गांधी जी के अनोखे प्रयोग. खुद को जांचने-परखने के लिए वे लगातार महिलाओं के संपर्क में ऐसे रहते थे जिसे सामाजिक तौर पर स्वीकारा नहीं जाता. गांधी जी ने कभी भी इस बात को नहीं छिपाया कि वे यौन संबंधों को लेकर कितने आग्रही थे, और बाद में ब्रह्मचर्य अपनाने के बाद वे अपने एक्सपेरिमेंट्स को लेकर भी कभी गोपनीय नहीं रहे.
किताब में कई विवादित बातें
भारतीय मूल के लेखक वेद मेहता की किताब 'महात्मा गांधी एंड हिज एपॉस्टल्स' में इसपर कई बातें लिखी हैं. किताब में एक जगह जिक्र किया गया है कि साबरमती आश्रम में अपने निजी सचिव प्यारेलाल की बहन, सुशीला नायर, जो कि उनकी निजी चिकित्सक भी थीं, के साथ नग्न स्नान को लेकर आश्रम में कानाफूसियों का दौर शुरू हो गया.
किताब में लिखा है कि 69 साल के गांधी जी करीब 24 साल की सुशीला के साथ स्नान किया करते धे, जिसे लेकर सेवाग्राम आश्रम में खलबली मच गई. ये साल 1938 की बात है. इसके बाद कथित तौर पर गांधी जी को सफाई भी देनी पड़ी कि वे दोनों पार्टिशन में नहाते हैं और उनकी आंखें भी बंद रहती हैं. वे केवल अंदाजे से जानते हैं कि सुशीला नहा रही हैं.
कुल मिलाकर पत्नी से दूरी बनाने तक ही उनका प्रयोग सीमित नहीं रहा, बल्कि उसका दायरा लगातार बढ़ता चला गया. उनके आश्रम में पति-पत्नी के साथ रहने पर पाबंदी थी. उनका कहना था कि पति को किसी हाल में पत्नी से अकेले में नहीं मिलना चाहिए. अगर उसके मन में यौन संबंधों को लेकर कोई विचार आए तो ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए. इससे ऐसी सोच से छुटकारा मिलेगा.
युवा लड़कियां थीं जीवन में शामिल
हालांकि गांधी जी के अपने लिए नियम अलग थे. साल 1920 में वे युवा लड़कियों के कंधों का सहारा लेकर सुबह-शाम की सैर पर जाने लगे. उनकी पोतियां आभा और मनु अक्सर ही इस सैर में उनके साथ होतीं. इसके बाद गांधी जी की मालिश होती और फिर सामूहिक स्नान. सुशीला नायर के अलावा और भी कई महिलाएं नहाने में उनकी मदद करतीं.
वक्त के साथ ये प्रयोग और आगे चला गया
वे लड़कियों को अपने बगल में सुलाने लगे. आश्रम के मैनेजर मुन्नालाल शाह को लिखी एक पत्र में ये बात उन्होंने खुद मानी थी. वे लिखते हैं- 'आभा मेरे साथ तीन रातें सोई. कंचन सिर्फ एक रात. वीनस का मेरे साथ सोना एक दुर्घटना ही है. वो मेरे करीब सोई थी.' यहां बता दें कि जिस कंचन का जिक्र गांधी जी ने किया, वो मुन्नालाल की पत्नी थी. चिट्ठी में गांधी जी ने ये भी माना कि पति का ऐसे में नाराज होना लाजिमी है, लेकिन उनके मन में कोई भाव नहीं था.
महात्मा गांधी की बहू आभा गांधी ने खुद लेखक वेद मेहता को बताया था कि वे जब 16 साल की थीं, तब उन्हें गांधी जी के साथ सोने का निर्देश मिला था. ब्रह्मचर्य के साथ प्रयोग के ऐसे विवादित प्रसंगों पर जब सवाल उठे तो स्वयं महात्मा गांधी ने ब्रह्मचर्य की अपनी परिभाषा पर बात की थी. उनका कहना था कि जो पुरुष सुंदर स्त्री के साथ नग्न रहने के बाद भी यौन भावना से दूर रहे, वही ब्रह्मचारी है. इसका जिक्र महात्मा गांधी पूर्णाहुति के खंड में 2 में है.