सीरिया में लगभग आधी सदी से चले आ रहे परिवारवाद का खात्मा बशर अल-असद के तख्तापलट के बाद हुआ. राष्ट्रपति असद देश छोड़कर भाग चुके हैं. विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) की वजह से ये बदलाव आ चुका तो जाहिर है कि सत्ता संभालने का मौका भी उसे मिलेगा. लेकिन एक वक्त पर अपने बेहद चरमपंथी रवैए के लिए जाना जाता ये संगठन क्या सामान्य तौर पर देश चला सकेगा? या फिर ये आसमान से गिरे, खजूर पर अटके वाली स्थिति हो सकती है?
क्या है एचटीएस की हिस्ट्री
एचटीएस की लीडरशिप में इस्लामिक विद्रोही गठबंधन की जीत ने कहीं न कहीं सीरियाई नागरिकों समेत सबको परेशान किया हुआ है. दशकों पुरानी सरकार के गिरने पर देश में एक तरह का शून्य पैदा हो चुका है. इसे भरने का काम और जिम्मेदारी दोनों ही एचटीएस पर आ चुकी. लेकिन उसका इतिहास विवादास्पद रहा.
साल 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान कई छोटे -छोटे विद्रोही समूह बन चुके थे. असद सरकार के राज संभालने के बाद ये समूह एकजुट हो गए और एचटीएस तैयार हुआ. इससे पहले ये सारे ही छोटे गुट अलकायदा से जुड़े हुए थे, हालांकि जुड़ने के बाद उन्होंने खुद को अलकायदा से अलग बताया लेकिन डर बना ही हुआ है. इसकी वजह भी है. इस संगठन में सबसे बड़ा हिस्सा जबहत अल-नुसरा का है, जो अपने पुराने रूप में अलकायदा से पूरी तरह से जुड़ा हुआ था.
संगठन तैयार होने के दौरान इसने अलकायदा से औपचारिक दूरी बना ली लेकिन गुट का नेतृत्व और विचारधारा अब भी लगभग वही है.
कितना है राजनैतिक तजुर्बा
यह मोटे तौर पर एक संगठन है, जो हथियारों और लड़ाकों के बल पर काम करता है. कुछ सालों पहले ये देश के चुनिंदा शहरों में मजबूत होने लगा. वहां के इदलिब शहर में इसने एक समानांतर सरकार बना डाली, जिसे नाम मिला साल्वेशन गवर्नमेंट. यह एक तथाकथित सरकार है, जो प्रशासनिक और नागरिक मामलों में दखल देती रहती है. इसका मूल मकसद अपने होने को मान्यता देना था. वैसे दुनिया में इसकी कोई वैधता नहीं. अब तक देश केवल असद सरकार को असल मानता रहा.
किसी सरकारी ढांचे की तर्ज पर इसमें कई विभाग हैं, जैसे न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य, और प्रशासन. एचटीएस ही इन्हें चलाता है. साल्वेशन गवर्नमेंट इसी चरमपंथी समूह के सोच और पॉलिसी के मुताबिक काम करती है.
क्या होगा अगर एचटीएस सत्ता संभाले
इसे इदलिब शहर के ही मामले से समझ सकते हैं. भले ही इस विद्रोही गुट ने शहर में समानांतर सरकार खड़ी कर दी लेकिन खुद वहां के नागरिक इससे परेशान रहे. गुट कठोर शरिया कानून लागू कर चुका था, और महिलाओं की आजादी लगभग खत्म हो चुकी थी. इसके अलावा, साल्वेशन गवर्नमेंट को किसी भी तरह की इंटरनेशनल वैधता नहीं मिली है, जिससे इसके पास शुरुआती फंडिंग की भी कमी है. असद सरकार और एचटीएस के बीच लगातार झड़पों की वजह से भी शहर में अस्थिरता रही. बिना राजनैतिक तजुर्बे और कट्टर सोच के साथ अगर संगठन पूरे देश को संभाले तो व्यवस्था में कितना सुधार आएगा, ये कहा नहीं जा सकता.
क्या हो सकती हैं चुनौतियां
- अरब स्प्रिंग के दौर से अब तक करोड़ों सीरियाई नागरिक विस्थापित हो चुके. वे अब वापस लौटना चाहते हैं. उन्हें रीसैटल करना बड़ा मुद्दा होगा.
- सीरिया के पड़ोसी देशों में भी कई मिलिटेंट गुट सक्रिय हैं, यहां तक तक हिजबुल्लाह सीरिया के रास्ते से हथियार पाता रहा. तख्तापलट के बाद दो लड़ाका समूहों का तालमेल बिठाना मुश्किल हो सकता है.
- पिछले डेढ़ दशक में देश की आर्थिक व्यवस्था लगभग बदहाल हो चुकी. उसे पटरी पर लाने के लिए इंटरनेशनल मदद चाहिए होगी, इसके लिए भी एचटीएस को खुद को लोकतांत्रिक सरकार साबित करना होगा.