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कंडोम से 'प्यार' क्यों नहीं करते भारतीय? 10 में से सिर्फ 1 पुरुष ही करता है इस्तेमाल

भारत में 97% पुरुष और 87% महिलाएं कंडोम के बारे में जानते हैं. इतना ही नहीं, 82% पुरुषों और 68% से ज्यादा महिलाओं को ये भी पता है कि कंडोम के इस्तेमाल से AIDS से बचा जा सकता है. फिर भी भारतीय कंडोम से 'प्यार' नहीं करते हैं. आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 9.5% पुरुष कंडोम का इस्तेमाल करते हैं.

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अनचाही प्रेग्नेंसी रोकने और इन्फेक्शन से बचाने में कंडोम सबसे सुरक्षित तरीका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर-pixel cottonbro)
अनचाही प्रेग्नेंसी रोकने और इन्फेक्शन से बचाने में कंडोम सबसे सुरक्षित तरीका है. (प्रतीकात्मक तस्वीर-pixel cottonbro)

देश में एक बार फिर से जनसंख्या असंतुलन को लेकर बहस शुरू हो गई है. शुरुआत आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान से हुई. दशहरे के मौके पर भागवत ने कहा कि जनसंख्या को लेकर एक ऐसी नीति बननी चाहिए, जो सभी पर लागू हो.

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भागवत के बयान पर पलटवार करते हुए हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों की संख्या कम हो रही है. ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों में फर्टिलिटी रेट घट रही है. उन्होंने ये भी दावा किया कि दो बच्चों में अंतराल बनाए रखने के लिए कंडोम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल मुसलमान ही करते हैं.

वैसे भारत में आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी. उस समय के आंकड़े बताते हैं कि देश की आबादी 121 करोड़ से ज्यादा है. इनमें 96.63 करोड़ हिंदू और 17.22 करोड़ मुस्लिम हैं. इस हिसाब से कुल आबादी में 79.8% हिंदू और 14.2% मुस्लिम हैं.  2001 की तुलना में 2011 में मुसलमानों की आबादी करीब 25% तक बढ़ गई थी, जबकि हिंदू 17% से भी कम बढ़े थे.

अब वापस कंडोम के इस्तेमाल पर आते हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 97% पुरुष और 87% महिलाओं को कंडोम के बारे में पता है, लेकिन भारत जैसे देश में पुरुष कंडोम से 'नफरत' ही करते हैं. भारत में सिर्फ 9.5% पुरुष ही कंडोम का इस्तेमाल करते हैं. यानी, 10 में से एक पुरुष ही ऐसा है जो सेक्स के समय कंडोम का इस्तेमाल करता है. ये हालत तब है जब 82% पुरुषों और 68% से ज्यादा महिलाओं को पता है कि कंडोम के इस्तेमाल से AIDS से बचा जा सकता है.

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हालांकि, 2015-16 की तुलना में 2019-21 में कंडोम का इस्तेमाल बढ़ा जरूर है, लेकिन उतना नहीं. 2015-16 में 5.6% लोग ही कंडोम का इस्तेमाल करते थे. आंकड़े बताते हैं कि हमारे देश में फैमिली प्लानिंग की सारी जिम्मेदारी महिलाओं पर है. अनचाही प्रेग्नेंसी रोकने के लिए महिला नसबंदी सबसे प्रचलित मेथड है. सर्वे बताता है कि फैमिली प्लानिंग के तरीकों में महिला नसबंदी की हिस्सेदारी 37.9% है.

NFHS-5 के आंकड़ों के मुताबिक कंडोम के इस्तेमाल में सबसे आगे सिख धर्म को मानने वाले लोग हैं. 21.5% से ज्यादा सिख कंडोम का इस्तेमाल करते हैं. दूसरे नंबर पर 19.8% के साथ जैन समुदाय है. 10.8% मुसलमान और 9.2% हिंदू कंडोम का इस्तेमाल करते हैं.

वहीं, दुनियाभर में 25 साल में कंडोम का इस्तेमाल करने वालों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है. कंडोम अलायंस की रिपोर्ट बताती है कि 1994 में दुनियाभर में 6.4 करोड़ लोग कंडोम का इस्तेमाल करते थे, जिनकी संख्या 2019 में बढ़कर लगभग 19 करोड़ हो गई. अनचाही प्रेग्नेंसी रोकने के लिए दुनियाभर की 33% महिलाएं कंडोम और 26% गर्भनिरोधक गोलियों को पसंद करती हैं.

युवा भी करते हैं कंडोम से नफरत

भारत की 27% से ज्यादा आबादी युवा है. इनकी उम्र 15 से 29 साल है. NFHS-5 के सर्वे के दौरान 15 से 19 साल के करीब 70 फीसदी युवाओं ने माना था कि उन्होंने सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया था. वहीं, 20 से 24 साल के लगभग 82% युवाओं ने कंडोम के इस्तेमाल की बात नकार दी थी. 

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सर्वे के दौरान सिर्फ 5.7% शादीशुदा पुरुषों ने ही इस बात को माना था कि उन्होंने कंडोम का इस्तेमाल किया था. जबकि, लगभग 45% गैर-शादीशुदा पुरुषों ने कंडोम का इस्तेमाल करने की बात मानी थी.

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि गांवों में 7.6% और शहरों में 13.6% लोग कंडोम को फैमिली प्लानिंग का सबसे बेहतर तरीका मानते हैं. 

चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और गोवा ही ऐसे राज्य हैं, जहां फैमिली प्लानिंग में कंडोम की हिस्सेदारी 15% से ज्यादा है.

आंकड़ों के मुताबिक, देश में 66.7% से ज्यादा लोग फैमिली प्लानिंग करते हैं. इनमें से 10% से ज्यादा ऐसे हैं जो फैमिली प्लानिंग के लिए पुराने तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 56% लोग गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम का इस्तेमाल, इंजेक्शन, नसबंदी और कॉपर-टी जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल करते हैं.

पर कंडोम से इतनी नफरत क्यों?

भारत में दुनिया की सबसे ज्यादा युवा आबादी रहती है, लेकिन इसके बावजूद कंडोम के इस्तेमाल में बड़े देशों की तुलना में काफी पीछे है. इसकी वजह है झिझक और डर.

कंडोम अलायंस की 'कंडोमोलॉजी रिपोर्ट 2021' आई थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था ज्यादातर पुरुषों को लगता है कि अगर वो सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करेंगे, तो उन्हें शारीरिक सुख नहीं मिलेगा. 

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इतना ही नहीं, पहली बार सेक्स करने वाले पुरुषों को लगता है कि अगर उन्होंने कंडोम का इस्तेमाल किया तो उनका पार्टनर उन्हें जज कर सकता है और 'प्लेबॉय' का लेबल लगा सकता है.

वहीं, बहुत सी महिलाओं को कंडोम का इस्तेमाल करने के लिए अपने पार्टनर से बोलने में झिझक होती है. 

कंडोम क्यों जरूरी?

वैसे तो अनचाही प्रेग्नेंसी और फैमिली प्लानिंग के कई सारे तरीके हैं, लेकिन कंडोम सबसे सुरक्षित तरीका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, कंडोम के इस्तेमाल से न सिर्फ अनचाही प्रेग्नेंसी को रोका जा सकता है, बल्कि इससे सेक्सुअल ट्रांसमिशन से होने वाले संक्रमण से भी बचा जा सकता है. इसमें HIV भी शामिल है. 

कई स्टडीज बताती हैं कि HIV का इन्फेक्शन रोकने में मेल कंडोम 98.5% और फीमेल कंडोम 94% तक असरदार है. वहीं, अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने में मेल कंडोम 98% और फीमेल कंडोम 95% तक असरदार साबित होता है.

इतना ही नहीं, रिसर्च इस बात को भी पुख्ता करती हैं कि अगर कंडोम का इस्तेमाल किया जाए तो ह्यूमन पैपिलोवायरस (HPV) से भी बचा सकता है. HPV की वजह से ही महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर और पुरुषों को पेनाइल कैंसर होने का खतरा रहता है.

वहीं, अगर कंडोम का इस्तेमाल हो तो असुरक्षित गर्भपात से भी बचा जा सकता है. NFHS-5 के सर्वे के मुताबिक, भारत में लगभग 48% गर्भपात इसलिए होता है क्योंकि वो प्रेग्नेंसी अनचाही थी.

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