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राजधानी दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट यानी कूड़े के पहाड़ में लगी आग पर कई घंटों बाद काबू जरूर पा लिया गया है, लेकिन दिक्कतें खत्म नहीं हुई हैं.
दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, लैंडफिल साइट पर रविवार शाम 5 बजकर 22 मिनट पर आग लगी थी. शुरुआत में फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां यहां भेजी गई थीं. बाद में आठ गाड़ियां यहां भेजी गई थीं.
पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार ने गाजीपुर लैंडफिल साइट पर लगी आग बुझने का दावा किया है.
हालांकि, आग की वजह से लैंडफिल साइट के आसपास रहने वालों को कई दिक्कतें हो रहीं हैं. एक स्थानीय ने न्यूज एजेंसी को बताया कि आग लगने की वजह से आने-जाने में दिक्कत हो रही है. सबसे ज्यादा परेशानी सांस लेने में हो रही है.
इस बीच सियासत भी खूब हुई. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2023 तक तीनों लैंडफिल साइट को हटाने का वादा किया था, लेकिन भ्रष्टाचार का खेल खेला गया. उन्होंने कहा कि जब बीजेपी सत्ता में आएगी तो एक साल के भीतर तीनों लैंडफिल साइट को हटा दिया जाएगा.
दिल्ली में तीन जगह 'कूड़े का पहाड़'
राजधानी दिल्ली में तीन लैंडफिल साइट हैं. ये वो जगह होती है, जहां शहर भर का कूड़ा-कचरा इकट्ठा किया जाता है. दिल्ली के ओखला, गाजीपुर और भलस्वा में लैंडफिल साइट हैं.
तीनों साइट में कूड़े का पहाड़ बना हुआ है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, 31 अक्टूबर 2023 तक ओखला साइट पर 36.62 लाख टन कचरा जमा हुआ था. भलस्वा साइट पर 61.25 लाख टन का कूड़ा इकट्ठा था. सबसे ज्यादा 81.33 लाख टन कूड़ा गाजीपुर लैंड साइट पर था.
दिल्ली में सबसे बड़ा कूड़े का पहाड़ गाजीपुर लैंडफिल साइट में ही है. जुलाई 2019 में इसकी ऊंचाई 65 मीटर तक पहुंच गई थी. यानी, यहां कूड़े का पहाड़ इतना ऊंचा हो गया था कि वो कुतुब मीनार से बस 8 मीटर छोटा रह गया था.
दिल्ली में कितनी बड़ी है कूड़े की समस्या?
दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की 2022-23 की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी के घरों से हर दिन 11,352 टन कचरा निकलता है. इसमें से 7,352 टन कूड़े को या तो रिसाइकिल कर लिया जाता है या फिर उससे बिजली बना ली जाती है.
लेकिन बाकी का बचा 4 हजार टन कूड़ा लैंडफिल साइट में डम्प कर दिया जाता है. यानी, हर दिन जितना कचरा निकलता है, उसका 35 फीसदी लैंडफिल साइट में डाल दिया जाता है. नतीजा ये होता है कि हर दिन इतना कचरा डम्प होने के कारण कूड़े का पहाड़ बनता जाता है.
साइंस जर्नल लैंसेट की स्टडी बताती है कि लैंडफिल साइट के पास पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को अस्थमा, टीबी, डायबिटीज और डिप्रेशन की परेशानी होने का खतरा ज्यादा रहता है.
कूड़ा क्यों बनता जा रहा बड़ी समस्या?
सिर्फ भारत या दिल्ली ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में कूड़ा बड़ी समस्या बनता जा रहा है. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 2020 में दुनियाभर में 2.24 अरब टन कूड़ा पैदा हुआ था. यानी, हर व्यक्ति ने हर दिन 0.79 ग्राम कचरा पैदा किया.
वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि जिस तेजी से आबादी बढ़ रही है, उस हिसाब से 2050 तक कूड़ा और बड़ी समस्या बन जाएगा. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 2050 में 3.88 अरब टन कचरा पैदा होने का अनुमान है.
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2019-20 में 1.50 लाख टन कचरा हर दिन पैदा हुआ था. जबकि 2020-21 में ये कूड़ा बढ़कर 1.60 लाख टन से ज्यादा हो गया. चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश है, जहां हर साल सबसे ज्यादा कचरा पैदा होता है.
भारत के लिए कूड़े की समस्या इसलिए भी बढ़ती जा रही है, क्योंकि किसी भी शहर में कूड़े को लैंडफिल साइट में डम्प करने के बजाय कोई दूसरा सॉलिड सिस्टम नहीं है.
2020 में आई सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्मेंट की रिपोर्ट बताती है कि भारत की तीन हजार लैंडफिल साइट में 80 करोड़ टन कचरा जमा है. देश में सबसे बड़ा कूड़े का पहाड़ मुंबई में है, जिसकी ऊंचाई 18 मंजिला इमारत के बराबर है.
जहां तक दिल्ली की बात है, यहां गाजीपुर लैंडफिल साइट बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है. 1994 में बनी इस साइट पर साल दर साल कूड़ा इकट्ठा ही होता जा रहा है. 2021 में गाजीपुर लैंडफिल साइट में चार बार आग लगने की घटना सामने आई थी. इससे पहले 2017 में इसका कुछ हिस्सा सड़क पर गिर गया था, जिससे दो लोगों की मौत हो गई थी.
सरकार क्या कर रही है?
दिल्ली में इसी साल फरवरी में पहली इंजीनियरिंग लैंडफिल साइट खुली है. लगभग साढ़े 42 करोड़ रुपये की लागत से बनी ये साइट 15 एकड़ में फैली है.
ये लैंडफिल साइट दक्षिण-पूर्वी दिल्ली तेहखंड इलाके में बनी है. यहां से सालाना 9.65 लाख टन कूड़े का निपटान किया जा सकेगा. इस साइट के चारों ओर साढ़े तीन मीटर दीवार बनाई गई है. इसे सड़क से कई मीटर दूर बनाया गया है, ताकि लोगों को आने-जाने में कोई परेशानी न हो.
तीनों लैंडफिल साइट कब तक हटेंगी?
दिल्ली नगर निगम का दावा है कि राजधानी की तीनों लैंडफिल साइट को अगले दो साल में पूरी तरह से हटा दिया जाएगा.
ओखला लैंडफिल साइट को इस साल के आखिर तक बंद कर दिया जाएगा. दावा है कि यहां पर अब नया कूड़ा नहीं डाला जा रहा है. वहीं, भलस्वा साइट को दिसंबर 2025 और गाजीपुर को दिसंबर 2026 तक हटा दिया जाएगा.
दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों साइट को क्लियर करने में 250 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. ओखला साइट पर 50 करोड़, भलस्वा पर 75 करोड़ और गाजीपुर पर 125 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.