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बच्चों-लड़कियों का यौन शोषण और तस्करी... ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग और पाकिस्तान का क्या है कनेक्शन?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ टास्कफोर्स बनाने का ऐलान किया है. ग्रूमिंग गैंग असल में ऐसे लोगों को कहा जाता है जो लड़कियों और बच्चों को बहला-फुसलाकर उनका यौन शोषण करते हैं या उनकी तस्करी कर देते हैं. ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने कहा था कि ग्रूमिंग गैंग में ज्यादातर ब्रिटिश पाकिस्तानी हैं.

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ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक ने ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ टास्कफोर्स बनाने का ऐलान किया है. (फोटो क्रेडिट- Vani Gupta/aajtak.in)
ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक ने ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ टास्कफोर्स बनाने का ऐलान किया है. (फोटो क्रेडिट- Vani Gupta/aajtak.in)

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने 'ग्रूमिंग गैंग' के खिलाफ टास्क फोर्स का गठन करने का ऐलान किया है.

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उन्होंने ये ऐलान ऐसे समय किया, जब एक दिन पहले ही गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने इसे लेकर बयान दिया था. सुएला ब्रेवरमैन ने कहा था, 'ब्रिटिश पाकिस्तानी' ब्रिटेन की लड़कियों को टारगेट कर रहे हैं, उन्हें ड्रग्स देते हैं, रेप करते हैं और उनका फायदा उठाते हैं.

ग्रूमिंग गैंग असल में ऐसे लोगों को कहा जाता है जो लड़कियों और बच्चों को बहला-फुसलाकर ड्रग्स और शराब पिलाते हैं, उनका यौन शोषण करते हैं या फिर उनकी तस्करी करते हैं. 

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग का मुद्दा हमेशा बना रहता है. इसी साल इस मुद्दे पर 'Grooming Gangs: Britain's Shame' नाम से एक डॉक्यूमेंट्री भी आई थी. इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया था कि कैसे पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिशर्स भोली-भाली ब्रिटिश लड़कियों को अपना शिकार बनाते थे. इसमें ग्रूमिंग गैंग का शिकार हुईं कई लड़कियों की कहानी बताई गई थी.

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खैर, दोबारा लौटते हैं ग्रूमिंग गैंग पर. ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक ने सोमवार को ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ टास्क फोर्स के गठन का ऐलान किया. 

ऋषि सुनक ने क्या कहा?

ऐलान करते समय सुनक ने कहा, 'कमजोर बच्चों के साथ जो हो रहा है उसको लेकर हमने रॉदरहैम और टेलफोर्ड में घटनाओं पर स्वतंत्र जांचें कीं हैं. चुनाव में भी मैंने इसका मुद्दा उठाया था. इसमें कई पीड़ित और व्हिसल ब्लोअर सामने आए हैं. इनकी शिकायतों को लगातार नजरअंदाज किया जाता है. हम एक टास्क फोर्स का गठन करने जा रहे है. इसका काम अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाना और बच्चों-लड़कियों को इससे बचाने के लिए नेशनल हॉटलाइन नंबर जारी करना है. इन सभी की मदद से हम इन घटनाओं को रोकेंगे ताकि हमारे बच्चे सुरक्षित बड़े हो सकें.'

सुनक ने आगे कहा, 'महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है. बहुत लंबे समय तक राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी ने इन घिनौने अपराधियों को सामने नहीं आने दिया. हम इन खतरनाक गैंग को खत्म करने में कोई रुकावट नहीं आने देंगे.' उन्होंने ये भी कहा कि गैंग और उनके सरगनाओं को कठिन से कठिन सजा दिलाएंगे.

वहीं डिप्टी पीएम और न्याय मंत्री डोमिनिक राब ने कहा, 'ग्रूमिंग गैंग हमारे समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है और मैं उन लोगों को साफ कर देना चाहता हूं कि जो कोई भी हमारे कमजोर बच्चों का शोषण करेगा, उन्हें कानून का सामना करना पड़ेगा.'

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ऋषि सुनक की ओर से 'ग्रूमिंग गैंग्स टास्कफोर्स' का ऐलान करने से एक दिन पहले ही गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन के बयान पर विवाद खड़ा हो गया था.

सुएला ब्रेवरमैन ने क्या कहा था?

स्थानीय मीडिया को दिए इंटरव्यू में सुएला ब्रेवरमैन ने कहा था, 'एक रेगुलर प्रैक्टिस देखने को मिल रही है जिसमें कमजोर ब्रिटिश लड़कियों और बच्चों को कभी केयर करने के बहाने, कभी चैलेंजिंग सिचुएशन में, ब्रिटिश पाकिस्तानी पुरुषों का गिरोह इनका पीछा करता है, फिर उनका यौन शोषण करता है और नशेखोरी में धकेलता है.'

उनके इस बयान पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने कहा कि उन्होंने ब्रिटिश पाकिस्तानियों की बेहद भ्रामक तस्वीर पेश करने की कोशिश की है.

उन्होंने कहा कि सुएला ब्रेवरमैन ने कुछ लोगों के आपराधिक बर्ताव को पूरे समुदाय का व्यवहार बता दिया. मुमताज जहरा ने कहा कि वो (ब्रेवरमैन) ब्रिटिश समाज के लिए ब्रिटिश पाकिस्तानियों की ओर से किए जा रहे सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक योगदान को पहचान नहीं पा रहीं हैं.

ये ग्रूमिंग क्या है?

ब्रिटिश संस्था नेशनल सोसायटी फॉर द प्रिवेन्शन ऑफ क्रूएल्टी टू चिल्ड्रन (NSPCC) के मुताबिक, ग्रूमिंग तब होती है जब कोई अजनबी या फिर जान-पहचान का व्यक्ति किसी बच्चे का भरोसा जीतकर उसके साथ इमोशनल रिलेशनशिप में आता है, ताकि वो उसका शोषण और दुर्व्यवहार कर सके. जरूरी नहीं कि पीड़ित कोई बच्चा ही हो, कोई वयस्क व्यक्ति भी हो सकता है.

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NSPCC का कहना है कि जिन बच्चों या युवाओं की ग्रूमिंग की जाती है, उनका यौन शोषण या तस्करी भी की जा सकती है. बच्चों और युवाओं को ऑनलाइन भी ग्रूम किया जा सकता है.

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग काफी एक्टिव है. हडर्सफील्ड, रॉदरहैम, रोशडेल, ऑक्सफोर्ड, ब्रिस्टल और न्यूकैसल जैसे शहरों में एक के बाद एक यौन शोषण की घटनाएं सामने आती रहीं हैं. युवा ब्रिटिश लड़कियां इन गैंग का शिकार हो जातीं हैं और फिर उनका यौन शोषण किया जाता है.

(फोटो क्रेडिट- Vani Gupta/aajtak.in)

ग्रूमिंग गैंग और पाकिस्तान का क्या है कनेक्शन?

ब्रिटेन की इंडिपेंडेंट इन्क्वायरी चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज (IICSA) ने पिछले साल अक्टूबर में रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि हर 6 में से 1 लड़की और 20 में से 1 लड़के को 16 साल की उम्र से पहले यौन शोषण का सामना करना पड़ता है.

इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया था कि इंग्लैंड और वेल्स में 31 लाख से ज्यादा वयस्क ऐसे हैं, जिन्होंने 16 साल की उम्र से पहले किसी न किसी तरह के यौन अपराध का सामना किया था.

इससे पहले 2014 में प्रोफेसर अलेक्सिस जे ने भी रिपोर्ट दी थी. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 1997 से 2013 के बीच रॉदरहैम में 1,400 बच्चों का यौन शोषण हुआ था, जिनमें से ज्यादातर अपराधी पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिक थे. 

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प्रोफेसर जे ने अपनी रिपोर्ट में ये भी बताया था कि उत्तरी इंग्लैंड में 11 साल से कम उम्र के कई लड़कियों की ग्रूमिंग की गई और उनकी तस्करी की गई. इसमें भी ज्यादातर अपराधी ब्रिटिश पाकिस्तानी ही थे.

इतना ही नहीं, इस साल ग्रूमिंग गैंग्स पर जो डॉक्यूमेंट्री आई थी, उसमें भी यही दावा किया गया था कि ब्रिटिश पाकिस्तानी बच्चों के यौन शोषण में शामिल रहते हैं.

2017 में ब्रिटेन के थिंक टैंक क्विलियम फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि ग्रूमिंग गैंग के 84 फीसदी आपराधी एशियाई होते हैं और इनमें भी ज्यादातर पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिक शामिल होते हैं.

ब्रिटिश पाकिस्तानी ही होते हैं अपराधी?

हालांकि, ऐसी रिपोर्ट्स में किए गए दावों को अक्सर खारिज भी किया जाता रहा है. 2018 में ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ से नजीर अफजल ने कहा था कि जब किसी मामले में एशियाई मूल के अपराधी शामिल होते थे तो उसे मीडिया मजबूती से दिखाता था, लेकिन जब किसी मामले में गोरे अपराधी होते थे तो उसे दबा दिया जाता है. नजीर अफजल लंबे समय तक चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज के मामलों में वकील रहे हैं.

साल 2020 में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज पर यूके के गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट आई थी. इसमें कहा गया था कि ये सामने आया है कि ग्रूमिंग गैंग के अपराधियों में ब्लैक और एशियन अपराधियों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है, जबकि ऐसा हो ही नहीं सकता कि ऐसी गैंग्स में सिर्फ किसी एक समुदाय के लोग ही हों. रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि ज्यादातर मामलों में अपराधी व्हाइट युवा भी होते हैं.

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ग्रूमिंग गैंग टास्कफोर्स क्या है?

ब्रिटिश सरकार के मुताबिक, ग्रूमिंग गैंग टास्कफोर्स में स्पेशल ऑफिसर होंगे, जो बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों और ग्रूमिंग की जांच करने में स्थानीय पुलिस की मदद करेंगे.

इस काम में नेशनल क्राइम एजेंसी भी मदद करेगी. टास्कफोर्स में ऐसे ऑफिसर होंगे जिनके पास ग्रूमिंग गैंग के अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का लंबा अनुभव होगा. ये टास्कफोर्स देशभर में ग्रूमिंग गैंग्स के खिलाफ काम करेगी. इसका मकसद ग्रूमिंग गैंग से जुड़े ज्यादा से ज्यादा अपराधियों को जेल में डालना होगा.

इस टास्कफोर्स में डेटा एनालिस्ट भी शामिल होंगे. ये एनालिस्ट अपराधियों का एक डेटाबेस तैयार करेंगे, ताकि उनकी सांस्कृतिक और जातीय पहचान की जा सके.

 

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