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क्या IMF ही कर रहा पाकिस्तान को बर्बाद? 7 अरब डॉलर की लोन डील पर क्यों उठ रहे सवाल

7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज पर 12 जुलाई को सहमति बन गई थी. लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी इसे मंजूरी नहीं मिली है. पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने आईएमएफ पर जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ. (फाइल फोटो)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ. (फाइल फोटो)

जब कोई देश आर्थिक संकट से जूझता है तो वो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बेलआउट पैकेज मांगता है. पाकिस्तान ने भी यही किया. लेकिन अभी तक बात बन नहीं सकी है. 

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जुलाई में 7 अरब डॉलर के कर्ज पर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिली है. आईएमएफ के एक्जीक्यूटिव बोर्ड से मंजूरी मिलनी बाकी है. पाकिस्तान को कर्ज दिया जाए या नहीं, इसे लेकर 25 सितंबर को एक्जीक्यूटिव बोर्ड की मीटिंग में फैसला लिया जाएगा. अगर एक्जीक्यूटिव बोर्ड से मंजूरी मिलती है तो पाकिस्तान को अगले 37 महीनों में 7 अरब डॉलर का कर्ज मिलेगा.

जुलाई में जब आईएमएफ ने 7 अरब डॉलर का कर्ज देने पर सहमति जताई थी, तो कई शर्तें भी लगाई थीं. इन शर्तों में से एक बड़ी शर्त खेती से होने वाली कमाई पर टैक्स बढ़ाने की भी थी. पाकिस्तान का कहना है कि वो सारी शर्तें मानने को तैयार है. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, खेती से होने वाली कमाई पर टैक्स 15% से बढ़ाकर 45% किया जा सकता है. इसके अलावा आईएमएफ ने बिजली बिल पर मिल रही सब्सिडी को भी खत्म करने की शर्त रखी थी.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में कहा है कि उनकी सरकार ने आईएमएफ की सभी शर्तों को पूरा किया है.

क्या IMF ही कर रहा बर्बाद?

7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज पर 12 जुलाई को सहमति बन गई थी. लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी इसे मंजूरी नहीं मिली है.

अब तो आईएमएफ पर ही पाकिस्तान को जानबूझकर बर्बाद करने के आरोप लगने लगे हैं. पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने हाल ही में आरोप लगाया था कि आईएमएफ जानबूझकर बेलआउट पैकेज को मंजूरी नहीं दे रहा है.

कुछ दिन पहले एक कार्यक्रम में इशाक डार ने कहा था, 'मैं पिछली सरकार में 11 महीने तक मंत्री था. रिव्यू होते रहे. मेरा मानना है कि वो (आईएमएफ) चाहते थे कि पाकिस्तान दिवालिया हो जाए. हमारे राजनेताओं को इससे सावधान रहना चाहिए.'

डार ने कहा था, 'जब पाकिस्तान दिवालिया होने के करीब था, तब जियो पॉलिटिक्स खेली जा रही थी. जब हमारा टेक्निकल रिव्यू पूरा हो गया है तो मुझे उंगली क्यों नहीं उठानी चाहिए... वो हमारा समय क्यों बर्बाद कर रहे हैं?'

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क्या जानबूझकर देरी कर रहा IMF?

इशाक डार आईएमएफ पर जानबूझकर देरी करने का आरोप लगा रहे हैं. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? मगर ऐसा है नहीं. असल में आईएमएफ ने दो शर्तें भी रखी थीं, जिसे पूरा करने में पाकिस्तान नाकाम रहा है.

पहली शर्त थी कि पाकिस्तान के ऊपर पहले से जो 12 अरब डॉलर का कर्ज बकाया है, उसे रोलओवर करवाए. पाकिस्तान को सऊदी अरब का 5 अरब डॉलर, चीन का 4 अरब डॉलर और यूएई का 3 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है. अब तक इसे चुकाया नहीं है. आईएमएफ चाहता था कि इस लोन को रोलओवर करवाया जाए. यानी कि नए सिरे से इस कर्ज की शर्तें तय हों. जबकि, दूसरी शर्त थी कि 2 अरब डॉलर की व्यवस्था भी करे. पाकिस्तान ऐसा करने में नाकाम रहा.

हालांकि, अब माना जा रहा है कि सऊदी, चीन और यूएई से उसे राहत मिल गई है. क्योंकि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने 12 सितंबर को मीटिंग में सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन इस बात का जिक्र करते हुए 'फ्रेंडली कंट्रीज' का शुक्रिया अदा जरूर किया. शरीफ ने बेलआउट पैकेज में मदद करने के लिए चीन का खासतौर पर धन्यवाद किया.

अर्थशास्त्री फहाद अली ने अल-जजीरा को बताया कि पाकिस्तान 2 अरब डॉलर के लिए मध्य पूर्व के देशों के संपर्क में था, लेकिन अब तक कोई बात बनी नहीं.

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इतना ही नहीं, आईएमएफ चाहता था कि बिजली सब्सिडी खत्म की जाए. लेकिन अगस्त में ही पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत पंजाब ने 45 अरब पाकिस्तानी रुपये की सब्सिडी का ऐलान किया है. पंजाब सरकार का दावा है कि इस सब्सिडी के लिए प्रांतीय स्तर से ही खर्च किया जाएगा.

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पाकिस्तान को कर्ज की जरूरत क्यों?

- बढ़ता कर्जः पाकिस्तान कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, जून 2024 तक मुल्क पर 71,245 अरब पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा का कर्ज है.

- खाली होता विदेशी मुद्रा भंडारः पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से खाली हो रहा है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 में 17.2 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था. जबकि, 2023-24 तक ये घटकर 9.3 अरब डॉलर पर आ गया.

- लगातार गिरती करंसीः पाकिस्तानी रुपया लगातार कमजोर हो रहा है. अभी 1 अमेरिकी डॉलर का भाव 278 पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा हो गया है. जबकि, मई 2022 में 185 पाकिस्तानी रुपये के आसपास था.

- बेतहाशा बढ़ती महंगाईः पाकिस्तान में महंगाई कम होने का नाम नहीं ले रही है. अभी भी वहां महंगाई दर 10 फीसदी के आसपास है. कुछ महीने पहले ही एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान में एक 800 रुपये में एक किलो आटा मिल रहा है.

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IMF का कितना बड़ा कर्जदार है पाकिस्तान?

पाकिस्तान जब से आजाद हुआ है, तब से आईएमएफ से 23 बार कर्ज ले चुका है. आईएमएफ के मुताबिक, 12 सितंबर 2024 तक पाकिस्तान पर 6.15 अरब डॉलर का कर्जा था और पाकिस्तान आईएमएफ का पांचवां सबसे बड़ा कर्जदार था. 

पहले नंबर पर अर्जेंटीना था, जिसके ऊपर आईएमएफ की 31 अरब डॉलर की उधारी थी. दूसरे नंबर पर 10.3 अरब डॉलर के साथ मिस्र था. तीसरे नंबर पर यूक्रेन है, जिसने 10.2 अरब डॉलर का कर्ज लिया था. चौथे नंबर पर इक्वाडोर है, जिसने 6.4 अरब डॉलर का कर्ज लिया है. 

अब 7 अरब डॉलर का कर्ज अगले 37 महीने में मिलने पर पाकिस्तान के ऊपर कुल 13 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्जा हो जाएगा. भारतीय करंसी में ये रकम 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होती है. पाकिस्तान एशिया में IMF का सबसे बड़ा कर्जदार है.

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