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केरल में कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा ताकतवर है मुस्लिम लीग, क्या है इस पार्टी का जिन्ना से कनेक्शन?

केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने लोकसभा चुनाव में बाजी मार ली. इस बीच मुस्लिम लीग की चर्चा हो रही है. कांग्रेस के साथ UDF अलायंस में शामिल इस पार्टी ने दो सीटें पाई हैं. नाम के चलते इसे देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार मुस्लिम लीग और जिन्ना से जोड़ा जाता है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है?

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केरल में लोकसभा की कुल 20 सीटें हैं. (Photo- Getty Images)
केरल में लोकसभा की कुल 20 सीटें हैं. (Photo- Getty Images)

ये लोकसभा चुनाव कई बदलाव लेकर आया. भाजपा अब भी सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन सरकार वो गठबंधन के बूते ही बना सकेगी. कई जगहों पर इसके वोट कटे, वहीं कहीं-कहीं चौंकानेवाली जीत दिखी. जैसे केरल में बीजेपी ने पहली बार एक सीट जीती. सबसे ज्यादा वोट कांग्रेस को मिले. दूसरे नंबर पर रही इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, जो कांग्रेस अलायंस UDF का सबसे बड़ा साथी है. मुस्लिम लीग को मुहम्मद अली जिन्ना की पार्टी से जोड़कर देखा जाता है. जानिए, दोनों में कितना है कनेक्शन. 

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जिन्ना की पार्टी वर्चुअली खत्म होकर भी रही जिंदा

जिन्ना की पार्टी का पूरा नाम अखिल भारतीय मुस्लिम लीग था, जिसकी नींव ढाका (तब अखंड भारत का हिस्सा) में साल 1906 में पड़ी. ये देश की पहली मुस्लिम राजनीतिक पार्टी थी. वैसे तो ये आजादी की बात करती थी, लेकिन साथ में एक मांग और थी- धार्मिक बंटवारे की. 1940 में जिन्ना ने एक भाषण के दौरान कहा था कि हिंदू-मुस्लिम इतने अलग हैं, कि उनका एक देश में रहना नामुमकिन है. इसके बाद बंटवारे के खिलाफ रहते कुछ सदस्य पार्टी से टूट गए थे और कांग्रेस से जा मिले थे. 

जिन्ना की लीडरशिप में ही पाकिस्तान के लिए मुहिम चली. आखिरकार बंटवारे के बाद ही ये पार्टी भंग हो सकी. हालांकि कई जगहों पर जिक्र मिलता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश के अलावा हमारे यहां भी कुछ पार्टियां इसी लीग से जन्मी हैं. केरल की इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को भी इसी तरह से देखा जाता है.  

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indian union muslim league including congress in kerala seats lok sabha election 2024 photo Getty Images

तो क्या सचमुच ऐसा है

हां. एक हद तक इसमें सच्चाई है. असल में हुआ यह कि जिन्ना ने तो पार्टी भंग कर दी थी ये कहते हुए कि उसका काम पूरा हो चुका. लेकिन इस नाम को काफी लोग भुनाना चाहते हैं. जिन्ना के निधन के बाद पाकिस्तान में फिर से मुस्लिम लीग पार्टी बनी. उसी दौरान पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में ऑल पाकिस्तान अवामी मुस्लिम लीग तैयार हुई. साथ ही साथ भारत में भी एक हिस्सा बना- इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग. 

मोहम्मद इस्माइल को इसका लीडर चुना गया, जो पहले मुस्लिम लीग की मद्रास यूनिट देख रहे थे. इसके बाद से ये मेनस्ट्रीम राजनीति में आ गई. पहले लोकसभा चुनाव में इस पार्टी से एक नेता चुनकर लोकसभा में भी गया. पॉलिटिक्स में टिकने के लिए लीग पहले सीपीआई-एम से भी जुड़ा, लेकिन फिर 1976 में इसने कांग्रेस से गठबंधठन कर लिया. तब से लेकर ये बॉन्ड बना हुआ है. केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस का सबसे बड़ी सहयोगी दल है. ये मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम उम्मीदवारों के साथ ही चुनाव में खड़ा होता आया. 

indian union muslim league including congress in kerala seats lok sabha election 2024 photo PTI

इस बार कहां-कहां जीती

केरल में इस बार कई लेयरों पर लड़ाई हुई. सीपीएम के अलावा भाजपा ने भी क्रिश्चियन वोट पाने की कोशिश की. हालांकि नतीजा कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF के पक्ष में रहा. इसने कुल 20 में से 18 सीटें जीतीं. जबकि एक सीट भाजपा और एक सीपीआई-एम को मिली. मुस्लिम लीग को मल्लपुरम और पोन्नानी से वोट मिले. दोनों ही मुस्लिम प्रत्याशी थे, जो पूरे राज्य में राहुल गांधी के बाद सबसे ज्यादा मार्जिन से जीते. 

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राम मंदिर पर दे चुके विवादित बयान

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग वैसे तो अपनी कट्टरता के लिए जानी जाती है, लेकिन कई बार इसके सॉफ्ट पड़ने को लेकर भी विवाद हुए. जैसे इसके एक लीडर सैय्यद सादिक अली शिहाब ने राम मंदिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कह दिया था कि मेजोरिटी लंबे समय से जिसका इंतजार कर रही थी, अगर वो हुआ तो विरोध की कोई बात नहीं. नया मंदिर तथा प्रस्तावित मस्जिद, दोनों ही देश में धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करेंगे. सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हो गया था और सैय्यद सादिक काफी घिरे थे. उनपर लीक छोड़ने और तुष्टिकरण जैसे आरोप लगे थे. 

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