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पाकिस्तान ने पाली 'मुस्लिम लीडर' बनने की चाहत! पढ़ें- ईरान के साथ जंग कैसे बढ़ा सकता है शिया-सुन्नी संघर्ष

ईरान और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है. पहले ईरान ने पाकिस्तान में और फिर पाकिस्तान ने ईरान में एयरस्ट्राइक की है. दोनों का दावा है कि आतंकी संगठनों के ठिकानों पर हमला किया गया है. हालांकि, जानकार इसे शिया और सुन्नी मुस्लमानों के बीच नए संघर्ष से भी जोड़कर देख रहे हैं.

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ईरान और पाकिस्तान का तनाव शिया-सुन्नी संघर्ष को बढ़ा सकता है.
ईरान और पाकिस्तान का तनाव शिया-सुन्नी संघर्ष को बढ़ा सकता है.

बलूचिस्तान में एयरस्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है. पाकिस्तान का दावा है कि ईरान के हमले में दो बच्चियों की मौत हुई है. वहीं, जवाब में पाकिस्तान ने भी ईरान पर हवाई हमला किया, जिसमें 9 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है.

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ईरान ने मंगलवार रात पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित जैश अल-अद्ल नाम के आतंकी संगठन के दो ठिकानों पर हवाई हमला किया था. ईरान ने दावा किया कि जैश अल-अद्ल नाम के आतंकियों ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में पनाह ली है और हमला उसके ही ठिकानों पर किया गया था. 

इसके बाद पाकिस्तान ने भी ईरान में आतंकी संगठनों पर हवाई हमला करने का दावा किया है. पाकिस्तानी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि ईरान में मौजूद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के ठिकानों पर हमला किया गया है.

लेकिन क्या ईरान और पाकिस्तान की एक-दूसरे पर ये एयरस्ट्राइक सिर्फ आतंकी ठिकानों पर ही है. ध्यान रखने वाली बात ये है कि ईरान ने पाकिस्तान में ऐसे समय पर हवाई हमला किया, जब हाल ही में उसने इराक और सीरिया में भी एयरस्ट्राइक की थी. 

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हालांकि, ईरान और पाकिस्तान के बीच इस तनाव को शिया और सुन्नी विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है. ईरान एक शिया बहुल देश है. वहीं, ईरान ने जिस जैश अल-अद्ल नाम के आतंकी संगठन के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, वो सुन्नी समूह है.

ईरान और पाकिस्तान ने एक-दूसरे पर एयरस्ट्राइक की है. (फोटो-AFP)

ईरान और पाकिस्तान... दो पड़ोसी

पाकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान और ईरान से लगती है. कहने को तो तीनों ही इस्लामिक देश हैं. लेकिन इनमें एक बड़ा अंतर है. और वो ये कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान जहां सुन्नी बहुल राष्ट्र हैं, वहीं ईरान शिया बहुल है.

पाकिस्तान का सुन्नी और ईरान का शिया बहुल होना दोनों पड़ोसियों के बीच तनाव की वजहों में से एक है. 

दोनों मुल्कों की सीमा पर ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत और पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत पड़ता है. दोनों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा बलूचिस्तान से होकर ही गुजरती है. ये पूरा इलाका ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पड़ता है.

ईरान और पाकिस्तान के बीच 900 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा है. माना जाता है कि इतनी लंबी सीमा दोनों मुल्कों के बीच ड्रग्स ट्रैफिकिंग और उग्रवाद का हॉटस्पॉट भी बन गई है. जानकार मानते हैं कि बलूचिस्तान दोनों देशों में फैला हुआ है और इस कारण दोनों के बीच सांप्रदायिक मतभेद के साथ-साथ बलूची अलगाववादी गतिविधियां होने के कारण तनाव बना रहता है.

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एयरस्ट्राइक के बाद से दोनों के बीच तनाव है. (फोटो- रॉयटर्स)

सुन्नी-शिया संघर्ष

शिया और सुन्नी के बीच संघर्ष मजहबी है. दोनों ही कुरान और शरीयत को मानते हैं. हालांकि, इसके बावजूद प्यू रिसर्च का एक सर्वे बताता है कि ज्यादातर सुन्नी शियाओं को मुस्लमान नहीं मानते, लेकिन ज्यादातर शिया सुन्नियों को मुस्लिम मानते हैं.

दोनों के बीच ये संघर्ष पैगम्बर मोहम्मद की मृत्यु के बाद से ही जारी है. पैगम्बर मोहम्मद की मृत्यु के बाद शिया एक ओर हजरत अली इब्न अली तालिब को तो सुन्नी अबू बकर को अपना 'खलीफा' मानते हैं.

काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशन (सीएफआर) के मुताबिक, दुनियाभर में 85 फीसीद आबादी मुस्लिम है और सिर्फ 15 फीसदी ही शिया हैं. 

सीआईए की वर्ल्ड फैक्टबुक का अनुमान है कि ईरान की 99.6% मुस्लिम आबादी में से 90 से 95% % शिया और 5 से 10% सुन्नी हैं. वहीं, पाकिस्तान की 96.5% मुस्लिम आबादी में से 85 से 90% सुन्नी और 10 से 15% शिया हैं.

सीएफआर के मुताबिक, सुन्नी और शिया में मतभेद होने के बावजूद शांति बनी थी, लेकिन 20वीं सदी की शुरुआत के बाद दोनों में तनाव ज्यादा बढ़ गया. 1970 में ईरान की इस्लामिक क्रांति ने इस विवाद को और बढ़ा दिया. 

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान और ईरान के कड़वे संबंध की एक वजह सुन्नी और शिया के बीच मजहबी विवाद भी है.

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और बढ़ेगा शिया-सुन्नी में विवाद!

पहले ईरान का पाकिस्तान में और फिर पाकिस्तान का ईरान में हवाई हमला करना शिया और सुन्नी के बीच विवाद को और बढ़ा सकता है. एक्सपर्ट ने चिंता है कि शिया-सुन्नी विवाद को और बढ़ाने के लिए ये हमले जानबूझकर किए गए हों.

डिफेंस एक्सपर्ट कमर आगा ने न्यूज एजेंसी को बताया कि पाकिस्तान-ईरान का तनाव अब नया मोड़ ले रहा है. उन्होंने कहा कि एक ओर ईरान इस तनाव को कम करने की कोशिश करेगा, तो दूसरी ओर पाकिस्तान उन लोगों को खुश करने की कोशिश कर रहा है, जो नहीं चाहते कि ईरान इस क्षेत्र में किसी भूमिका में आए.

कमर आगा ने कहा कि पाकिस्तान जानबूझकर शिया-सुन्नी संघर्ष को बढ़ाना चाहता है, ताकि वो अरब वर्ल्ड के सामने खुद को मुस्लिम लीडर के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, अरब वर्ल्ड में कोई भी मुस्लिम देश पाकिस्तान को अपना नेता नहीं मानेगा, लेकिन फिर भी वो उन्हें खुश करने के चक्कर में ये सब कर रहा है.

ईरान और पाकिस्तान में अच्छे रिश्ते क्यों नहीं?

ईरान और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों का इतिहास काफी जटिल रहा है. बलूचिस्तान में पैठ जमा रहा जैश अल-अद्ल ईरानी बॉर्डर गार्ड्स पर हमले करते रहा है. 

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अमेरिका के डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस के मुताबिक, जैश अल-अद्ल 2013 से ईरान में घात लगाकर हमले करने, हत्या करने, सरकारी अफसरों और नागरिकों के अपहरण में शामिल रहा है.

अक्टूबर 2013 में जैश अल-अद्ल ने ईरानी बॉर्डर गार्ड्स के 14 सैनिकों की हत्या कर दी थी. 2019 में भी उसने इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स पर सुसाइड हमला किया था, जिसमें 27 जवान मारे गए थे. उसे साल आतंकी संगठन ने ईरान के सुरक्षाबल के 14 जवानों का अपहरण कर लिया था.

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