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कतर में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप में जाकिर नाइक की एंट्री पर बवाल हो गया है. जाकिर नाइक के आने पर भारत ने कतर के सामने नाराजगी जाहिर की है. भारत की आपत्ति के बाद कतर ने साफ किया है कि जाकिर नाइक को वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी के लिए आधिकारिक रूप से इनवाइट नहीं किया गया था.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को बताया कि जाकिर नाइक के शामिल होने का मुद्दा कतर के सामने उठाया गया था. कतर ने बताया है कि जाकिर नाइक को इनवाइट नहीं किया गया था. बागची ने कहा कि जाकिर नाइक को भारत लाने की पूरी कोशिश की जा रही है.
जाकिर नाइक की एंट्री पर बवाल क्यों?
जाकिर नाइक खुद को इस्लामी धर्मगुरु और उपदेशक बताता है. नाइक खुद को शांतिदूत के तौर पर भी पेश करता है. हालांकि, उसके भाषणों से शांति तो नहीं, बल्कि हिंसा ही बढ़ती है.
जाकिर नाइक भारत में वॉन्टेड है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने उसे वॉन्टेड घोषित कर रखा है. उस पर भड़काऊ भाषण देने, मनी लॉन्ड्रिंग करने और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप है. 2017 में जाकिर नाइक मलेशिया भाग गया था. उसके पास मलेशिया की नागरिकता भी है.
भारत ने कई बार मलेशिया से जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण की मांग की है. मलेशिया में जाकिर नाइक खुलेआम घूमता है. और अब फीफा वर्ल्ड कप की ओपनिंग सेरेमनी में नाइक के पहुंचने पर भारत असहज हो गया है.
जाकिर नाइक इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) के नाम से एक एनजीओ भी चलाता था. केंद्र सरकार ने उसके एनजीओ पर 2016 में बैन लगा दिया था. इस साल मार्च में इस प्रतिबंध को पांच साल के लिए और बढ़ा दिया है. केंद्र सरकार ने इस फाउंडेशन पर UAPA के तहत बैन लगाया है. आरोप है कि फाउंडेशन के जरिए जाकिर नाइक फंडिंग लेता था और इसका इस्तेमाल कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में किया जाता था.
जाकिर नाइक पर क्या-क्या आरोप?
जाकिर नाइक पर भारत में भड़काऊ भाषण देने, मनी लॉन्ड्रिंग करने और आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप है.
मई 2019 में ईडी ने जाकिर नाइक के खिलाफ टेरर फंडिंग मामले में चार्जशीट दायर की थी. इस चार्जशीट में बताया था कि एजेंसी ने अब तक 193 करोड़ रुपये की संपत्ति की पहचान कर ली है, जिसमें से 50 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति जब्त की जा चुकी है.
ईडी ने दावा किया था 2003-04 और 2016-17 के बीच जाकिर नाइक को अज्ञात और संदिग्ध सोर्सेस से 64 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली थी. इनमें से ज्यादातर फंड का इस्तेमाल 'पीस कॉन्फ्रेंस' आयोजित करने के लिए हुआ था. एजेंसी ने ये भी बताया था 2012 से 2016 के दौरान जाकिर नाइक को 49.20 करोड़ रुपये भी मिले थे. ये रकम नाइक के यूएई के बैंक अकाउंट में आई थी.
इससे पहले अक्टूबर 2017 में एनआईए ने भी चार्जशीट दायर की थी. इस चार्जशीट में एनआईए ने जाकिर नाइक को भड़काऊ भाषण देने और युवाओं को उकसाने का आरोप लगाया था. चार्जशीट में कहा गया था कि जाकिर नाइक के वीडियो देखकर युवा प्रभावित हो रहे हैं और उनमें से कुछ आतंकी संगठनों में भी जुड़ रहे हैं. कुल मिलाकर जाकिर नाइक पर कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का आरोप है.
पीस टीवी और इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन
जाकिर नाइक ने 1990 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन शुरू किया था. नाइक इसे बताता तो एनजीओ था, लेकिन इसके जरिए फंडिंग हासिल करता था.
गृह मंत्रालय ने पहली बार 2016 में इस फाउंडेशन पर प्रतिबंध लगाया था. बाद में इस साल मार्च में इस प्रतिबंध को पांच साल के लिए और बढ़ा दिया है.
जाकिर नाइक ने एक पीस टीवी भी शुरू किया था, जिस पर वो भाषण दिया करता था. इस चैनल का प्रसारण दुबई से होता था. इस पर नाइक ऐसे भाषण देता था जिससे युवा प्रभावित होते थे और कट्टरपंथ की ओर मुड़ जाते थे.
कैसे चर्चा में आया था जाकिर नाइक?
जाकिर नाइक का जन्म 1965 में मुंबई के डोंगरी में हुआ था. उसके पिता और दोनों भाई डॉक्टर थे. नाइक ने भी मेडिकल की पढ़ाई की और डॉक्टर बन गया. 1990 में उसने डॉक्टरी छोड़कर इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन शुरू कर दिया.
साल 2000 आते-आते जाकिर नाइक चर्चा में आने लगा. उसके वीडियो पर बहसें होने लगीं. जाकिर नाइक इस्लाम को बाकी सभी धर्मों से श्रेष्ठ और महान बताता था. उसके समर्थक उसे इस्लाम का जानकार भी कहते हैं.
उसके बाद उसने पीस टीवी इंग्लिश शुरू किया. फिर इसे उर्दू और बांगला भाषा में भी लॉन्च किया. जाकिर नाइक के इस चैनल को भारत, बांग्लादेश समेत कई देशों ने बैन कर रखा है, क्योंकि इसके जरिए वो युवाओं को भड़काता है.
जाकिर नाइक ने एक बार कथित तौर पर कहा था, 'अगर ओसामा बिन लादेन इस्लाम के दुश्मनों से लड़ रहा है, तो मैं उसके साथ हूं. अगर वो सबसे बड़ी आतंकी अमेरिका से लड़ रहा है तो भी मैं उसके साथ खड़ा हूं. हर मुसलमान को आतंकवादी होना चाहिए.' हालांकि, जाकिर नाइक दावा करता था कि उसके बयान को गलत तरह से पेश किया गया था.
इतना ही नहीं, जाकिर नाइक समलैंगिकता और इस्लाम से किसी और धर्म में परिवर्तित होने वाले लोगों को मौत की सजा देने की मांग करता था. एक बार उसने कहा था, 'जब उनका धर्म गलत है, उनका पूजा करने का तरीका गलत है तो एक इस्लामी राज्य में हम उन्हें मंदिर या चर्च बनाने की अनुमति कैसे दे सकते हैं.'
जाकिर नाइक जुलाई 2016 में उस समय चर्चा में आया जब बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बम ब्लास्ट हुआ. हमलावरों में से एक ने बताया था कि वो जाकिर नाइक के वीडियो से प्रभावित था. ढाका हमले के कुछ महीनों बाद ही जाकिर नाइक भारत छोड़कर भाग गया था.
इसके बाद अप्रैल 2019 में श्रीलंका में ईस्टर संडे पर हुए बम धमाकों के तार भी जाकिर नाइक से जुड़े. इन धमाकों में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. इन धमाकों की जिम्मेदारी नेशनल तौहीथ जमाथ ने ली थी. इस संगठन के मुखिया जेहरान हाशिम ने जाकिर नाइक की तारीफ की थी और श्रीलंकाई मुस्लमानों से पूछा कि वो उसके लिए क्या कर सकते हैं?
मैंगलोर ब्लास्ट केस में भी जाकिर कनेक्शन
हाल ही में मैंगलोर में एक ऑटो रिक्शा में बम ब्लास्ट हुआ था. इस धमाके में भी जाकिर नाइक का कनेक्शन सामने आया है.
इस बम ब्लास्ट का मुख्य आरोपी शरीक बताया जा रहा है. शरीक खुद इस धमाके में 40 फीसदी तक जल गया है. पुलिस से जुड़े सूत्रों ने बताया कि शरीक जाकिर नाइक के वीडियो से प्रभावित था. वो इन वीडियो को अपने साथियों मुनीर, यासिन और जाबी को भी भेजा करता था.
इस धमाके बाद पुलिस ने शरीक का मोबाइल जब्त कर लिया था. इस मोबाइल में पुलिस को जाकिर नाइक के कई वीडियो मिले हैं. पुलिस का कहना है कि युवाओं को कट्टर बनाने के लिए शरीक जाकिर नाइक के वीडियो और आईएसआईएस से जुड़े पीडीएफ और दस्तावेज भेजा करता था.