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इजरायल और फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास के बीच जंग तेज होती जा रही है. इस जंग में अब तक दोनों ओर से हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. सैकड़ों इजरायली नागरिकों को हमास ने बंधक भी बना रखा है.
ये जंग 7 अक्टूबर को तब शुरू हुई थी, जब हमास ने गाजा पट्टी से इजरायल की ओर रॉकेट दागे थे. हमास ने इजरायल पर पांच हजार से ज्यादा रॉकेट दागने का दावा किया था.
इसके बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया था. नेतन्याहू का कहना है, 'दुश्मन को ऐसी कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसके बारे में उसने कभी नहीं सोचा होगा.'
इजरायल और हमास के बीच पहले भी संघर्ष हो चुका है. लेकिन इस बार ये संघर्ष से कहीं ज्यादा है. वो इसलिए क्योंकि इससे पहले कभी इजरायल ने आधिकारिक तौर पर पहली बार हमास के खिलाफ जंग का ऐलान नहीं किया था. पर इस बार किया है.
इस जंग के अहम किरदार कौन?
1. हमासः फिलिस्तीन का इस्लामिक चरमपंथी संगठन है. 1987 में बना था. इस्माइल हानियेह इसका मुखिया है. इजरायल के अलावा अमेरिका समेत कई देशों ने हमास को आतंकी संगठन घोषित करके रखा है. 2007 से हमास का गाजा पट्टी पर दबदबा है. अरसे से हमास इजरायल पर हमले करते रहा है. हमास का सबसे ज्यादा समर्थन ईरान करता है. ईरान से ही हमास को सबसे ज्यादा फंडिंग होती है.
2. बेंजामिन नेतन्याहूः इजरायल के प्रधानमंत्री हैं. पिछले साल आम चुनाव छठी बार इजरायल के प्रधानमंत्री चुने गए. नेतन्याहू पर फिलिस्तीनी इलाकों में यहूदी बस्तियां बसाने का आरोप लगता रहा है. पिछले साल सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू ने 'न्यू मिडिल ईस्ट' का नक्शा दिखाया था. इस नक्शे में फिलिस्तीन को शामिल नहीं किया गया था. हमास के खिलाफ जंग का ऐलान करने के बाद नेतन्याहू ने चेतावनी दी थी कि इजरायल का एक्शन मिडिल ईस्ट को बदल देगी.
3. मोहम्मद डायफः हमास की मिलिट्री विंग का चीफ है मोहम्मद डायफ. इजरायल पर हमले का मास्टरमाइंड इसे ही माना जा रहा है. इसने ही इजरायल के खिलाफ 'ऑपरेशन अल-अक्सा स्टॉर्म' की अगुवाई की थी. मोहम्मद डायफ साल 2002 से हमास की मिलिट्री विंग का प्रमुख है. डायफ जब 20 साल का था तो उसे फिलस्तीन के पहले इंतिफादा (विद्रोह) के समय इजरायली सरकार ने जेल भेज दिया था. 1996 में हुए एक बम धमाके में 50 से ज्यादा इजरायली नागरिक मारे गए थे जिसके लिए डायफ को जिम्मेदार बताया गया था.
4. इस्माइल हानियेहः हमास का मुखिया है. 29 जनवरी 1962 को गाजा पट्टी के शरणार्थी शिविर में पैदा हुआ हानियेह पढ़ाई के दौरान ही हमास से जुड़ गया था. साल 2006 में हानियेह फिलिस्तीन का प्रधानमंत्री बना. कई साल पहले वो गाजा पट्टी से भागकर कतर में आ गया था. इजरायल पर 7 अक्टूबर को हमले से पहले हानियेह ने कहा था, 'हमारे लोगों पर हो रहे अत्याचारों और पश्चिमी समर्थन को लेकर हमने अब सब खत्म करने का फैसला लिया है, ताकि दुश्मन समझ जाए कि बिना जिम्मेदार ठहराए वो मौज-मस्ती से नहीं रह सकता.'x
5. अयोतुल्लाह अली खामेनेईः 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता हैं अयोतुल्लाह अली खामेनेई. ईरान पर हमास का समर्थन करने के आरोप लग रहे हैं. दावा किया जाता है कि हमास को सबसे ज्यादा फंडिंग भी ईरान से ही मिलती है. हालांकि, ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया है. वहीं, इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के प्रवक्ता मेजर नीर दीनार ने एक न्यूज वेबसाइट से कहा कि 'सबूत नहीं होने का मतलब ये नहीं है कि ईरान इसके पीछे नहीं है.'
6. हिजबुल्लाहः 1982 में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इस आतंकी संगठन को बनाया था. इसका मकसद ईरान में हुई इस्लामी क्रांति को दूसरे देश में फैलाना और लेबनान में इजरायली सेना के खिलाफ मोर्चा खड़ा करना था. इजरायल के खिलाफ इस जंग में हिजबुल्लाह, हमास का साथ दे रहा है. साल 2006 में भी हिजबुल्लाह ने इजरायल के साथ 35 दिन तक जंग लड़ी थी. इसमें 158 इजरायली नागरिकों की मौत हो गई थी.