पिछले साल 7 अक्टूबर को जब इजरायल और हमास की जंग शुरू हुई थी, तो इसमें हिज्बुल्लाह की भी एंट्री हो गई थी. तब इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हेर्जोग ने कहा था कि अगर हिज्बुल्लाह बीच में कूदता है तो लेबनान को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी. तभी इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने भी चेतावनी दी थी कि अगर हिज्बुल्लाह इस लड़ाई में शामिल होने की गलती करता है तो उसे इसका पछतावा होगा.
हमास और इजरायल के बीच जंग को लगभग एक साल होने वाला है. और अब इजरायल ने हिज्बुल्लाह को खुलकर टारगेट कर रहा है. पिछले हफ्ते पेजर अटैक से शुरू हुआ हमला अब हवाई हमलों पर आ गया है.
जानकारी के मुताबिक, इजरायल की बमबारी में अब तक लेबनान में 580 से ज्यादा मौतें हुई हैं, जिनमें दर्जनों बच्चे हैं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे 'नरसंहार' बताया है.
हमास के बाद अब इजरायल जिस तरह से हिज्बुल्लाह पर अटैक कर रहा है, उसे थर्ड लेबनान वॉर की शुरुआत भी माना जा रहा है. अगर ऐसा होता है तो 17 साल बाद लेबनान में एक बड़ी जंग होगी.
क्यों माना जा रहा थर्ड वॉर की शुरुआत?
जब से हमास और इजरायल की जंग शुरू हुई है, तभी से इसमें हिज्बुल्लाह भी एक्टिव है. हिज्बुल्लाह को ईरान का समर्थन है और अमेरिका-इजरायल ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है.
वैसे तो इजरायली सेना कई महीनों से ही लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर रहा था. लेकिन 17 सितंबर को इजरायल ने अपने लोगों से लौटने को कहा. तभी से लग रहा था कि इजरायल लेबनान में बड़ा ऑपरेशन करने की तैयारी में है. और उसी दिन उन पेजरों पर अटैक किया गया, जिनका इस्तेमाल हिज्बुल्लाह के लड़ाके बातचीत करने में कर रहे थे. इस अटैक में 9 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 4 हजार से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. अगले दिन ही फिर वॉकी-टॉकी, रेडियो, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस में भी ब्लास्ट हुए, जिसमें दर्जनों मौतें हुईं.
19 सितंबर को इजरायली सेना ने लेबनान में जगह-जगह हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया. उस दिन 100 रॉकेट लॉन्चरों से हमले किए गए थे. 20 सिंतबर को इजरायल ने बेरूत में एक बड़ा हमला किया. ये हमला हिज्बुल्लाह की राडवान यूनिट पर हुआ. इजरायल ने इस हमले में हिज्बुल्लाह के 10 सीनियर कमांडरों के मारे जाने का दावा किया.
फिर 23 सितंबर को इजरायल ने दो दशकों का सबसे खतरनाक हमला किया. इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हमला किया. इस हमले में अब तक 580 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
इजरायल की सेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हगारी ने कहा कि इजरायली सीमा से सटे लेबनान से हिज्बुल्लाह को खदेड़ने के लिए जो कुछ जरूरी होगा, सेना वो सब करेगी.
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पहले कब-कब हुई लेबनान में जंग?
- 1982 की जंग और हिज्बुल्लाह का गठन
मार्च 1978 में पैलेस्टाइन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) के आतंकियों ने इजरायल में घुसपैठ कर एक अमेरिकी पर्यटक की हत्या कर दी. इसके बाद एक बस को हाईजैक कर 34 बंधकों को मार दिया. इसके जवाब में इजरायली सेना ने लेबनान पर हमला कर दिया और चुन-चुनकर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. करीब दो महीने बाद संयुक्त राष्ट्र की मदद से थोड़ी शांति हुई.
हालांकि, PLO और इजरायली सेना के बीच समय-समय पर संघर्ष होता रहा. जुलाई 1981 में दोनों के बीच सीजफायर तब टूट गया, जब PLO ने इजरायल में 270 से ज्यादा हमले किए, जिसमें 29 इजरायलियों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हो गए. माना जाता है कि उस वक्त लेबनान में PLO के 15 से 18 हजार लड़ाके थे.
1982 में हालात तब बिगड़ गए, जब फिलिस्तीनी आतंकियों ने ब्रिटेन में इजरायली राजदूत की हत्या करने की कोशिश की. उसी साल 6 जून को इजरायली सेना ने 'ऑपरेशन पीस फॉर गैलिली' शुरू किया.
माना जाता है कि इसी बीच इजरायली सेना का मुकाबला करने के लिए ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने हिज्बुल्लाह को बनाया. इजरायली सेना ने लेबनान पर महले और तेज कर दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1 सितंबर 1982 तक PLO के 14 हजार से ज्यादा लड़ाकों ने लेबनान छोड़ दिया था. इनमें PLO का चेयरमैन यासिर अराफात भी शामिल था. आखिरकार 5 जून 1985 को ये जंग खत्म हुई.
- 2006 में 34 दिन तक चली वो जंग
12 जुलाई 2006 को हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट हमला कर दिया. इसके बाद हिज्बुल्लाह के लड़ाकों ने इजरायली सीमा में घुसकर तीन सैनिकों को मार डाला. जबकि, दो को बंधक बना लिया.
इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री एहुद ओलमर्ट ने इसके लिए लेबनान को जिम्मेदार ठहराते हुए इसे 'एक्ट ऑफ वॉर' बताया. उन्होंने कहा कि लेबनान को इसका अंजाम भुगतना होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि उस वक्त लेबनान की सरकार में हिज्बुल्लाह के दो मंत्री थे. उसी रात इजरायली सेना ने लेबनान में हमला कर दिया.
इजरायली सेना ने जमीन से लेकर हवाई हमले तक जारी रखे. लेबनान में जगह-जगह हवाई हमले किए गए. एक हवाई हमले में बेरूत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट का रनवे भी तबाह हो गया.
34 दिन तक चली इजरायल और हिज्बुल्ला की इस जंग में 1100 से ज्यादा लेबनानी नागरिक मारे गए थे. इजरायल के भी 165 नागरिकों की इसमें मौत हुई थी. इस जंग में वैसे तो कोई नहीं जीता था, लेकिन सीधे तौर पर लेबनान को भारी नुकसान हुआ था.
इंटरनेशनल रेड क्रॉस कमेटी के मुताबिक, उस जंग में इजरायली सेना ने 30 हजार से ज्यादा घर या तो पूरी तरह तबाह कर दिए थे या फिर उन्हें क्षति पहुंचाई थी. 109 पुल और 78 मेडिकल फैसेलिटी को डैमेज कर दिया था.
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क्या अब शुरू होगा थर्ड लेबनान वॉर?
अभी जिस तरह से लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल का ऑपरेशन चल रहा है, उससे एक और बड़ी जंग का खतरा पैदा हो गया है.
हालांकि, जानकारों का मानना है कि हमास से जंग के कारण इजरायल को भी नुकसान हुआ है और वो काफी हद तक फूंक-फूंककर कदम रखेगा. हिज्बुल्लाह के लड़ाके इजरायली सीमा और लितानी नदी के आसपास हैं. इजरायल इन्हें यहां से खदेड़ना चाहता है. माना जा रहा है कि अगर हिज्बुल्लाह के लड़ाके पीछे नहीं हटते हैं तो इजरायली सेना जमीनी हमला कर सकती है.
लेबनान में जमीनी हमला करने से पहले इजरायली सेना वही रणनीति अपना सकती है जो उसने गाजा में अपनाई थी. गाजा में जमीनी ऑपरेशन शुरू करने से पहले इजरायली सेना ने कई दिनों तक हवाई हमले किए थे. लेबनान में अभी ऐसा ही हो रहा है. कई दिन से लेबनान में हवाई हमले हो रहे हैं.
जानकार मानते हैं कि अगर इजरायल को लगता है कि जमीनी हमला करना जरूरी है तो वो ऐसा जरूर करेगा. वो हवाई हमलों के साथ-साथ जमीनी हमलों को अंजाम देगा. अगर ऐसा होता है तो लेबनान की सीमा में इजरायल की सेना, बख्तरबंद गाड़ियां, तोपखाने घुस जाएंगे.
2006 में जब लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह ने आखिरी बार जंग लड़ी थी, तब से अब तक दोनों की सैन्य क्षमता काफी बढ़ चुकी है. तब इजरायल के आयरन डोम डिफेंस सिस्टम भी नहीं था, लेकिन अब है. उस वक्त हिज्बुल्लाह के पास 3 से 5 हजार लड़ाके थे, लेकिन अब 30 से 50 हजार लड़ाके हैं. हालांकि, इसी साल हिज्बुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह ने दावा किया था कि उसके पास एक लाख से ज्यादा लड़ाके हैं. इतना ही नहीं, हिज्बुल्लाह का दावा है कि उसके पास 1 से 2 लाख रॉकेट भी हैं.
फर्स्ट लेबनान वॉर लगभग 3 साल तक चला था. और दूसरा लेबनान वॉर 34 दिन में खत्म हो गया था. अब थर्ड वॉर कितने दिनों तक चलता है, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हिज्बुल्लाह कब बातचीत की टेबल पर आता है. सबसे बड़ा सवाल ये होगा कि ईरान क्या करेगा? हिज्बुल्लाह का इस्तेमाल ईरान प्रॉक्सी वॉर के तौर पर करता है. जाहिर है इलाके में ईरान अपने सबसे बड़ी ताकत को खोना नहीं चाहेगा. अगर ईरान भी इस जंग में कूदता है तो मध्य पूर्व का संघर्ष और गहरा सकता है.