
इजरायल और हमास में संघर्ष नई बात नहीं है. लेकिन इस बार ये बहुत अलग है. क्योंकि इस बार हमास ने इजरायल पर जो हमला किया है, उस बारे में शायद ही किसी ने सोचा हो. 7 अक्टूबर की सुबह-सुबह हमास ने इजरायल पर पांच हजार से ज्यादा रॉकेट दागे.
50 साल के इतिहास में इजरायल पर ये सबसे घातक हमला बताया जा रहा है. इस हमले में हमास ने इजरायल को जमीन, समंदर और आसमान... तीनों जगह से हमला किया.
हमास फिलिस्तीन का आतंकी संगठन है. हमास ने इस बार इतना जोरदार हमला किया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को आधिकारिक तौर पर जंग का ऐलान करना पड़ा. जवाबी कार्रवाई में इजरायल ने भी गाजा पट्टी पर हमले तेज कर दिए. गाजा पट्टी में रहने वालों को खाना-पानी तक नहीं मिल पा रहा है. बिजली भी कट गई है.
इजरायल और फिलिस्तीन में संघर्ष एक सदी से भी ज्यादा पुराना है. 1948 से पहले तक इजरायल था ही नहीं. ये पूरा फिलिस्तीन ही था, जिसपर कभी ऑटोमन साम्राज्य का राज था. 14 मई 1948 को इजरायल अस्तित्व में आया. 1967 में छह दिन की जंग में इजरायल ने गाजा पट्टी, वेस्ट बैंक और पूर्वी येरूशलम को अपने कब्जे में ले लिया.
यूएन का 1947 का प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र ने 1947 में फिलिस्तीन के बंटवारे का एक प्रस्ताव रखा. ये प्रस्ताव फिलिस्तीन को यहूदी और अरब राज्यों में बांटने का था. जबकि, येरूशलम को एक अंतरराष्ट्रीय शहर बनाने का प्रस्ताव था. यहूदी नेताओं ने इस प्रस्ताव को मान लिया, लेकिन अरब नेताओं को ये मंजूर नहीं थी.
इजरायल का गठन और अरब-इजरायल युद्ध
1948 में इजरायल नया देश बन गया. इसके अगले ही दिन अरब ने इजरायल पर हमला कर दिया. लगभग एक साल बाद 1949 में ये युद्ध खत्म हुआ. नतीजतन, इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र की प्रस्तावित सीमाओं से परे अपने सीमाओं का विस्तार कर लिया. युद्ध के दौरान हजारों फिलिस्तीनी या तो भाग गए या फिर भगा दिए गए. इस घटना को 'नकबा' कहा जाता है.
1967 की छह दिन की जंग
1967 में इजराइल ने मिस्र पर हमला किया. इससे मिस्र, जॉर्डन और सीरिया के साथ छह दिन का युद्ध हुआ. इजराइल ने मिस्र से गाजा पट्टी और सिनाई प्रायद्वीप, जॉर्डन से वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम और सीरिया से गोलान हाइट्स को जीत लिया. कैंप डेविड समझौते के बाद 1982 में सिनाई को मिस्र को वापस कर दिया गया.
ओस्लो समझौता
ओस्लो समझौता इजरायल और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (पीएलओ) के बीच समझौतों में से एक था. समझौते के तहत फिलिस्तीनी अथॉरिटी का गठन हुआ और पीएलओ ने इजरायल को मान्यता दे दी. इस समझौते ने वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में कुछ इलाकों में फिलिस्तीनी नियंत्रण को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी.
इजरायल की अवैध बस्तियां!
इजरायली सेनाएं अपनी बस्तियां छोड़कर गाजा पट्टी से एकतरफा हट तो गईं. लेकिन संयुक्त राष्ट्र अभी भी गाजा पट्टी पर इजरायल का नियंत्रण मानता है. वो इसलिए क्योंकि इजरायल पट्टी से बाहर जाने और अंदर आने वाली हर चीज पर नियंत्रण रखता है. चाहे वो बिजली हो, खाना हो या पानी हो. वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों का निर्माण विवाद का मुद्दा रहा है. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इन बस्तियों को अवैध माना जाता है.
येरूशलम की स्थिति
येरूशल यहूदियों, मुस्लिमों और ईसाइयों... तीनों के लिए पवित्र माना जाता है. इस साल रमजान की शुरुआत में दमिश्क गेट के एंट्री गेट को बाड़ लगाकर बंद कर दिया गया था.
अप्रैल में इजरायली पुलिस ने अल-अक्सा मस्जिद के पास कथित तौर पर एक 26 वर्षीय फिलिस्तीनी नागरिक को मार डाला था. दरअसल, इजरायली पुलिस और फिलिस्तीनियों के बीच झड़पें हुई थीं. फिलिस्तीनी नागरिक मस्जिद में घुस आए थे. इस दौरान 400 फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया था.
हालात तब और बिगड़े जब इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बैन गाविर ने अल-अक्सा परिसर का दौरा किया. इस दौरे को फिलिस्तीन, मिस्र और जॉर्डन ने उकसावा भरा बताया. अमेरिका ने भी इसकी निंदा की.
पूर्वी येरूशलम के ठीक उत्तर में शेख जर्राह है. इजरायली पुलिस ने यहां से फिलिस्तीनी परिवारों को बेदखल कर दिया था. मामला इजरायल की सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. अदालत ने फैसले में यहां पर इजरायली बस्तियों को बसाने का आदेश दिया. इसे लेकर काफी विरोध प्रदर्शन भी हुए.
इजरायल की नीतियां अक्सर विवादों में रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ये हमला गेमचेंजर साबित हो सकता है. इतना ही नहीं, इससे हाल ही में हुए इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर पर भी संकट खड़ा हो सकता है.
हमास और गाजा पट्टी
365 वर्ग किलोमीटर में फैली गाजा पट्टी में लगभग 22 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं. इजरायल दावा करता है कि गाजा पट्टी पर हमास का नियंत्रण है. जबकि, यहां रहने वाले फिलिस्तीनी इजरायल पर निर्भर हैं.
हमास को इजरायल आतंकी संगठन मानता है. हमास अल-अक्सा, शेख जर्राह और रिफ्यूजी कैम्प में इजरायली सुरक्षाबलों की कार्रवाई को लेकर चेतावनी देता रहा है.
मई 2022 में फिलिस्तीनी-अमेरिकी पत्रकार शिरिन अबू अकलेह की रिपोर्टिंग के दौरान हत्या कर दी गई थी. पत्रकारों की सुरक्षा समिति ने दावा किया कि उनकी हत्या एक लंबे घातक पैटर्न का हिस्सा थी.
फिलहाल, इजरायल के साझेदार खासतौर पर अमेरिका हमास के खिलाफ जंग लड़ने के लिए उसे सैन्य मदद भेज रहे हैं. लेकिन सीजफायर को लेकर बात करनी होगी, क्योंकि गाजा में आम नागरिक हताहत होने लगे हैं.
संयुक्त राष्ट्र, मिस्र और कतर मध्यस्थता कराने में जुट गए हैं. लेकिन आखिरकार बेंजामिन नेतन्याहू को फैसला करना होगा. नेतन्याहू अपनी नजर में अब तक के सबसे खराब हमले का सामना कर रहे हैं और अगर उन्होंने इसका बदला लिया नहीं लिया तो इससे उनपर राजनीतिक पतन का खतरा होगा.