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कीचड़ में दौड़ से लेकर 8 सेकंड में पैराशूट खोलने तक, कौन हैं MARCOS कमांडो, जो दुनिया की सबसे घातक फोर्स कहलाते हैं

कश्मीर में सुरक्षाबलों और टैररिस्ट्स के बीच आर-पार में कई आतंकी मारे गए, लेकिन कई अब भी सुरक्षित ठिकानों पर छिपे हुए हमला कर रहे हैं. इनसे निपटने के लिए अब आर्मी के साथ CRPF के कोबरा (CoBRA) कमांडो भी काम करेंगे. घने जंगलों में काम कर सकने वाले ये कमांडो बहुत ताकतवर माने जाते हैं, लेकिन मार्कोस (MARCOS) का नाम दुनिया के सबसे घातक कमांडोज में शामिल है.

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मार्कोस कमांडोज को कई मामलों में अमेरिकी नेवी सील से भी खतरनाक पाया गया. सांकेतिक फोटो (PTI)
मार्कोस कमांडोज को कई मामलों में अमेरिकी नेवी सील से भी खतरनाक पाया गया. सांकेतिक फोटो (PTI)

मार्कोस कमांडो इंडियन नेवी की एक स्पेशल फोर्स है, जिसका पूरा नाम मरीन कमांडोज है. इन्हें भारत ही नहीं, दुनिया के सबसे ताकतवर और खतरनाक फोर्सेस में गिना जाता है. वैसे तो इन्हें खासतौर पर पानी में जंग के लिए ट्रेनिंग मिलती है, लेकिन समुद्र के अलावा ये जमीन, पहाड़ों और हवा में विपरीत मौसम के बीच भी उतनी ही आसानी से लड़ाई कर पाते हैं. 

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नेवी की इस विंग का क्या है इतिहास 

देश आजाद तो हो गया, लेकिन उसके आसपास कई दुश्मन खड़े हो चुके थे. खासकर समुद्र के रास्ते में कई संदिग्ध चीजें दिखने लगीं, जैसे जासूसों का पानी के रास्ते देश की सीमा में घुसपैठ करना, या फिर समुद्र के रास्ते पर ही कब्जे की कोशिश. इसे देखते हुए नेवी की एक खास यूनिट बनी, जिसे नाम मिला इंडियन मरीन स्पेशल फोर्सेज, यही आगे चलकर मार्कोज कहलाया. 

कैसे चुना जाता है इन कमांडोज को

MARCOS के कमांडो का चयन आसानी से नहीं होता. इसके लिए इंडियन नेवी में काम कर रहे 20 साल की उम्र के उन लोगों को लिया जाता है, जो बेहद मुश्किल हालातों में खुद को साबित कर चुके हों. स्क्रीनिंग के दौरान ही 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग बाहर हो जाते हैं. इसके बाद सेकंड राउंड में 10 हफ्तों का टेस्ट होता है, जिसे इनिशियल क्वालिफिकेशन ट्रेनिंग कहते हैं. 

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jammu kashmir encounter deployed cobra commandos and who is most dangerous commando marcos photo PTI

इसमें ट्रेनी को रात जागने, बगैर खाए-पिए कई दिनों तक एक्टिव रहने का प्रशिक्षण मिलता है. लगातार दिनों तक दो-तीन घंटों की नींद के साथ काम करना पड़ता है. बचे हुए 20 फीसदी लोगों में से बहुत से इस प्रोसेस में ही पस्त हो जाते हैं और बाहर हो जाते हैं. 

ऐसी होती है एडवांस ट्रेनिंग

इसके बाद असल ट्रेनिंग शुरू होती है, जो लगभग 3 सालों तक चलती है. इसमें 30 किलो तक का वजन उठाकर पानी और दलदली जमीन में भागना होता है. जमा देने वाले ठंडे पानी में तैरते हुए दुश्मन से लड़ाई भी होती है और पहाड़ों पर भी अभ्यास होता है. जमीन, पानी के अलावा हवा में भी इन्हें लड़ाई की पक्की ट्रेनिंग मिलती है. 

बेहद ऊंचाई से जमीन पर छलांग लगाना

इस सारी ट्रेनिंग का शायद सबसे मुश्किल हिस्सा है- हालो और हाहो का प्रशिक्षण. हालो जंप के तहत कमांडो को करीब 11 किलोमीटर की ऊंचाई से छलांग लगानी होती है. वहीं हाहो में 8 किलोमीटर की ऊंचाई से कूदना होता है. इसमें एक पैराशूट तो होता है लेकिन शर्त होती है कि उसे 8 सेकंड के भीतर ही खोल लिया जाए. जो भी इससे ज्यादा वक्त ले, उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है. 

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jammu kashmir encounter deployed cobra commandos and who is most dangerous commando marcos photo Unsplash

मॉर्डन से लेकर ट्रेडिशनल हथियार चलाने की ट्रेनिंग

इसमें चाकू, तलवार, धनुष, लाठी चलाने के अलावा ये भी सीखना होता है कि खाली हाथों से दुश्मन को कैसे चित्त करें. इसके साथ-साथ मानसिक ट्रेनिंग भी चलती रहती है. अगर किसी ऑपरेशन के दौरान आसपास ज्यादातर साथी खत्म हो जाएं तो क्या करना है, या फिर कैसे जीवन का मोल भूलकर मिशन की कामयाबी पर फोकस करना है, ये सब सिखाया जाता है. कमांडो अगर जिंदा दुश्मनों के हाथ पड़ जाए तो बड़े से बड़ा टॉर्चर भी उसकी जबान न खोल सके, कुछ ऐसी ट्रेनिंग मिलती है. 

किस तरह के ऑपरेशन का हिस्सा बनते हैं

वैसे तो इनका असल काम समुद्र या पानी से जुड़े अभियानों में भाग लेना है, लेकिन इन्हें हर तरह की मुश्किल में जमकर लड़ाई करने का प्रशिक्षण मिलता है. जरुरत पड़ने पर ये आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, समुद्री डकैती, समुद्री घुसपैठ को रोकना, हवाई जहाज के अपहरण में लोगों को रेस्क्यू करना जैसे मिशन का हिस्सा भी बनते हैं. यहां तक कि अगर दुश्मन देश केमिकल अटैक कर दे तो उसे भी फेल करना मार्कोस को आता है. 

jammu kashmir encounter deployed cobra commandos and who is most dangerous commando marcos photo PTI

ये कमांडो खुफिया एजेंसी के साथ मिलकर खुफिया मिशन में भी भाग लेते रहे हैं. यही कारण है कि ट्रेनिंग के दौरान ही इनसे शपथ ले ली जाती है कि ये अपने परिवार को भी मार्कोस का हिस्सा होने की बात नहीं बताएंगे. 

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अब तक किन ऑपरेशनों में लिया है हिस्सा

- मालदीव में ऑपरेशन कैक्टस- इसके तहत कमांडोज ने मालदीव में सत्तापलट को रातोरात रोक दिया था, साथ ही बंधक बनाए गए लीडर्स और आम लोगों को छुड़ाया था. 

- ऑपरेशन ब्लैक टॉरनेडो- नवंबर 2008 को मुंबई अटैक के दौरान ये कमांडो ताज होटल में घुसे और आतंकियों को वहीं ढेर कर दिया. कसाब को छोड़कर बाकी सारे टैररिस्ट इसी दौरान मार दिए गए थे. 

- श्रीलंका में ऑपरेशन पवन- इस ऑपरेशन में मार्कोस कमांडो समंदर में करीब 10 किलोमीटर तक तैरकर गए. इस दौरान उनकी पीठ पर विस्फोटक लदा हुआ था. जाफना बंदरगाह पहुंचते ही उन्होंने पोर्ट को उड़ा दिया. तब ये बंदरगाह LTTE के कब्जे में था. 

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