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जम्मू कश्मीर से जुड़े दो बिल राज्यसभा से भी पास... जानें इससे कितनी बदल जाएगी घाटी

जम्मू कश्मीर से जुड़े दो बिल दोनों सदनों से पास हो गए हैं. ये बिल जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सीटें बढ़ाने, कश्मीरी प्रवासियों और पीओके से विस्थापितों के लिए सीटें रिजर्व करने और वंचित वर्ग को आरक्षण देने का प्रावधान करते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि इस बिल से नए और विकसित कश्मीर की शुरुआत हो गई है.

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जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो बिल दोनों सदनों से पास हो गए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो बिल दोनों सदनों से पास हो गए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

जम्मू-कश्मीर से जुड़े दो बिल सोमवार को राज्यसभा से पास हो गए. ये बिल लोकसभा से पहले ही पास हो चुके हैं. अब राष्ट्रपति के दस्तखत होते ही ये कानून बन जाएंगे. 

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सोमवार को इन बिलों को राज्यसभा में पेश करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इससे 'नए और विकसित कश्मीर' की शुरुआत हुई है, जो आतंकवाद से मुक्त होगा.

अमित शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े ये दो बिल बीते 75 साल से अपने अधिकारों से वंचित लोगों को न्याय देंगे. 

जो बिल पास हुए हैं, उनमें पहला है- जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन (अमेंडमेंट) बिल, जो वंचित और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है. जबकि, दूसरा- जम्मू-कश्मीर रिऑर्गेनाइजेशन (अमेंडमेंट) बिल, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कश्मीरी प्रवासियों और पीओके से विस्थापित लोगों के लिए सीट रिजर्व रखने का प्रावधान करता है.

दोनों बिल में क्या हैं प्रावधान?

जम्मू-कश्मीर रिऑर्गेनाइजेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2023

जम्मू में 6, कश्मीर में 1 सीट बढ़ेगी

ये बिल जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सीटें बढ़ाने का प्रावधान करेगा. लद्दाख के अलग होने के बाद जम्मू-कश्मीर में 83 सीटें बची थीं. बिल के कानून बनने के बाद 90 सीटें हो जाएंगी. जम्मू रीजन में 43 और कश्मीर रीजन में 47 सीटें होंगी.

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इन 90 सीटों के अलावा दो सीटें कश्मीरी प्रवासियों और एक सीट पीओके से विस्थापितों के लिए आरक्षित होगी. कश्मीरी प्रवासियों की दो में से एक सीट महिला के लिए होगी. कश्मीरी प्रवासी और विस्थापित नागरिकों को उपराज्यपाल नामित करेंगे. 

कश्मीरी प्रवासी उसे माना जाएगा, जिसने 1 नवंबर 1989 के बाद घाटी या जम्मू-कश्मीर के किसी भी हिस्से से पलायन किया हो और उसका नाम रिलीफ कमीशन में रजिस्टर हो.

इसके साथ ही अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 16 सीटें रिजर्व की हैं. इनमें से एससी के लिए 7 और एसटी के लिए 9 सीटें रखी गईं हैं.

पहले की तरह ही पीओके के लिए 24 सीटें होंगी. यहां चुनाव नहीं कराए जा सकेंगे. इस तरह से अब कुल मिलाकर 117 सीटें हो जाएंगी.

कहां-कहां बढ़ेंगी सीटें?

जम्मू रीजन में सांबा, कठुआ, राजौरी, किश्तवाड़, डोडा और उधमपुर में एक-एक सीट बढ़ाई गई है. वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में एक सीट बढ़ाई गई है. 

जम्मू के सांबा में रामगढ़, कठुआ में जसरोता, राजौरी में थन्नामंडी, किश्तवाड़ में पड्डेर-नागसेनी, डोडा में डोडा पश्चिम और उधमपुर में रामनगर सीट नई जोड़ी गईं हैं.

वहीं, कश्मीर रीजन में कुपवाड़ा जिले में ही एक सीट बढ़ाई गई है. कुपवाड़ा में त्रेहगाम नई सीट होगी. अब कुपवाड़ा में 5 की बजाय 6 सीटें होंगी.

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जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन (अमेंडमेंट) बिल, 2023 

ये बिल एससी-एसटी और सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का प्रावधान करता है. 

बिल के मुताबिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा उन्हें माना जाएगा, जिनके गांव एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास हैं और सरकार ने उन्हें पिछड़ा घोषित कर रखा है.

पर चुनाव कब तक होंगे?

जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे. यहां की 87 सीटों में से पीडीपी ने 28, बीजेपी ने 25, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीती थीं. बीजेपी और पीडीपी ने मिलकर सरकार बनाई और मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बने. 

जनवरी 2016 में मुफ्ती मोहम्मद सईद का निधन हो गया. करीब चार महीने तक राज्यपाल शासन लागू रहा. बाद में उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनीं. लेकिन ये गठबंधन ज्यादा नहीं चला. 19 जून 2018 को बीजेपी ने पीडीपी से गठबंधन तोड़ लिया. राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया. अभी वहां राष्ट्रपति शासन लागू है.

आर्टिकल-370 को हटाने के फैसले को बरकरार रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने का आदेश दिया है.

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