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अब पंजाब नहीं, देश के सबसे पढ़े-लिखे राज्य में फैल रहा नशा, क्या तटीय इलाका होने से बिगड़ी बात?

नशे की वजह से पंजाब को अब तक 'उड़ता पंजाब' कहा जाता रहा, लेकिन अब केरल इसे पीछे छोड़ रहा है. नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) एक्ट के तहत पिछले साल राज्य में ड्रग्स के लगभग 28 हजार केस मिले. पंजाब के मामलों से ये तीन गुना ज्यादा हैं. ड्रग सप्लाई के लिए कई नए तरीके इस्तेमाल हो रहे हैं ताकि पकड़े जाने का खतरा न रहे.

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केरल में नशे के मामले बढ़ते दिख रहे हैं. (Photo - Getty Images)
केरल में नशे के मामले बढ़ते दिख रहे हैं. (Photo - Getty Images)

केरल अक्सर पॉजिटिव वजहों से चर्चा में रहता आया लेकिन इस बार एकदम अलग बात उसे सुर्खियों में लाए हुए है. बीते तीन-चार सालों में वहां ड्रग्स के केस लगातार बढ़े. यहां तक कि केरल हाई कोर्ट को ड्रग माफिया पर चेतावनी देनी पड़ गई. पिछले महीने केरल विधानसभा में भी इसपर खूब गहमागहमी रही. लेकिन सवाल ये है कि सबसे पढ़े-लिखे राज्य का दर्जा पाए केरल में आखिर नशा क्यों बढ़ रहा है, और ये किन रास्तों से आता है?

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क्या कहता है डेटा

आंकड़ों में देखें तो केरल में ड्रग क्राइसिस पंजाब से ज्यादा हो चुकी. बता दें कि पंजाब को अब तक ड्रग एपिसेंटर माना जाता रहा, जहां पाकिस्तान सीमा से होते हुए नशे का लेनदेन होता रहा. अस्सी के दशक से ये चला आ रहा है. कुछ समय पहले इसमें हिमाचल और हरियाणा जैसे राज्यों का नाम भी आने लगा लेकिन केरल के बारे में ऐसी जानकारी चौंकाती है. 

होम मिनिस्ट्री ने खुद ये जानकारी साझा करते हुए बताया कि साल 2024 में NDPS एक्ट के तहत केरल से ड्रग्स के कुल 27701 केस आए. वहीं पंजाब से 9025 मामलों की जानकारी मिली. लोगों के हिसाब से देखा जाए तो पंजाब में हर लाख पर 30 केस हैं, जबकि केरल में हर एक लाख आबादी पर 78 केस आ रहे हैं. नशे का यह संकट तीन साल पहले साढ़े पांच हजार पर था, जो दो ही सालों में कई गुना बढ़ गया. पिछले पांच सालों में यहां 87000 से ज्यादा ड्रग-रिलेटेड मामले आए, यह बात खुद राज्य सरकार मान रही है. 

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kerala drug crisis surge amid narcotics cases in punjab photo Getty Images

केरल में नशीली दवाओं की तस्करी अलग-अलग रास्तों से हो रही है. पुराने तरीकों से अलग नशा अब हाइपरलोकल हो चुका, यानी एक बार में नशे की भारी खेप सप्लाई करने की बजाए लोकल संपर्क के जरिए छोटी-छोटी खेप आती-जाती रहती है. 

कौन से रास्ते और कैसे तरीके आजमाए जा रहे

हाल के सालों में ट्रेनों के जरिए नशीली दवाओं की तस्करी बढ़ी. साल 2024 में, केरल की ट्रेनों से लगभग 559 किलोग्राम मादक पदार्थ पकड़ाया, जिसकी अनुमानित कीमत तीन करोड़ थी. 2025 के पहले दो महीनों में ही, 421 किलो ऐसी दवाएं जब्त की गईं, जिनकी कीमत सवा दो करोड़ के करीब थी. जंगलों और नदियों जैसे ट्रैडिशनल तरीके तो इस्तेमाल होते ही हैं. साथ ही तस्कर अब डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग से भी लेनदेन कर रहे हैं ताकि पकड़ाई में आना काफी मुश्किल हो जाए. 

बाइक्स से हो रही होम डिलीवरी

फूड डिलीवरी की तर्ज पर नशे की भी डिलीवरी हो रही है, जिसमें यह तक देखा जाता है कि डिमांड के कितनी देर के भीतर सप्लाई होती है. ऑनमनोरमा के हवाले से इंडिया टुडे की रिपोर्ट कहती है कि इस काम में लगे ज्यादातर डिस्ट्रीब्यूटर्स 18 से 24 साल की उम्र के बीच हैं. डिलीवरी के लिए वे बाइक्स इस्तेमाल करते हैं, जिनके नंबर फेक होते हैं. पुलिस से बचने के लिए कई बार ये डिस्ट्रीब्यूटर कपल होने का दिखावा करते हैं ताकि देर रात आते-जाते पकड़े न जाएं. 

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पड़ोसी राज्यों जैसे तमिलनाडु और कर्नाटक के साथ सीमाएं भी तस्करी के लिए उपयोग की जाती हैं. तमिलनाडु-केरल सीमा से गांजा और मेथामफेटामाइन की तस्करी होती रही, जबकि कर्नाटक-केरल सीमा से हेरोइन और कोकीन की तस्करी की खबरें आ रही हैं. 

kerala drug crisis surge amid narcotics cases in punjab photo Unsplash

तटीय राज्य होने की वजह से केरल इंटरनेशनल ड्रग्स तस्करी के लिए एक एंट्री पॉइंट बन रहा है. यहां मोटे तौर पर तीन रास्तों से नशा आता है

- गोल्डन क्रिसेंट यानी अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान से हेरोइन और दूसरे सिंथेटिक ड्रग्स आ रहे हैं. 

- गोल्डन ट्राएंगल यानी म्यांमार, थाईलैंड और लाओस से मैथमफेटामाइन जैसा नशा एंट्री पा रहा है.

- श्रीलंका और मालदीव के जरिए भी ड्रग्स की तस्करी हो रही है. कई बार मछुआरों के जाल में भी ड्रग्स के पैकेट पकड़े जा चुके. 

क्यों बढ़ रहा नशा

इसकी एक बड़ी वजह है वहां हाई डिस्पोजेबल इनकम होना. यहां दूसरे कई राज्यों के मुकाबले प्रति व्यक्ति इनकम ज्यादा है. बहुत से लोग बाहर काम करते और पैसे भेजते हैं. इससे केरल में रहते टीन-एजर्स और युवाओं के पास खर्च करने को पैसे हैं. केरल का टूरिस्ट प्लेस होना भी ड्रग्स के आने का कारण बनता रहा. यहां हर साल भारी संख्या में देश के अलावा बाहरी टूरिस्ट भी आते हैं. चूंकि ये फ्लोटिंग क्राउड है इसलिए वो अपने रहते हुए नशे का जमकर इस्तेमाल करता है. देखादेखी ये आदत स्थानीय लोगों में भी फैलने लगी. कई पर्यटन स्थलों पर विदेशी नागरिक भी ड्रग सप्लाई में पकड़े गए. 

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रोकने के लिए क्या कर रही है सरकार 

केरल प्रशासन कई तरीके अपना रहा है. विजिलेंस कमेटी बनाई गई, जो अलग-अलग जिलों में नशे के पूरे कारोबार पर नजर रख रही है. इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार एक जिले में इन तक पहुंचाने के लिए दस हजार रुपए का इनाम भी रखा जा चुका. राज्य सरकार इसके लिए एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बना चुकी. अलग-अलग विभागों में ऐसे अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है, जहां ड्रग्स का कारोबार चलता है. इसके तहत साइबर सर्वेलांस एंड फॉरेंसिक एनालिसिस भी शामिल हैं. 

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