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केरल में हो रही मौतों के पीछे Nipah Virus! जानें- कितना खतरनाक है ये वायरस? शरीर को कैसे पहुंचाता है नुकसान

माना जा रहा है कि केरल में निपाह वायरस ने एक बार फिर दस्तक दे दी है. केरल के कोझिकोड जिले में दो लोगों की मौत हुई है. आशंका है कि निपाह वायरस से इनकी मौत हुई है. ऐसे में जानते हैं कि निपाह वायरस क्या है? ये कितना खतरनाक है? और इससे कैसे बचा जा सकता है?

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चमगादड़ को निपाह वायरस का मेन सोर्स माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
चमगादड़ को निपाह वायरस का मेन सोर्स माना जाता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Nipah Virus: दक्षिणी राज्य केरल में एक बार फिर निपाह वायरस फैलने की खबर है. कोझिकोड जिले में बुखार से दो मरीजों की मौत के बाद 

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दक्षिणी राज्य केरल में एक बार फिर निपाह वायरस फैलने की आशंका है. कोझिकोड जिले में बुखार से दो मरीजों की मौत हुई है. ऐसी आशंका है कि निपाह वायरस से दोनों मरीजों की मौत हुई है.

दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है. स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने सोमवार को हाईलेवल मीटिंग की और हालात का जायजा लिया. ये दोनों मौतें एक निजी अस्पताल में हुई हैं और निपाह वायरस को इसकी वजह माना जा रहा है.

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मरने वालों में से एक के रिश्तेदार की हालत भी गंभीर है और उसे आईसीयू में एडमिट किया गया है.

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर

बुखार से दो मौतें होने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है. स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि निगरानी शुरू कर दी है और मृतकों के सैम्पल जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के पास भेज दिए गए हैं.

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उन्होंने बताया कि मृतकों के रिश्तेदार भी अस्पताल में भर्ती हैं. उन्होंने बताया कि एक 9 साल और एक 4 साल की बच्चे की मौत हुई है. इन दोनों के रिश्तेदार निजी अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं.

उन्होंने ये भी बताया कि जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट पर रहने को कहा गया है. साथ ही कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में आइसोलेशन फैसिलिटी बनाने का आदेश भी दिया गया है.

फिलहाल दोनों मृतकों के शवों को मॉर्चुरी में रखा गया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

जानवरों से फैलता है निपाह वायरस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है. यानी ये जानवरों के जरिए इंसानों में फैलता है. कई बार ये खाने-पीने के जरिए और इंसान से इंसान में भी फैल सकता है. 

निपाह का सबसे पहला मामला 1999 में मलेशिया के एक गांव सुनगई निपाह में सामने आया था. इसी कारण इस वायरस का नाम निपाह रखा गया है.

कैसे फैलता है ये वायरस?

कई वायरस की तरह ही निपाह का सोर्स भी जानवर को ही माना जाता है. माना जाता है कि चमगादड़ के जरिए ये वायरस इंसानों तक फैलता है. हालांकि, ऐसा भी मानना है कि ये सुअर, कुत्ते, बिल्ली, घोड़े और संभवतः भेड़ से भी फैल सकता है.

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अगर निपाह वायरस से कोई व्यक्ति संक्रमित हो गया है तो वो दूसरों को भी संक्रमित कर सकता है. मतलब, एक की वजह से दूसरे लोग भी संक्रमित हो सकते हैं.

कितना खतरनाक है निपाह वायरस?

निपाह वायरस को कम संक्रामक लेकिन ज्यादा घातक माना जाता है. इसका मतलब हुआ कि इससे संक्रमित तो कम लोग हो सकते हैं, लेकिन मृत्यु दर ज्यादा होती है. केरल में जब एक बार निपाह वायरस फैला था तो इसकी मृत्यु दर 45 से 70 फीसदी तक थी.

इतना ही नहीं, अगर किसी शख्स की निपाह वायरस से मौत हुई है तो उस परिवार के दूसरे सदस्य भी इससे संक्रमित हो सकते हैं. ऐसे में निपाह संक्रमित व्यक्ति का अंतिम संस्कार करते समय खास सावधानी बरतनी जरूरी होती है.

निपाह वायरस के लक्षण क्या हैं? 

अगर कोई भी शख्स निपाह वायरस से संक्रमित होगा तो उसमें तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ,गले में खराश, एटिपिकल निमोनिया जैसे लक्षण दिखाई पड़ेंगे. 

वहीं अगर स्थिति ज्यादा गंभीर रही तो इंसान इन्सेफेलाइटिस का भी शिकार हो सकता है और 24 से 48 घंटे में कोमा में जा सकता है. 

निपाह वायरस के लक्षण किसी भी इंसान में 5 से 14 दिन के भीतर दिख सकते हैं. लेकिन कुछ मामलों में ये 45 दिनों तक खिंच सकता है. ये वायरस से जुड़ा सबसे खतरनाक पहलू है क्योंकि आपको पता भी नहीं चलेगा और आप कई दूसरे लोगों को इस वायरस से संक्रमित कर देंगे. 

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कुछ मामले ऐसे भी हो सकते हैं जहां पर व्यक्ति निपाह से संक्रमित हो, लेकिन उसमें कोई लक्षण दिखाई ना पड़े.

इसका इलाज क्या है?

निपाह का पहला मामला 1999 में देखने को मिला था लेकिन अबतक ना तो उसके इलाज की कोई दवा है ना उसकी रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन. 

अभी के लिए निपाह का इलाज सिर्फ और सिर्फ सावधानी ही है. अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो इस वायरस की चपेट में आने से बचा जा सकता है. 

चमगादड़ और सूअर के संपर्क में आने से बचें, जमीन या फिर सीधे पेड़ से गिरे फल ना खाएं, मास्क लगाकर रखें और समय-समय पर हाथ धोते रहें. वहीं अगर कोई भी लक्षण दिखाई पड़े तो सीधे डॉक्टर से संपर्क साधें.

इनपुटः शिबी
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