
पहले कुछ लोगों को रेलवे में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया. फिर उनके परिवार से जमीनें ली गईं. कुछ जमीनों का सौदा नकद में हुआ तो कुछ गिफ्ट डीड के तौर पर ली गईं. जमीनें मिलने के बाद उन लोगों को रेलवे में रेगुलर कर दिया गया. और ये सब हुआ 2004 से 2009 के बीच. उस समय जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री हुआ करते थे. बस इतनी सी कहानी है लैंड फॉर जॉब स्कैम यानी जमीन के बदले नौकरी घोटाले की.
इस जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दो बेटियां- मीसा भारती और हेमा यादव तो पहले ही फंसी हुई थीं. और अब उनके बड़े बेटे और बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी फंस गए हैं.
इस घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने सोमवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दूसरी चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस चार्जशीट में लालू यादव और राबड़ी देवी को तो आरोपी बनाया ही है. साथ ही इस बार तेजस्वी यादव का नाम भी लिया गया है. ये पहली बार है जब तेजस्वी यादव को सीबीआई ने इस घोटाले में आरोपी बनाया है.
इस मामले में सीबीआई ने पिछले साल 18 मई को केस दर्ज किया था. सीबीआई के मुताबिक, लोगों को पहले रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया और जब उनके परिवार ने जमीन का सौदा किया तो उन्हें रेगुलर कर दिया गया.
सीबीआई ने किन-किनको आरोपी बनाया?
- सीबीआई की दूसरी चार्जशीट में लालू परिवार के अलावा रेलवे से जुड़े पूर्व अफसरों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है.
- चार्जशीट में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव को आरोपी बनाया गया है.
- इनके अलावा पश्चिम मध्य रेलवे के पूर्व जीएम महीप कुमार, पूर्व सीपीओ मनोज पांडे और पीएल बनकर भी आरोप हैं.
- साथ ही दिलचंद कुमार, ज्ञानचंद राय, हजारी राय, महेश सिंह, मोहम्मद धानिफ अंसारी, शत्रुधन राय, विश्वकर्मा राय, अशोक कुमार यादव, रामबृक्ष यादव और राजनाथ सिंह के अलावा एके इन्फोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड का नाम भी चार्जशीट में है.
चार्जशीट में क्या आरोप लगाए गए?
- आरोप लगाया गया है कि 2004 से 2009 के बीच लालू यादव जब रेल मंत्री थे, तो उन्होंने लोगों को रेलवे में ग्रुप डी में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती करने के बदले जमीनें लीं. ये जमीनें लालू यादव ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर लीं.
- आरोप ये भी लगाया गया है कि बिहार के पटना के रहने वाले इन लोगों ने अपनी जमीनें लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनके सदस्यों के कंट्रोल वाली एक निजी कंपनी को बेच दी या गिफ्ट में दे दी.
- चार्जशीट में सीबीआई ने बताया कि जांच के दौरान सामने आया कि जोनल रेलवे में सब्स्टिट्यूट की भर्ती के लिए कोई एडवर्टाइजमेंट या पब्लिक नोटिस जारी नहीं किया गया था. फिर भी पटना के रहने वाले इन लोगों को मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नियुक्त किया गया.
- सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान एक हार्डडिस्क भी बरामद की गई, जिसमें उन उम्मीदवारों के नाम थे, जिन्हें नौकरी पर रखा गया.
तेजस्वी यादव पर क्या आरोप?
- सीबीआई का आरोप है कि 2007 में 10.83 लाख रुपये में एक जमीन खरीदी गई. ये जमीन एके इन्फोसिस्टम के नाम पर खरीदी गई थी.
- बाद में इस जमीन के साथ ही एक और जमीन एके इन्फोसिस्टम के नाम पर खरीदी गई. बाद में इस कंपनी का मालिकाना हक मात्र एक लाख रुपये की कीमत पर तेजस्वी यादव और उनकी मां राबड़ी देवी को सौंप दिया गया.
- सीबीआई के मुताबिक, जिस समय कंपनी की ओनरशिप ट्रांसफर की गई, उस समय कंपनी के पास करीब 1.77 करोड़ रुपये की कीमत की जमीन थी और इसे सिर्फ एक लाख रुपये में ट्रांसफर कर दिया है. जबकि, जमीन की मार्केट वैल्यू इससे कहीं ज्यादा थी.
- सीबीआई का आरोप है कि इन लैंड पार्सल की खरीद के लिए भुगतान ज्यादातर कैश में ही दिखाया गया है. जबकि, कई जमीनों का सौदा गिफ्ट डीड के तौर पर भी किया गया था. लैंड पार्सल यानी जमीन के छोटे टुकड़े.
- एजेंसी ने ये भी आरोप लगाया कि पटना में 1.05 लाख वर्ग फीट का एक प्लॉट लालू यादव के परिवार के सदस्यों ने नकद भुगतान करके खरीदा था.
लालू परिवार पर और क्या हैं आरोप?
- सीबीआई की पहली चार्जशीट के मुताबिक, जिन उम्मीदवारों को नौकरी दी गई, उनके या उनके परिवार के सदस्यों ने तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों को मार्केट रेट से काफी कम कीमत में जमीन बेची. ये राशि बाजार कीमत से 1/4 या 1/5 थी.
- लालू परिवार पर आरोप है उन्होंने पांच जमीनें नकद खरीदी थीं, जबकि दो गिफ्ट डीड में मिलीं. ये जमीनें काफी कम दामों में बेची गई. सीबीआई के मुताबिक, मौजूदा सर्कल रेट के हिसाब से इनकी कीमत 4.39 करोड़ रुपये थी.
- इतना ही नहीं, सीबीआई ने चार्जशीट में दावा किया है कि रेलवे के मानदंडों, दिशा-निर्देशों और प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए उम्मीदवारों की अनियमित और अवैध नियुक्तियां की गईं.
कब हुआ ये सारा खेल?
- 2004 से 2009 में केंद्र में यूपीए सरकार थी. उस सरकार में लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थी. जमीन के बदले नौकरी का ये सारा खेल उसी दौरान हुआ.
- सीबीआई ने इस मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा यादव और हेमा यादव समेत कुछ उम्मीदवारों को भी आरोपी बनाया है..
- सीबीआई का आरोप है कि लालू प्रसाद यादव जब रेल मंत्री थे, तब उन्होंने ग्रुप डी में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती के बदले जमीनें लीं और इन्हें अपने परिवार के नाम पर खरीदा गया.
- सीबीआई ने आरोप लगाया है कि लालू यादव जब रेल मंत्री थे, तो उन्होंने जमीन के बदले सात अयोग्य उम्मीदवारों को रेलवे में नौकरी दी.
क्या-क्या डील हुईं?
# डील 1: सीबीआई ने शुरुआती जांच में पाया था कि 6 फरवरी 2008 को पटना के रहने वाले किशुन देव राव ने अपनी 3,375 वर्ग फीट की जमीन राबड़ी देवी के नाम पर की थी. ये जमीन 3.75 लाख रुपये में बेची गई. उसी साल राव के परिवार के तीन सदस्यों राज कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार को मुंबई में ग्रुप डी में भर्ती किया गया.
# डील 2: नवंबर 2007 में पटना की रहने वालीं किरण देवी ने अपनी 80,905 वर्ग फीट की जमीन लालू यादव की बेटी मीसा के नाम पर कर दी. ये सौदा 3.70 लाख रुपये में हुआ. बाद में उनके बेटे अभिषेक कुमार को मुंबई में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया
# डील 3: मार्च 2008 में ब्रज नंदन राय ने 3,375 वर्ग फीट की जमीन गोपालगंज के रहने वाले ह्रदयानंद चौधरी को 4.21 लाख रुपये में बेच दी. ह्रदयानंद चौधरी को 2005 में हाजीपुर में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया था. बाद में ह्रदयानंद चौधरी ने ये जमीन तोहफे में लालू यादव की बेटी हेमा के नाम पर कर दी. सीबीआई ने जांच में ह्रदयानंद चौधरी लालू यादव का रिश्तेदार नहीं था और जिस समय ये जमीन दी गई, उस समय उसकी कीमत 62 लाख रुपये थी.
#डील 4: पटना के महुआबाग में रहने वाले संजय राय ने फरवरी 2008 में 3,375 वर्ग फीट का प्लॉट राबड़ी देवी को बेच दिया था. ये डील 3.75 लाख रुपये में हुई थी. सीबीआई ने जांच में पाया कि इसके बदले संजय राय और उनके परिवार के दो सदस्यों को रेलवे में नौकरी दी गई.
#डील 5: पटना के रहने वाले हजारी राय ने फरवरी 2007 में 9,527 वर्ग फीट जमीन एके इन्फोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी. जमीन की बिक्री 10.83 लाख रुपये में हुई. बाद में हजारी राय के दो भतीजों दिलचंद कुमार और प्रेमचंद कुमार को रेलवे में नौकरी मिली. जांच में सामने आया कि 2014 में एके इन्फोसिस्टम की सारी संपत्तियां और अधिकार राबड़ी देवी और मीसा भारती के पास चले गए. 2014 में राबड़ी देवी ने इस कंपनी के ज्यादातर शेयर खरीद लिए और डायरेक्टर बन गईं.
#डील 6: मई 2015 में पटना के रहने वाले लाल बाबू राय ने 13 लाख रुपये में 1,360 वर्ग फीट की जमीन राबड़ी देवी को बेच दी थी. सीबीआई की जांच में सामने आया कि 2006 में लाल बाबू राय के बेटे लाल चंद कुमार को रेलवे में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया था.
#डील 7: मार्च 2008 में विशुन देव राय ने अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन सिवान के रहने वाले ललन चौधरी को बेच दी. उसी साल ललन के पोते पिंटू कुमार को पश्चिमी रेलवे में सब्स्टीट्यूट के तौर पर भर्ती किया गया. इसके बाद फरवरी 2014 में ललन ने ये जमीन लालू यादव की बेटी हेमा यादव को दे दी.