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कांग्रेस के घोषणापत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी दो दिन से चर्चा में है. उन्होंने रविवार को राजस्थान के बांसवाड़ा में कहा था कि अगर कांग्रेस की सरकार आई तो वो लोगों की संपत्तियां लेकर ज्यादा बच्चों वालों और घुसपैठियों में बांट देगी.
पीएम मोदी ने कहा था, 'ये कांग्रेस का मेनिफेस्टो कह रहा है कि वो मां-बहनों के गोल्ड का हिसाब रखेंगे. उसकी जानकारी लेंगे और फिर उसे बांट देंगे. और उनको बांटेंगे जिनको मनमोहन सिंह की सरकार ने कहा था संपत्ति पर पहला अधिकार मुसलमानों का है. भाइयो-बहनो, ये अर्बन नक्सल की सोच, मेरी मां-बहनों, ये आपका मंगलसूत्र भी नहीं बचने देंगे. ये यहां तक आ जाएंगे.'
हालांकि, कांग्रेस के घोषणापत्र में संपत्ति लेकर उसे बांटने का वादा नहीं मिलता है. लेकिन राहुल गांधी ने कहा था कि अगर कांग्रेस की सरकार बनने के बाद फाइनेंशियल और इंस्टीट्यूशनल सर्वे कराया जाएगा और पता लगाया जाएगा कि हिंदुस्तान का धन किसके हाथों में है. उन्होंने कहा था कि जो आपका हक बनता है, वो हम आपको देने का काम करेंगे.
ऐसे में जब संपत्ति की बात चल रही है तो जान लेते हैं कि हिंदुस्तानियों के पास कितनी संपत्ति है? इसे लेकर कई आंकड़े हैं. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत की 20 फीसदी आबादी ही सबसे अमीर है. जबकि, अंतर्राष्ट्रीय संस्था के आंकड़े बताते हैं कि 1% भारतीयों का देश की 40% से ज्यादा संपत्ति पर कब्जा है.
कितने अमीर हैं भारतीय?
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) ने संपत्ति के आधार पर पांच हिस्से तय किए हैं. इनमें सबसे गरीब, गरीब, मिडिल, अमीर और सबसे अमीर है.
इस सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, शहरी इलाकों की लगभग 46 फीसदी आबादी 'सबसे अमीर' है. वहीं, गांवों की महज 8 फीसदी आबादी ही 'सबसे अमीर' की कैटेगरी में शामिल है.
सर्वे से पता चलता है कि चंडीगढ़ में भारत के सबसे अमीर लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है. यहां की 79 फीसदी आबादी के पास सबसे ज्यादा संपत्ति है. इसके बाद दिल्ली (68%) और फिर हरियाणा (48%) है.
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हिंदू या मुसलमान... कौन ज्यादा अमीर?
एनएफएचएस के आंकड़े बताते हैं कि हिंदू और मुसलमानों में संपत्ति का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है. दोनों ही धर्मों की लगभग 20 फीसदी आबादी 'सबसे गरीब' है. जबकि, 19 फीसदी आबादी 'सबसे अमीर' है.
धर्म के आधार पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा संपत्ति के मालिक जैन हैं. जैन धर्म को मानने वाले 80 फीसदी से ज्यादा लोग 'सबसे अमीर' है. दूसरे नंबर पर सिख हैं, जिनकी करीब 59 फीसदी आबादी 'सबसे अमीर' लोगों में शामिल है. जबकि, तीसरे नंबर पर ईसाई (26% आबादी) आते हैं.
इसी तरह अनुसूचित जाति (एससी) की महज 12 फीसदी आबादी ही 'सबसे अमीर' की कैटेगरी में आती है. जबकि, अनुसूचित जनजाति (एसटी) की 6 फीसदी से भी कम आबादी ऐसी है, जो भारत के 'सबसे अमीर' लोगों में आती है.
75% आबादी के पास एसी-कूलर तक नहीं
दूसरी ओर, NFHS-5 का सर्वे ये भी बताता है कि आज भी भारत की एक बड़ी आबादी ऐसी है, जिसके पास जरूरी सामान तक नहीं है.
इस सर्वे के मुताबिक, 30 फीसदी आबादी के पास प्रेशर कुकर भी नहीं है. वहीं, 15 फीसदी आबादी के पास कुर्सी और 40 फीसदी आबादी के पास टेबल भी नहीं है.
इतना ही नहीं, 30 फीसदी से ज्यादा आबादी ऐसी है, जिसके पास कोई टीवी नहीं है. लगभग 75 फीसदी आबादी के पास न एसी है और न ही कूलर. जबकि, 22 फीसदी लोग तो ऐसे हैं जिनके पास कोई घड़ी तक नहीं है.
दूसरी ओर... 40% संपत्ति पर 1% का हक
ऑक्सफैम की रिपोर्ट बताती है कि भारत की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी पर महज 1 फीसदी लोगों का हक है.
ये रिपोर्ट पिछले साल जनवरी में आई थी. इसमें दावा किया गया था कि भारत की 40.5% संपत्ति के मालिक देश के 1% सबसे अमीर लोग हैं.
रिपोर्ट में कहा गया था कि दुर्भाग्य से भारत सिर्फ अमीर लोगों का देश बनता जा रहा है. जबकि दलित, आदिवासी, मुस्लिम, महिलाएं और मजदूर लगातार पीड़ित हो रहे हैं और इस कारण अमीर और अमीर होते जा रहे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया था कि कॉर्पोरेट टैक्स में कमी और टैक्स में छूट देकर अमीरों को फायदा पहुंचाया जा रहा है. दूसरी तरफ, गरीब और मिडिल क्लास सबसे ज्यादा टैक्स भर रहा है. 2022 में लगभग 64 फीसदी जीएसटी देश की सबसे कम कमाने वाली 50 फीसदी आबादी से मिला था. जबकि, सबसे अमीर 10 फीसदी लोगों से महज 4 फीसदी जीएसटी आया था.