पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी एक नई मुसीबत में घिरती नजर आ रही हैं. बॉम्बे हाई कोर्ट ने राष्ट्रगान के कथित अपमान के मामले में उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया है. इसी के साथ ही पुलिस को मामले की जांच कर 28 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दे दिया गया है. आखिर वह कौन सा नियम है, जिसके तहत एक सीएम पर केस दर्ज कराया गया है? अगर ममता बनर्जी पर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो उन्हें किस तरह की सजा का सामना करना पड़ेगा? क्या राहुल गांधी की तरह उन पर भी सदस्यता गंवाने का खतरा मंडरा सकता है? आइए हम एक-एक करके इन तमाम सवालों के जवाब जानते हैं.
सबसे पहले ममता पर क्या हैं आरोप
मुंबई के स्थानीय बीजेपी पदाधिकारी विवेकानंद गुप्ता ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में एक शिकायत दायर की है. इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2021 को यशवंतराव चव्हाण ऑडिटोरियम में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें ममता बनर्जी बतौर गेस्ट शामिल हुई थीं. कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान बजाया गया लेकिन ममता खड़े होने के बजाय बैठी रहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि ममता ने राष्ट्रगान का कुछ हिस्सा बैठकर गाया फिर अचानक खड़ी हुईं और राष्ट्रगान की कुछ पंक्तियां गाकर कार्यक्रम से चली गईं.
मामला कैसे पहुंचा हाई कोर्ट
बीजेपी नेता की शिकायत पर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मार्च 2022 को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम-1971 की धारा-3 के तहत मामले में सुनवाई प्रक्रिया शुरू की और ममता को समन जारी कर दिया. ममता ने समन को सेशंस कोर्ट में चुनौती दे दी. उन्होंने कोर्ट से सीआरपीसी की धारा-482 के तहत शिकायत ही रद्द करने की मांग कर दी.
कोर्ट ने समन तो खारिज कर दिया लेकिन शिकायत रद्द नहीं की और मजिस्ट्रेट से बीजेपी नेता की शिकायत पर नए सिरे से विचार करने का आदेश दे दिया. ममता को जब यहां से राहत नहीं मिली तो वह हाई कोर्ट पहुंच गईं. हाई कोर्ट ने उनकी मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया- "मेरी राय में सत्र न्यायाधीश द्वारा मैरिट के आधार पर मामले का फैसला न करना और मामले को वापस भेजना सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत है, इसलिए किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है". कोर्ट के इस फैसले के बाद मुंबई की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (सेवरी कोर्ट) पी. आई मोकाशी ने पुलिस को जांच के आदेश दे दिए.
वह नियम जिसके तहत दर्ज हुआ केस
सीएम ममता बनर्जी पर राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम-1971 की धारा-3 के तहत केस दर्ज किया गया है. गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक-
1) कोई भी व्यक्ति अगर जानबूझकर भारतीय राष्ट्रीय गान को गाए जाने से रोकता है या ऐसा गायन कर रही किसी भी सभा में रुकावट पैदा करता है तो उसे तीन साल तक जेल या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा.
2) इसके अलावा अधिनियम की धारा 3 (क) में अपराध को कई बार करने पर भी दंड का प्रावधान किया गया है. इसके तहत- जो कोई व्यक्ति, जिसे धारा-2 या धारा-3 के अंतर्गत किसी अपराध के लिए पहले ही दोषी ठहराया गया हो, ऐसे किसी भी अपराध के लिए फिर से दोषी पाए जाने पर उसे दूसरी बार या उससे बाद भी दोहराने पर हर बार के अपराध के लिए कम से कम एक साल कैद की सजा होगी.
अगर ममता दोषी पाई गईं तो क्या होगा
ममता बनर्जी पर लगे आरोप पुलिस जांच में अगर सही पाए जाते हैं तो कोर्ट में इस मामले में सुनवाई शुरू होगी. ममता बनर्जी को अपना पक्ष रखने मौके दिए जाएंगे. दलीलों को सुनने के बाद अगर जज उन्हें दोषी मानते हैं तो नियम के तहत उन्हें तीन साल तक जेल या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है.
दोषी पाए जाने पर राहुल गांधी की तरह उन पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 (3) के तहत कार्रवाई हो सकती है. इस कानून के तहत अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे ज्यादा की सजा होती है तो तत्काल उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाती है और अगले 6 साल तक चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी लग जाती है.
राष्ट्रगान को लेकर SC दे चुका है फैसला
बात साल 2016-2017 की है, जब सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के समय खड़े न होने पर लोगों से बदसलूकी की घटनाएं बढ़ गई थीं. तब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था. जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस अमिताव रॉय की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की थी. इस मामले में बेंच ने नवंबर 2016 को अपने आदेश में कहा कि देश के सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाएगा और वहां मौजूद सभी लोग इसके सम्मान में खड़े होने के लिए बाध्य हैं.
इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच में चला गया. जनवरी 2018 में इस बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले को पलटते हुए सिनेमा घरों में राष्ट्रगान को बजाना वैकल्पिक कर दिया. हालांकि कोर्ट ने बिजो इमैनुएल वर्सेस स्टेट ऑफ केरल के केस के आदेश का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि खास मौकों पर देश के नागरिक राष्ट्रगान बजाए जाने पर खड़े होने के लिए बाध्य हैं. बिजो इमैनुएल वर्सेस स्टेट ऑफ केरल के केस में कोर्ट ने कहा था कि जब राष्ट्रगान बजेगा तब खड़े होकर उसका सम्मान किया जाना चाहिए. हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि राष्ट्रगान गाते समय साथ न गाना भी असम्मान है.
संविधान में भी राष्ट्रगान के सम्मान का है जिक्र
भारत के संविधान के अनुच्छेद 51-A(भाग-iv-ए) में हर नागरिक के लिए 11 मौलिक कर्तव्यों का जिक्र किया गया है. इन्हीं में एक है कि देश के सभी नागरिकों को संविधान, राष्ट्रीय प्रतीकों और संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना चाहिए.