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क्या है ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा, पिछले साल जिस दौरान नूंह में भड़की थी हिंसा? हफ्तेभर में फिर हो सकता है आयोजन

हरियाणा के नूंह में इस साल भी ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा की बात हो रही है. यात्रा सावन के पहले सोमवार, 22 जुलाई को शुरू हो सकती है, हालांकि इसपर अब तक आधिकारिक जानकारी नहीं आई है. ये वही आयोजन है, जिसमें पिछले साल नूंह सांप्रदायिक हिंसा में जल उठा था.

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नूंह में सावन में ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा होती है.
नूंह में सावन में ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा होती है.

सावन के पहले सोमवार यानी 22 जुलाई से एक बार फिर ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा शुरू हो सकती है. इस समय नूंह के नल्हड़ शिव मंदिर में जलाभिषेक होगा, जिसके लिए हरिद्वार से गंगाजल भी लाया जा रहा है. हिंदू संगठनों ने लगभग 79% मुस्लिम आबादी वाले इलाके में प्राचीन हिंदू मंदिरों को बचाने के लिए कुछ ही साल पहले ये जलाभिषेक शुरू किया. 

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कैसी है नूंह की भौगोलिक स्थिति

नूंह जहां सांप्रदायिक हिंसा भड़की, वो हरियाणा का जिला है, जिसका बॉर्डर राजस्थान से सटा हुआ है. इसके बड़े हिस्से को मेवात भी कहते हैं, जिसमें हरियाणा और राजस्थान के साथ उत्तर प्रदेश के भी कुछ भाग शामिल हैं. ये मुस्लिम बहुल इलाका है. 

अब बात करते हैं घटनाक्रम की तो पिछले साल 31 जुलाई को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल द्वारा आयोजित यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल थे. तय ये किया गया था कि यात्रा नल्हड़ शिव मंदिर से लगभग 30 किलोमीटर दूर फिरोजपुर झिरका के झिर मंदिर और फिर इतनी ही दूर स्थित पुनहाना के राधा कृष्ण मंदिर जाएगी. ये यात्रा रूट है, जो पहले से चला आ रहा है. 

होने लगी थी पत्थरबाजी-आगजनी

श्रद्धालुओं का जत्था रास्ते में ही था कि दोपहर 1 बजे के करीब उसपर पथराव शुरू हो गया. एकाध घंटे के भीतर माहौल काफी बिगड़ने लगा. दो समुदाय आपस में भिड़ने लगे. सड़कों पर आगजनी शुरू हो गई. ऐसे में सड़क पर फंसे लोग जान बचाने के लिए वापस नल्हड शिव मंदिर की तरफ भागे. गाड़ियां जल रही थीं. गोलियां चल रही थीं. 
 

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mewat nuh braj mandal jalabhishek yatra communal violence 2023 reason history photo India Today

मंदिरों में हजारों ने ली शरण

अलग-अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब दो हजार लोग मंदिर के भीतर शरण लिए हुए थे. काफी मुश्किल से पुलिस-प्रशासन स्थिति पर काबू पा सका, लेकिन इस बीच 7 जानें जा चुकी थीं. बाद में जांच-पड़ताल चली. 3 सौ के करीब गिरफ्तारियां हुईं. संदिग्धों और पत्थरबाजों के मकान-दुकान ढहाए गए. इनमें कई हिंदू नेताओं के नाम भी शामिल थे. 

क्यों होती है नूंह में यात्रा

हरियाणा के सबसे बड़े मुस्लिम-बहुल जिले के बारे में माना जाता है कि यहां कई प्राचीन मंदिर हैं, जो हिंदुओं की माइनोरिटी के कारण देखरेख की कमी से जूझ रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां महाभारत काल के समय के तीन शिवलिंग भी हैं. इन मंदिरों से से लोगों को वापस जोड़ने के लिए हिंदू संगठनों ने कुछ ही साल पहले मेवात दर्शन यात्रा शुरू की. इस दौरान श्रद्धालु नूंह के मंदिरों के दर्शन करते हैं. 

सोहना से मेवात का ये आयोजन जलाभिषेक से शुरू होता है. ये अभिषेक नल्हाड़ महादेव मंदिर में होता है, जो कि कथित तौर पर पांडवों के समय में बना था. यहां पानी का एक कुंड भी पांडवों के नाम पर है. कई पड़ावों से होते हुए जत्था श्रृंगेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचता है, जहां एक बार फिर जलाभिषेक होता है. पिछले साल यात्रा हिंसा की वजह से अधूरी रह गई थी. 

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सांप्रदायिक हिंसा का ऐसा मामला तो पिछले साल आया, लेकिन नूंह का नाम पिछले कुछ समय से साइबर क्राइम में सुनाई दे रहा है.

जामताड़ा को मात दे रहा साइबर क्राइम में

साइबर ठग यहां सेक्सटॉर्शन, फर्जी वर्क-फ्रॉम-होम जॉब ऑफर, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फेक प्रोफाइल के साथ हनी ट्रैप जैसे क्राइम करते रहे. प्रोडक्ट रिव्यू पर पैसे देने का प्रस्ताव देकर भी ठगी की जाती है. होम मिनिस्ट्री ने खुद माना था कि मेवात इलाका, जिसमें नूंह के अलावा राजस्थान का भरतपुर, अलवर और यूपी का मथुरा शामिल है, इस क्षेत्र में साइबर क्राइम झारखंड के जामताड़ा को भी पीछे छोड़ रहा है. 

mewat nuh braj mandal jalabhishek yatra communal violence 2023 reason history photo Getty Images

खराब है आर्थिक स्थिति

नूंह हरियाणा का सबसे गरीब जिला है. नीति आयोग के मुताबिक, यहां की लगभग चालीस फीसदी आबादी मल्टीडायमेंशियल रूप से गरीबी से जूझ रही है. यानी यहां के लोग हेल्थ, एजुकेशन और जीवनशैली तीनों श्रेणियों में गरीब हैं. इन कैटेगिरीज में न्यूट्रिशन, बाल मृत्यु दर, स्कूल एजुकेशन के साल, हाइजीन, घर, संपत्ति जैसे कई पैरामी​टर्स भी आते हैं.

कौन हैं यहां के मेव मुसलमान

जिले में मेव मुस्लिमों की आबादी सबसे ज्यादा लगभग 79 प्रतिशत है. इनके बारे में इतिहासकार मानते हैं कि वे पहले हिंदू राजपूत हुआ करते थे, जिन्होंने 13वीं से 17वीं सदी के दौरान इस्लाम अपनाया. दिल्ली सल्तनत के दौरान मेव मुस्लिमों को कई बड़े पद मिले. जैसे, राजा नाहर खान को सुल्तान फिरोजशाह तुगलक के समय में वली-ए-मेवात की उपाधि मिली थी. 

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कई इतिहाकार इससे अलग राय रखते हैं. वे मानते हैं कि उस दौर में इस क्षेत्र के लोग सूफी संतों जैसे निजामुद्दीन औलिया के संपर्क में आए और अपने-आप ही इस्लाम की तरफ बढ़े, न कि किसी तरह का मास-कन्वर्जन हुआ. कथित तौर पर हिंदुओं से बदले मेव समुदाय की कई प्रथाएं अब भी मीणा, अहीर और गुज्जर हिंदुओं की तरह है. इनमें से कई लोग भगवान कृष्ण पर भी आस्था रखते हैं. 

कैसे होते हैं तीज-त्योहार

मेव मुस्लिम देश के बाकी हिस्सों के मुसलमानों से कुछ अलग धार्मिक प्रैक्टिस करते हैं. वे इस्लामिक त्योहारों के अलावा बड़े हिंदू त्योहार से भी दूरी नहीं बरतते. 

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