नेपाल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई भयंकर विमान दुर्घटना में कई मौतें हो चुकीं. सौर्य एयरलाइंस का ये प्लेन काठमांडू से पोखरा की तरफ उड़ान भरने वाला था लेकिन तभी टेक-ऑफ करते हुए दुर्घटना हो गई. इससे पहले पिछले साल जनवरी में भी बड़ा एयर एक्सिडेंट हुआ था, जिसमें विमान में सवार सारे लोग मारे गए थे. इस देश की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने साल 1955 के बाद से कम से कम 104 विमान हादसे रिकॉर्ड किए. इनमें से 44 डेडली थे, जिनमें नौ सौ से ज्यादा मौते हुईं. हालिया दुर्घटना इसमें शामिल नहीं. कई बार सवाल उठता है कि नेपाल में क्यों इतने एयर हादसे होते हैं.
बेहद खतरनाक लैंडस्केप
साल 2019 में नेपाल सिविल एविएशन अथॉरिटी ने खुद एक सेफ्टी रिपोर्ट जारी की, जिसमें उन्होंने माना कि देश की भौगोलिक बनावट जैसी है, वो विमान उड़ाने में दिक्कत करती है. पूरी दुनिया में जो 14 सबसे ऊंचे पहाड़ हैं, उनमें से 8 पर्वत इसी छोटे से देश में हैं. एवरेस्ट भी इनमें से एक है. ये सैलानियों को तो आकर्षित करता है, लेकिन उतना ही खतरनाक भी है, खासकर उड़ने के लिए.
खराब मौसम में ये मुश्किल और बढ़ जाती है. मानसून के दौरान नेपाल की एविएशन इंडस्ट्री कुछ ही तरह के एयरक्राफ्ट पर भरोसा कर पाती है, जो कम जगह में टेक-ऑफ या लैंडिंग कर सकें.
छोटे विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने का ज्यादा डर
पहाड़ों के बीच बसी जगहों पर जाने के लिए नेपाल एविएशन छोटे हवाई जहाजों पर ज्यादा भरोसा करता है. इससे उड़ान भरने और लैंडिंग में ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती. हालांकि ये भी मुसीबत की एक वजह है. सिविल एविएशन मिनिस्ट्री की मानें तो 19 सीटर या इतनी ही क्षमता वाले विमानों के जल्दी असंतुलित होने और हादसे का शिकार होने की ज्यादा आशंका रहती है.
दुनिया के सबसे रिस्की एयरपोर्ट्स में से एक यहां मौजूद
नेपाल का तेनजिंग हिलेरी एयरपोर्ट, जिसे लुक्ला भी कहते हैं, दुनिया के सबसे भयानक एयरपोर्ट्स में गिना जाता है. हिमालय की बर्फीली चोटियों में माउंट एवरेस्ट के पास बना ये एयरपोर्ट 9,325 फीट की ऊंचाई पर है. काफी छोटा रनवे होने के कारण यहां छोटे विमान ही उतर सकते हैं. इसमें भी एक ओर पहाड़ियां हैं और दूसरी तरफ गहरी खाई है. यही वजह है कि उत्तर-पूर्वी नेपाल के इस एयरपोर्ट को दुनिया का सबसे खतरनाक एयरपोर्ट कहते हैं.
सेफ्टी स्टैंडर्ड पर भी सवाल
नेपाल में चेतावनी के बाद भी लगातार पुराने एयरक्राफ्ट ही काम में लाए जा रहे हैं. खराब मौसम के दौरान ये भरोसेमंद नहीं रहते. यही देखते हुए कुल साल पहले इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन ने नेपाल से साझेदारी की ताकि वहां विमान दुर्घटनाओं को रोका जा सके. इसके बाद से सेफ्टी स्टैंडर्ड तो बढ़े, लेकिन हादसे तब भी हो रहे हैं.
कॉकपिट से देखकर करते हैं नेविगेशन
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में अब भी घरेलू उड़ानों के लिए पायलट विजुअल फ्लाइट रूल (VFR) अपनाते हैं. मतलब वे फ्लाइट को बाहर देखते हुए नेविगेट और कंट्रोल करते हैं. ऐसे में बाहर एकदम से मौसम बिगड़े तो हालात भी बिगड़ सकते हैं. बता दें कि नेपाल जैसे पल-पल बदलते मौसम वाले देश में VFR तकनीक काफी खतरनाक है, जिसपर कई बार वहां विवाद भी हो चुका.
वहीं डोमेस्टिक एयरलाइंस का तर्क है कि वीएफआर का इस्तेमाल तब बिल्कुल सही है, जब विमान ऊंचे स्थानों पर किसी रिमोट लोकेशन में उड़ान भर रहा हो, जैसे डोल्पो, जुमला और सिमिकोट. वहीं इंस्ट्रूमेंट फ्लाइट रूल्स तब के लिए हैं, जब मौसम खराब हो, जैसे घना कोहरा हो और दिखाई देना मुश्किल हो जाए.