किम जोंग-उन ने कोविड 19 की शुरुआत में ही नॉर्थ कोरिया में विदेशियों की एंट्री पर रोक लगा दी थी. दुनिया कब की चलने-भागने लगी लेकिन ये कोरियाई देश साल 2020 में ही अटका हुआ था. अब जाकर वहां विदेशी पर्यटकों के आने के रास्ते खुले हैं. इसमें भी वही लोग घूम सकेंगे, जो कुछ खास कंडीशन्स का पालन कर सकें. लेकिन यहां कई सवाल हैं, जिसमें सबसे बड़ी बात ये है कि आइसोलेटेड माने जाते कोरिया में आखिर फॉरेन टूरिस्ट्स आएंगे ही क्यों?
क्यों हटा रहा एंट्री रेस्ट्रिक्शन्स
इस देश के आक्रामक तौर-तरीकों पर काबू पाने के लिए अमेरिका समेत पूरी इंटरनेशनल बिरादरी ने इसपर काफी सारे व्यापारिक और डिप्लोमेटिक प्रतिबंध लगा दिए. इसमें यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल, और यूरोपियन यूनियन की तरफ से लगाए गए सेंक्शन्स भी शामिल हैं. बड़े आर्थिक बैन के अलावा संस्थाओं के एसेट फ्रीज करना और ट्रैवल बैन जैसी चीजें भी यहां हुईं.
बैन की वजह से देश की आर्थिक हालत बुरी तरह से चरमरा गई. साथ ही कोविड के दौरान उत्तर कोरिया पूरी तरह से कट गया, जहां न कोई आ सकता था, न कोई जा सकता था. इससे रही-सही ठीक स्थिति भी बिगड़ गई. अब वहां के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने पूरे पांच सालों बाद देश में पर्यटन बहाली की बात की. इसके बाद से ही नॉर्थ कोरिया चर्चा में है.
घूम तो सकेंगे लेकिन प्रतिबंधों के साथ
अलग-थलग रहने वाला ये देश विदेशियों को बुला तो रहा है लेकिन कई शर्तों के साथ. टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सैलानियों के लिए कई पाबंदियां होंगी. मसलन, वे लोकल गाइड के बगैर कहीं भी आ-जा नहीं सकते. वे देश की तयशुदा जगहों पर ही घूम सकते हैं. ज्यादातर जगहों पर फोटोग्राफी बंद रहेगी. साथ ही उनपर हर वक्त कैमरों और लोकल्स की नजर रहेगी. अगर कोई इन शर्तों को मानने को राजी हो, तभी वो नॉर्थ कोरिया पहुंच सकता है.
कहलाता रहा गैर-दोस्ताना
देश तो वेलकम के लिए तैयार है लेकिन कितने पर्यटक जान जोखिम में डालकर यहां घूमना-फिरना चाहेंगे, ये भी एक बात है. असल में यह मुल्क अपने गैर-दोस्ताना तरीकों के लिए कुख्यात रहा, जो विदेशियों खासकर अमेरिका और यूरोप से नाराज रहा.
अमेरिकी पर्यटक गंभीर हालत में लौटा
साल 2015 में यहां ओटो वॉर्मबियर नाम का एक यूनिवर्सिटी स्टू़डेंट घूमने पहुंचा लेकिन वापसी में प्योंगयांग एयरपोर्ट पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया. युवक पर आरोप था कि उसने राजनीतिक स्लोगन वाला एक पोस्टर चुराने की कोशिश की थी. तीन महीनों के भीतर वहां की की सुप्रीम कोर्ट ने वॉर्मबियर को 15 साल की सजा सुना दी. अदालत का कहना था कि युवक ने अमेरिकी सरकार से साथ मिलकर साजिश के तहत ये किया.
अमेरिका ने इसे गलत बताते हुए रिहाई की मांग लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. साल 2017 में अचानक ही कोरियाई सरकार ने एलान किया कि वॉर्मबियर को मानवीय आधार पर रिहा किया जा रहा है. उन्हें यूएस भेज दिया गया लेकिन वे कोमा में थे. जांच में पता लगा कि वे लंबे समय से इसी स्टेट में थे. उत्तर कोरिया इसपर लीपापोती करता रहा, जबकि अमेरिकी डॉक्टरों ने दावा किया कि उनके साथ गंभीर मारपीट हुई, जिससे ब्रेन इंजुरी के चलते वे इस हालत में चले गए. रिहाई के कुछ दिनों बाद ही उनकी मौत हो गई.
तब यूएस में डोनाल्ड ट्रंप का पहला कार्यकाल था
ट्रंप बेहद नाराज हुए और नॉर्थ कोरिया पर धड़ाधड़ कई पाबंदियां लगा दीं. साथ ही अपने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी कर दी कि वे इस देश की यात्रा से बचें. अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने अब भी उत्तर कोरिया को लेवल 4 पर रखा हुआ है, यानी वो देश जहां जाने पर फंसने का खतरा है.
तमाम विकसित देश कोरिया से बचते रहे
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया समेत ज्यादातर बड़े देश अपनी ट्रैवल एडवायजरी में उत्तर कोरिया जाने से मना करते हैं. कोरिया अपने पड़ोसियों से लेकर दूर-दराज के देशों से संबंध खराब किए हुए है. ऐसे में वो हर वक्त आशंकित रहता है कि कहीं उसपर कोई हमला न हो जाए. काल्पनिक अटैक से बचने के लिए वो लगातार तैयारियां करता रहा. जैसे वहां मिसाइल टेस्टिंग होती रहती है. या फिर नए-नए आदेश जारी होते रहते हैं. ये हालात टूरिज्म के लिए सही नहीं.
जानकारियां पर कड़ा पहरा
विदेश घूमते हुए टूरिस्ट अगर न्यूज सुनना या पढ़ना चाहें तो वो यहां मुमकिन नहीं. वहां के बड़े होटलों में इंटरनेशनल न्यूज चैनल आते तो हैं, लेकिन जब-तब उनका ब्रॉडकास्ट बंद भी करा दिया जाता है. ऐसे में अगर नॉर्थ कोरिया की उसी देश से लड़ाई छिड़ जाए, जहां से सैलानी है तो भारी मुसीबत हो सकती है.
हेल्थ सिस्टम भी कमजोर
उत्तर कोरिया से वैसे तो जानकारी नहीं आती, लेकिन माना जा रहा है कि फिलहाल वहां भुखमरी के हालात हैं, और क्राइम बढ़ रहा है. इसके अलावा भी कई दिक्कतें हैं. जैसे पूरे देश में मेडिकल सुविधा काफी कमजोर है. यहां तक कि राजधानी प्योंगयांग में भी अच्छे अस्पताल नहीं. ऐसे में पर्यटक अगर गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए तो उसे मेडिकल इवेकुएशन कराना होता है, जो काफी महंगा पड़ सकता है.
जानकारी न होने की वजह से टूरिस्ट इसमें फंसकर जेल पहुंच जाते हैं. मिसाल के तौर पर वहां किसी भी तरह का धार्मिक या राजनैतिक कंटेंट नहीं ले जा सकते. कोरियाई सरकार इसे अपने खिलाफ प्रचार की तरह देखती है. किम जोंग या उनके परिवार के किसी भी सदस्य का मजाक बनाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. इसके बाद का रास्ता सीधे डिटेंशन सेंटर में खुलेगा. यहां हर जगह फोटो भी नहीं खींची जा सकती. ऐसा करना जासूसी कहलाता है, जिसकी सजा काफी गंभीर हो सकती है.
कैसे मिल सकता है उत्तर कोरिया का वीजा
- इसके लिए लोग खुद अप्लाई नहीं कर सकते, बल्कि ट्रैवल एजेंसी की मदद लेनी होगी. इस देश में स्वतंत्र तौर पर विजिटर्स अलाऊ नहीं.
- सफेद बैकग्राउंड पर पासपोर्ट साइज तस्वीर, पासपोर्ट और एक आवेदन फॉर्म भरकर एजेंट को देना होगा.
- कुछ टर्म्स एंड कंडीशन भी होते हैं, जिसपर साइन जरूरी है वरना वीजा रिजेक्ट हो जाएगा.
- अगर वीजा मिल जाए तो ये पासपोर्ट पर नहीं होगा, बल्कि एक अलग कागज मिलेगा.
- इसपर ये भी लिखा होगा कि आप कहां से देश में एंट्री कर सकते हैं. इसके दो रास्ते हैं- रूस और चीन. वीजा पर स्फेसिफिक ढंग से सब बताया गया होगा.
- यहां पासपोर्ट आप अपने पास नहीं रख सकते, बल्कि लोकल गाइड अपने पास जमा कर लेता है. देश छोड़ने के समय ही ये लौटाया जाता है.
रूस और चीन हैं अभी साथी
फिलहाल रूस और चीन के लोग यहां घूमने आते हैं, जो कोविड के दौरान भी चलता रहा. उत्तर कोरियाई सरकारी वेबसाइट पर बताया गया कि पिछले साल आठ सौ से ज्यादा रूसी पर्यटक यहां आए थे. हालांकि अब रूस और अमेरिका जिस तरह से करीब आते दिख रहे हैं, हो सकता है कि आने वाले समय में ये देश रूस से भी बिदक जाए. ऐसे में दरवाजे खुले होने के बाद भी उसके लिए फॉरेन टूरिज्म को बढ़ाना आसान नहीं होगा.