जिस तरह से डूबते को तिनके का सहारा मिलता है, ठीक उसी तरह से कंगाल होते पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का सहारा आखिरकार मिल ही गया. कर्ज में डूबे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ तीन अरब डॉलर का कर्ज देने को तैयार हो गया है. तीन अरब डॉलर का ये कर्ज नौ महीनों में दिया जाएगा.
हालांकि, इस कर्ज के लिए कई शर्तें भी हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे पहली शर्त तो यही है कि पाकिस्तान सरकार को आने वाले बजट में बेवजह के खर्च और टैक्स में छूट देने से बचना होगा. लोगों को बिजली बिल पर मिलने वाली सब्सिडी भी खत्म हो जाएगी. विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए आयात पर जो प्रतिबंध लगाया था, उसे भी हटाना होगा.
कंगाल होते पाकिस्तान को तीन अरब डॉलर के कर्ज ने थोड़ा संभाल तो लिया, लेकिन अब वो आईएमएफ का चौथा सबसे बड़ा कर्जदार बन जाएगा. पहले पाकिस्तान पांचवें नंबर पर था.
8 महीने बाद बनी बात
1947 में भारत से अलग होकर बना पाकिस्तान अब तक के सबसे बुरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसकी ऐसी हालत सालभर से है.
पाकिस्तानी सरकार और आईएमएफ के बीच कई महीनों से बातचीत ही चल रही थी. आईएमएफ ने पाकिस्तानी सरकार के सामने कई शर्तें रखी थीं, लेकिन वो मान ही नहीं रहा था. पाकिस्तान अब जाकर आईएमएफ की शर्तें मानने को मजबूर हुआ है. दोनों के बीच लगभग 8 महीने बाद ये डील हुई है.
अगस्त 2018 में जब इमरान खान सत्ता में आए थे, तब भी पाकिस्तान की हालत खराब हो गई थी. इस वजह से उनकी सरकार ने आईएमएफ के साथ 6.5 अरब डॉलर के कर्ज का समझौता किया था. इस कर्ज में से 1.1 अरब डॉलर पिछले साल मिलने थे, लेकिन शर्तें न मानने की वजह से ये रकम अटक गई थी. हालांकि, अब जब वो झुका तो आईएमएफ ने उसे तीन अरब डॉलर का कर्ज देने के लिए मान गया.
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IMF का कितना बड़ा कर्जदार है PAK?
पाकिस्तान जब से आजाद हुआ है, तब से आईएमएफ से मिलने वाला ये 23वां कर्ज हैं. 31 मार्च 2023 तक पाकिस्तान पर आईएमएफ का 7.4 अरब डॉलर का कर्जा था और पाकिस्तान आईएमएफ का पांचवां सबसे बड़ा कर्जदार था.
पहले नंबर पर अर्जेंटीना था, जिसके ऊपर आईएमएफ की 46 अरब डॉलर की उधारी थी. दूसरे नंबर पर 18 अरब डॉलर के साथ मिस्र था. तीसरे नंबर पर यूक्रेन है, जिसने 12.2 अरब डॉलर का कर्ज लिया था. चौथे नंबर पर इक्वाडोर है, जिसने 8.2 अरब डॉलर का कर्ज लिया है.
अब तीन अरब डॉलर का कर्ज अगले नौ महीने में मिलने पर पाकिस्तान के ऊपर कुल 10.4 अरब डॉलर का कर्जा हो जाएगा. भारतीय करंसी में ये रकम 852.39 लाख करोड़ रुपये होती है. इस हिसाब से पाकिस्तान आईएमएफ का चौथा सबसे बड़ा कर्जदार बन जाएगा.
एशिया में सबसे ज्यादा बड़ा कर्जदार
पाकिस्तान दुनिया में आईएमएफ का चौथा सबसे बड़ा कर्जदार तो है ही, साथ ही अब वो एशिया में सबसे बड़ा कर्जदार बन जाएगा.
श्रीलंका, नेपाल, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, अर्मेनिया और मंगोलिया जैसे बाकी दूसरे एशियाई देश पाकिस्तान से कहीं ज्यादा पीछे हैं. भारत के ऊपर आईएमएफ का कर्जा नहीं है.
दुनिया पर IMF का कितना कर्ज
आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 31 मार्च तक दुनिया के 93 देशों पर आईएमएफ का 155 अरब डॉलर का कर्ज है.
आईएमएफ के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के 19 देश ऐसे हैं जिनपर उसका एक अरब डॉलर या उससे ज्यादा का कर्ज है.
पाकिस्तान को कर्ज की जरूरत क्यों थी?
- बढ़ता कर्जः पाकिस्तान कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर तक 2022 तक मुल्क पर 63,868 अरब पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा का कर्ज है.
- खाली होता विदेशी मुद्रा भंडारः सालभर में ही पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खाली हो गया है. इस साल फरवरी तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार तीन अरब डॉलर था. जो अब और 35 लाख डॉलर का रह गया है.
- लगातार गिरती करंसीः पाकिस्तानी रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है. अभी 1 अमेरिकी डॉलर का भाव 275 पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा हो गया है. जबकि, मई 2022 में 185 पाकिस्तानी रुपये के आसपास था.
- बेतहाशा बढ़ती महंगाईः स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक, सालाना आधार पर महंगाई दर ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है. मई में पाकिस्तान में महंगाई 38 फीसदी के पार चली गई.