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PM मोदी ने कहा- 2047 तक विकसित देश बनेगा भारत... जानिए ये लक्ष्य हासिल करने के लिए क्या-क्या करना होगा

लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश जब 2047 में आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब भारत का तिरंगा विकसित देश के तौर पर फहराना है. लेकिन कोई देश कैसे विकसित होता है? भारत को विकसित देश बनने के लिए क्या-क्या करना होगा? जानते हैं...

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पीएम मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है. (फोटो-PTI)
पीएम मोदी ने 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रखा है. (फोटो-PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर विकसित भारत का संकल्प रखा. लाल किले से पीएम मोदी ने कहा कि जब देश आजादी के 100 साल पूरे करेगा तब हमें भारत का झंडा विकसित देश के तौर पर फहराना है.

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77वें स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने कहा, 'जब 2047 में देश आजादी के 100 साल मनाएगा. तो उस समय तिरंगा एक विकसित भारत का झंडा होना चाहिए. हमें रुकना नहीं चाहिए. उसके लिए सुचिता, पारदर्शिता और निष्पक्षता पहली जरूरत है. हमें इसे मजबूती से खाद पानी देना चाहिए.'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, '2047 में जब देश आजादी के 100 साल का जश्न मनाएगा तो मेरा देश विकसित भारत बनकर रहेगा. मैं देश के सामर्थ्य के आधार पर ये कह रहा हूं.'

पीएम मोदी ने पिछले साल भी लाल किले से 2047 तक विकसित भारत का महासंकल्प रखा था. तब उन्होंने कहा था कि अब बहुत बड़े संकल्प को लेकर चलना होगा और वो संकल्प है विकसित भारत का. इससे कम कुछ नहीं होना चाहिए.

लगातार दो साल से लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी अपने 'ड्रीम' के बारे में बता रहे हैं. और उनका ड्रीम है 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना. 

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लेकिन कोई देश 'विकसित' कब कहलाता है? कोई देश तब विकसित देश कहलाता है, जब वहां की आर्थिक सेहत अच्छी होती है. वहां के लोगों को रहन-सहन बेहतर होता है. स्वास्थ्य-शिक्षा से लेकर बुनियादी ढांचा तक... सबकुछ बेहतरीन होता है. 

विकसित या विकालशील... भारत क्या है?

पहले दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को दो कैटेगरी में बांटा जाता था. एक- विकसित देश और दूसरी- विकासशील देश.

लेकिन 2016 में वर्ल्ड बैंक ने दुनिया के सभी देशों को उनकी कमाई के आधार पर कैटेगराइज कर दिया था. भारत पहले विकासशील देश की कैटेगरी में आता है. लेकिन 2016 में वर्ल्ड बैंक ने भारत से ये दर्जा छीन लिया था. अब भारत को 'लोअर मिडिल इनकम' वाला देश कहा जाता है. यानी, ऐसा देश जहां प्रति व्यक्ति आय काफी कम है.

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, जिन देशों की प्रति व्यक्ति आय 1,046 डॉलर से कम होती है, वो 'लो-इनकम कंट्रीज' होती हैं. जबकि, जहां प्रति व्यक्ति आय 1,046 डॉलर से 4,095 डॉलर के बीच होती है, उन्हें 'लोअर मिडिल इनकम कंट्रीज' कहा जाता है. इसी तरह 4,096 डॉलर से 12,695 डॉलर के बीच प्रति व्यक्ति आय वाले देशों को 'अपर मिडिल इनकम' और 12,695 डॉलर से ज्यादा की आय वालों को 'हाई इनकम कंट्रीज' कहा जाता है. 

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भारत को क्या करना होगा?

1. मजबूत अर्थव्यवस्था

- किसी भी देश को विकसित बनाती है उसकी अर्थव्यवस्था. और किसी भी देश की आर्थिक सेहत कैसी है? इसका पता ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी जीडीपी से लगाया जाता है. इस समय दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका है.

- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुताबिक, इस समय अमेरिका की जीडीपी 26.85 ट्रिलियन डॉलर है. दूसरे नंबर पर चीन है, जिसकी जीडीपी 19 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा है.

- भारत इस समय दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत की जीडीपी 3.74 ट्रिलियन डॉलर है. भारत ने अगले पांच साल में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखा है. अभी तीसरे नंबर पर जापान (4.41 ट्रिलियन डॉलर) और चौथे पर जर्मनी (4.31 ट्रिलियन डॉलर) है. 

2. प्रति व्यक्ति आय

- किसी भी देश के विकसित होने का एक पैमाना वहां की प्रति व्यक्ति आय भी है. जिस तरह से जीडीपी से देश की आर्थिक समृद्धि का पता चलता है, उसी तरह से प्रति व्यक्ति आय से आम आदमी की समृद्धि का अनुमान लगाया जाता है.

- प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत अभी काफी पीछे है. वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, 2022 में भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,388.6 डॉलर रही थी. इस मामले में भारत अपने पड़ोसी देश श्रीलंका, भूटान और बांग्लादेश से भी पीछे है.

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- वर्ल्ड बैंक के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय 76,399 डॉलर रही थी. वहीं, चीन की प्रति व्यक्ति आय 12,720 डॉलर से ज्यादा थी. 

3. इंडस्ट्रियलाइजेशन

- विकसित देश को मापने का एक पैमाना इंडस्ट्रियलाइजेशन यानी औद्योगिकीकरण भी है. ऐसा माना जाता है कि जिस देश में जितना ज्यादा इंडस्ट्रियलाइजेशन होगा, वो उतना विकसित होगा. 

- क्योंकि इंडस्ट्रियलाइजेशन से न सिर्फ रोजगार बढ़ता है, बल्कि किसी देश का इम्पोर्ट (आयात) घटता है और एक्सपोर्ट (निर्यात) बढ़ता है.

- अभी भारत का आयात ज्यादा है और निर्यात कम. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 में भारत का एक्सपोर्ट 36.20 लाख करोड़ और इम्पोर्ट 57.33 लाख करोड़ रुपये रहा था. इस हिसाब से भारत के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट में 21 लाख करोड़ से ज्यादा का अंतर था. जबकि, 2021-22 में 14 लाख करोड़ रुपये था.

- इंडस्ट्रियलाइजेशन कम होने से ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी काफी कम है. वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के मुताबिक, अभी ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 2% के आसपास ही है. इसे 2027 तक बढ़ाकर 3% और 2047 तक 10% करने का टारगेट रखा गया है.

4. बुनियादी जरूरतें

- कोई देश विकसित तब होता है, जब वहां के लोगों को बुनियादी जरूरतें पूरी हों. वहां के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, बेहतर शिक्षा और अच्छा रहन-सहन मिले. इसे आंकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स की रैंकिंग जारी करता है. 

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- कोई देश कितना विकसित है, इसे ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स से भी मापा जाता है. इस इंडेक्स में देशों को 0 से 1 के स्केल पर मापा जाता है. जितना ज्यादा स्कोर होता है, वहां अच्छी स्वास्थ्य सुविधा, बेहतर शिक्षा और लोगों का रहन-सहन उतना अच्छा माना जाता है.

- 2021 में इस इंडेक्स में 191 देशों में भारत की रैंकिंग 132वें नंबर पर थी. 2021 में भारत का स्कोर 0.633 रहा था. उस साल इस इंडेक्स में सबसे ऊपर स्विट्जरलैंड रहा था. वहीं, अमेरिका 21वें और चीन 79वें नंबर पर था.

5. गरीबी

- इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की एक रिपोर्ट बताती है कि विकसित और विकासशील देशों में सबसे बड़ा अंतर वहां की गरीबी है. वर्ल्ड बैंक ने गरीबी रेखा की परिभाषा तय की है. इसके मुताबिक, अगर हर दिन कोई व्यक्ति 2.15 डॉलर (170 रुपये के आसपास) से कम कमा रहा है, तो वो 'बेहद गरीब' माना जाएगा.

- भारत में गरीबी रेखा की अलग परिभाषा है. ये परिभाषा तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तय की गई थी. इसके मुताबिक, अगर गांव में रहने वाला एक व्यक्ति हर दिन 26 रुपये और शहर में रहने वाला व्यक्ति 32 रुपये खर्च कर रहा है, तो वो गरीबी रेखा से नीचे नहीं माना जाएगा. गरीबी रेखा के सरकारी आंकड़े 2011-12 के हैं. उसके मुताबिक, भारत की लगभग 22% आबादी यानी 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं.

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- हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट आई थी. इसमें बताया गया था कि 15 साल में गरीबी काफी कम हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2005-06 से 2019-21 के दौरान 15 साल में 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं.

- इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में अब भी लगभग 23 करोड़ लोग गरीब हैं. इसमें बताया गया था कि इन गरीबों में से 90 फीसदी गांवों में हैं.

भारत ने अब तक क्या-क्या हासिल किया?

- अर्थव्यवस्थाः 1950-51 में देश की जीडीपी 4.96 लाख करोड़ रुपये थी, जो 2022-23 में बढ़कर 157.60 लाख करोड़ रुपये हो गई. इसी तरह 1950-51 में देश में हर आदमी की सालाना औसतन कमाई 265 रुपये थी, जो 2022-23 में बढ़कर 1.70 लाख रुपये से ज्यादा हो गई.

- रोजगार और गरीबीः बेरोजगारी को लेकर 1972-73 में नेशनल सैम्पल सर्वे ऑफिस (NSSO) ने पहला सर्वे किया था. उसके मुताबिक, उस समय देश में बेरोजगारी दर 8.35% थी, जो 2021-22 में घटकर 4.1% पर आ गई. बेरोजगारी दर से पता चलता है कि जितने लोग रोजगार के योग्य हैं, उनमें से कितने बेरोजगार हैं. वहीं, आजादी के समय देश की 80% आबादी गरीब थी, जो अब घटकर 10% के आसपास आ गई है. 

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- स्वास्थ्यः आजादी के समय देश में 30 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन अब 704 हैं. इतना ही नहीं, आजादी के समय 2,014 सरकारी अस्पताल थे, जिनकी संख्या अब 49 हजार से ज्यादा है. औसत आयु भी किसी देश को विकसित बनाती है, क्योंकि इससे वहां की स्वास्थ्य सुविधाओं का अंदाजा लगता है. आजादी के समय औसत आयु 34 साल थी, जो अब बढ़कर 69.7 साल हो गई है.

- शिक्षाः मार्च 1948 तक देश में 1.50 लाख के आसपास स्कूल थे, लेकिन आज करीब 15 लाख स्कूल हैं. इसी तरह उस वक्त महज 414 कॉलेज और 34 यूनिवर्सिटीज थीं. आज 49 हजार से ज्यादा कॉलेज और 11सौ से ज्यादा यूनिवर्सिटीज हैं. इतना ही नहीं, 1951 में साक्षरता दर 18% थी, जो अब बढ़कर 75% हो गई है. 

- खेती-किसानीः आजादी के समय भारत की अर्थव्यस्था काफी हद तक कृषि पर निर्भर थी. लेकिन आज देश की जीडीपी में कृषि का योगदान 20% से भी कम है. हालांकि, भारत में अब रिकॉर्ड प्रोडक्शन होता है. आजादी के समय 508 लाख टन कृषि उत्पादन हुआ था, जो अब बढ़कर 3,305 लाख टन हो गया है. अनाज का सबसे बड़ा भंडार आज भारत में है. वहीं, दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं और चावल का उत्पादन चीन के बाद भारत में होता है.

 

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