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बांग्लादेश में हिंसा के बीच तख्तापलट हो गया है. प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे के बाद शेख हसीना ने बांग्लादेश भी छोड़ दिया है. बताया जा रहा है कि शेख हसीना दिल्ली आ सकती हैं. उनके साथ उनकी बहन शेख रेहाना भी हैं.
बांग्लादेश के आर्मी चीफ वकार-उज-जमान ने अंतरिम सरकार बनने का ऐलान किया है. उन्होंने भीड़ से शांति की अपील भी की है.
शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उनके दफ्तर में भी आग लगा दी है. उनकी पार्टी आवामी लीग के कार्यकर्ताओं को ढूंढ-ढूंढकर मारा जा रहा है. प्रधानमंत्री आवास में भी प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर लिया है.
इससे पहले रविवार को बांग्लादेश में भयंकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे. प्रदर्शनकारी शेख हसीना के इस्तीफे की मांग पर अड़े थे. इन प्रदर्शनों में 100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है. हिंसा को देखते हुए सरकार ने छुट्टी का ऐलान कर दिया था. इंटरनेट भी बंद कर दिया गया था. साथ ही साथ पूरे देश में सेना को तैनात कर दिया गया था.
हालांकि, शेख हसीना के इस 'तख्तापलट' की स्क्रिप्ट कुछ महीनों पहले ही लिख दी गई थी. जब जनवरी में शेख हसीना पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनी थीं, उससे पहले से ही उनका विरोध शुरू हो गया था. इसके बाद आरक्षण को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया. इसी प्रदर्शन ने 15 साल से सत्ता पर काबिज शेख हसीना को पद से हटने पर मजबूर कर दिया.
विवादित चुनावों में जीत
बांग्लादेश में इसी साल जनवरी में संसदीय चुनाव हुए थे. इन चुनावों में विपक्ष ने जबरदस्त धांधली का आरोप लगाया था. बांग्लादेश की विपक्षी पार्टियां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी ने इन चुनाव का बायकॉट भी कर दिया था. इन दोनों पार्टियों के साथ-साथ 15 राजनीतिक पार्टियों ने भी बहिष्कार कर दिया था.
इस चुनाव में महज 40 फीसदी ही वोटिंग हुई थी. जबकि, 2018 के चुनाव में 80 फीसदी से ज्यादा वोट पड़े थे.
विपक्ष के बायकॉट के कारण शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने दो-तिहाई से ज्यादा सीटें जीत ली थीं. आवामी लीग ने संसद की 300 में से 224 सीटें जीती थीं.
फिर आरक्षण को लेकर बवाल
बांग्लादेश में हिंसा और प्रदर्शनों का लंबा इतिहास रहा है. कई बार हसीना सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं. हाल ही में आरक्षण को लेकर बांग्लादेश में बवाल शुरू हो गया था.
दरअसल, बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में जबरदस्त आरक्षण था. सरकारी नौकरियों में फ्रीडम फाइटर्स और उनके बच्चों के लिए 30%, जंग से प्रभावित हुईं महिलाओं के लिए 10%, अलग-अलग जिलों के लिए 40% आरक्षण था. बाकी 20% मेरिट वालों के लिए था.
हालांकि, इस कोटा सिस्टम में समय-समय पर बदलाव होता रहा. लेकिन फ्रीडम फाइटर्स और उनके बच्चों को मिलने वाला आरक्षण जस का तस रहा. 2018 में हसीना सरकार ने इस पूरे कोटा सिस्टम को खत्म कर दिया. इसी साल जून में हाईकोर्ट ने हसीना सरकार के उस फैसले को गलत ठहराया और आरक्षण फिर से लागू करने का आदेश दिया. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी.
इसके बाद छात्र सड़कों पर उतर आए. उन्होंने सरकार से कोटा सिस्टम में सुधार करने की मांग की. छात्रों का दावा था कि कोटा सिस्टम का फायदा हसीना की पार्टी आवामी लीग के नेताओं को मिल रहा है. छात्रों ने शेख हसीना पर फेवरेटिज्म का आरोप भी लगाया. जब पुलिस ने इन प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश की तो छात्र उग्र हो गए और हिंसा भड़क उठी.
छह लोगों की मौत से भड़की हिंसा
बांग्लादेश में जारी प्रदर्शनों के बीच 16 जुलाई को हिंसा तब भड़क उठी, जब राजधानी ढाका में प्रदर्शनकारी और सरकार समर्थकों के बीच झड़प में छह लोगों की मौत हो गई. इसके बाद हसीना सरकार ने सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए.
प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना के इस्तीफे की मांग तेज कर दी. इस बीच प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों के साथ-साथ बांग्लादेश टीवी के हेडक्वार्टर को भी आग लगा दी. सरकार ने प्रदर्शन रोकने के लिए इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया.
इसी बीच 21 जुलाई को कोटा सिस्टम पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि सरकारी नौकरियों में फ्रीडम फाइटर्स और उनके बच्चों के लिए 5% तक कोटा फिक्स कर दिया. इसके बाद छात्रों का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ.
... और फिर माफी से लेकर इस्तीफे की मांग
पिछले हफ्ते छात्रों ने एक बार फिर प्रदर्शन शुरू कर दिया. प्रदर्शनकारी छात्रों ने हिंसा बढ़ाने के लिए शेख हसीना को जिम्मेदार ठहराया और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की. इसके साथ ही इंटरनेट बहाली, स्कूल-कॉलेज फिर से खोलने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने की मांग भी की.
शेख हसीना की माफी की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन उनके इस्तीफे की मांग पर आ गया. चार अगस्त को छात्रों ने शेख हसीना के इस्तीफे की मांग को लेकर असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया. इस दौरान जगह-जगह हिंसा हुई. इस हिंसा में 100 से ज्यादा लोगों के मारे गए.
प्रदर्शन रोकने के लिए सरकार ने पुलिस हटाकर सेना को तैनात कर दिया. इसी बीच सेना ने भी प्रदर्शनकारियों का साथ दिया. पूर्व सेना प्रमुख जनरल इकबाल करीम भुइयां ने सरकार से सेना को वापस बुलाने को कहा. वहीं, मौजूदा आर्मी चीफ वकार-उज-जमान ने कहा कि सेना हमेशा लोगों के साथ खड़ी है.
आखिरकार शेख हसीना का इस्तीफा
शेख हसीना को हटाने के लिए छह अगस्त को छात्रों ने ढाका तक 'लॉन्ग मार्च' निकालने की बात कही थी.
प्रदर्शनकारियों ने इस लॉन्ग मार्च में ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल होने का कहा था. बताया जा रहा है कि इस मार्च में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया. सेना ने भी इसे नहीं रोका.
बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के ढाका तक कूच करने से पहले ही शेख हसीना ने पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया. प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री आवास में भी घुस गए. उन्होंने शेख हसीना की पार्टी के दफ्तर को भी आग लगा दी.
फिलहाल, शेख हसीना ने देश छोड़ दिया है. बताया जा रहा है कि वो दिल्ली आ रही हैं और यहां से लंदन जा सकती हैं. वहीं, बांग्लादेश में अब कुछ दिन अंतरिम सरकार ही चलेगी.