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38 सालों से बंद जगन्नाथ मंदिर के खजाने को खोलने की उठी मांग, क्या है खोई हुई चाबी का रहस्य?

जगन्नाथ पुरी का रत्न भंडार आखिरी बार साल 1985 में खोला गया था. इसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के आभूषण रखे हुए हैं. साथ ही सोने-चांदी के बर्तन भी हैं. अब लगभग 4 दशक बाद एक बार फिर इस खजाने को खोलकर जांचने की मांग की जा रही है. करीब 5 साल पहले कहा गया था कि इसकी असली चाबी खो चुकी है.

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जगन्नाथ मंदिर के भीतरी खजाने को खोलने की डिमांड उठ रही है.  सांकेतिक फोटो (Unsplash)
जगन्नाथ मंदिर के भीतरी खजाने को खोलने की डिमांड उठ रही है. सांकेतिक फोटो (Unsplash)

ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव पास आ रहा है. इस बीच कई गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं, यानी पुरानी मांगों को हवा दी जा रही है. इसी में से एक है जगन्नाथ मंदिर के खजाने को खोलकर उसकी पूरी जांच.

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मजे की बात ये है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही ये चाहते हैं. हाल में कई नेताओं का एक दल मंदिर प्रबंधन कमेटी से मिला और रत्न भंडार खोलने की बात की. लेकिन सवाल ये है कि आखिर क्या है यह भंडार, क्यों इतने सालों से बंद पड़ा है और क्यों अभी ही इसकी जांच की बात हो रही है. 

क्या है ये खजाना?

इसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती आभूषण और खाने-पीने के बर्तन रखे हुए हैं. ये वो चीजें हैं, जो उस दौर के राजाओं और भक्तों ने मंदिर में चढ़ाए थे. 12वीं सदी के बने मंदिर में तब से ये चीजें रखी हुई हैं.

इस भंडारघर के भी हिस्से हैं, एक बाहरी और एक भीतरी भंडार. बाहरी हिस्से को समय-समय पर खोला जाता है. त्योहार या मौके-बेमौके भी खोलकर उससे गहने निकालकर भगवानों को सजाया जाता है. रथ यात्रा के समय ये होता ही है. वहीं अंदरुनी चैंबर पिछले 38 सालों से बंद पड़ा है. 

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puri jagannath temple inner treasure room controversy photo India Today

आखिरी बार इसे साल 1978 में खोला गया था. ये आधिकारिक जानकारी है. वहीं साल 1985 में भी इनर चैंबर को खोला गया, लेकिन इसका मकसद क्या था और भीतर क्या-क्या है, इस बारे में कहीं कुछ नहीं बताया गया. 

अंदर कितना खजाना है?

साल 2018 में विधानसभा में पूर्व कानून मंत्री प्रताप जेना ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आखिरी बार यानी 1978 में इसे खोलने के समय रत्न भंडार में करीब साढ़े 12 हजार भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर होता है) सोने के गहने थे, जिनमें कीमती पत्थर जड़े हुए थे. साथ ही 22 हजार भरी से कुछ ज्यादा के चांदी के बर्तन थे. साथ ही बहुत से और गहने थे, जिनका तब वजन नहीं किया गया. 

क्या है इन्हें खोलने की प्रोसेस?

इसके लिए ओडिशा सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के कहने पर वहां की हाई कोर्ट ने 2018 में भी इसे खोलने का आदेश दिया लेकिन प्रोसेस पूरी नहीं हो सकी. इसकी वजह भी बड़ी अजीब बताई गई. कहा गया कि चैंबर की चाबी नहीं मिल रही है. 

puri jagannath temple inner treasure room controversy photo Getty Images

कौन संभालता है चाबियां?

ये चाबी नियम के मुताबिक पुरी कलेक्टर के पास होती है. तत्कालीन कलेक्टर अरविंद अग्रवाल थे. उन्होंने माना कि उनके पास चाबी की कोई जानकारी नहीं. इसके बाद पूरे स्टेट में काफी बवाल भी मचा था. यहां तक कि सीएम नवीन पटनायक को दखल देना पड़ा. उन्होंने इसकी तहकीकात का आदेश दिया था.

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इंक्वायरी कमेटी ने लगभग 2 हफ्तों बाद बताया कि उन्हें एक लिफाफा मिला है, जिसके ऊपर लिखा है- भीतरी रत्न भंडार की डुप्लीकेट चाबियां. इसके साथ ही एक लंबी-चौड़ी रिपोर्ट भी दी गई, लेकिन इसमें क्या लिखा है, ये कभी सार्वजनिक नहीं हो सका. 

अब क्यों गरमाया है मुद्दा?

पिछले साल ही इसकी बात उठी थी. विपक्षी पार्टियां भी तरह-तरह के आरोप लगाते हुए खजाने की जांच की मांग कर रही हैं. इसी को देखते हुए मंदिर कमेटी ने सरकार से दरख्वास्त की कि रत्न भंडार को खोलने की इजाजत दी जाए. 

उड़ीसा के रत्न भंडार का रहस्य अकेला नहीं, देश में एक और मंदिर भी है, जिसके दरवाजे के बारे काफी बातें होती हैं.

puri jagannath temple inner treasure room controversy photo Wikipedia

इस खजाने का दरवाजा अब तक खोला नहीं जा सका

केरल का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर सबसे ज्यादा दौलतमंद मंदिरों में गिना जाता है. कहते हैं कि इसके गुप्त तहखाने में इतना खजाना छिपा है, जिसका कोई अंदाजा भी न लगा सके. ऐसे 7 तहखाने हैं, जिसमें से छह खोले जा चुके, लेकिन सातवें का पट अब भी बंद है. 

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ये दरवाजे खोले गए, जिसमें से काफी खजाना मिला. ये मंदिर ट्रस्ट में जमा करने के बाद जैसे ही सातवें दरवाजे को खोलने की कोशिश की, कई मुश्किलें आने लगीं. मंदिर के श्रद्धालुओं का मानना है कि जिन जज टीपी सुंदराजन की अध्यक्षता में दरवाजे खोलने का फैसला हुआ, उनकी एकाएक मौत भी इन्हीं खुले हुए दरवाजों की वजह से हुआ.

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इतिहासकार और सैलानी एमिली हैच ने अपनी किताब- त्रावणकोर: एक गाइड बुक फॉर द विजिटर में मंदिर के रहस्यमयी दरवाजों का जिक्र किया था. 

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