वाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद से अमेरिका लगातार चर्चा में है. कभी वो टैरिफ बढ़ाता है, तो कभी बिना दस्तावेज रहते लोगों को हथकड़ियां लगा रवाना करता है. ट्रंप फिलहाल इतने शक्तिशाली हैं कि विपक्षियों यानी डेमोक्रेट्स की कोई पूछ नहीं. हाल में हालांकि डेमोक्रेटिक नेता कोरी बुकर ने एक भाषण दिया. एक-एक पॉइंट पर बात करती हुई ये स्पीच लगातार 25 घंटे चली. इस बीच वे न तो बैठे, न ही शौचालय का इस्तेमाल किया.
इसके बाद से चर्चा है कि क्या इतनी लंबी बात का ट्रंप के रवैए पर कोई असर होगा, या यह केवल लाइम-लाइट में आने का तरीका है.
न्यू जर्सी के 56 वर्षीय सीनेटर कोरी बुकर ने सोमवार को ट्रंप के हालिया एक्शन्स पर बात करने की शुरुआत की. उन्होंने गाजा पट्टी को लेकर नए प्रशासन के तौर-तरीकों की आलोचना की. डिपोर्टेशन पर बात की. और सरकारी संस्थाओं से लगातार हो रही कटौती पर भी स्पीच दी.
क्या कमी रही
बुकर का भाषण बेहद लंबा जरूर था लेकिन फिलिबस्टर नहीं था. यानी उनकी तरफ से किसी खास आदेश या नियम पर रोक लगाने की कोई कोशिश नहीं थी. सीनेटर ऐसा तब करते हैं जब वे किसी मुद्दे पर कमजोर पड़ रहे होते हैं. डेमोक्रेट्स फिलहाल ट्रंप की लोकप्रियता और आक्रामकता के आगे बेबस हैं. लिहाजा वे बस जनता के बीच अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए तरीके खोज रहे हैं. ट्रंप ने बीते तीन महीनों में एक के बाद एक कई बड़े फैसले लिए, जिससे विपक्षियों के लिए यह तय करना तक मुश्किल हो चुका कि वे किसपर लड़ें और किसपर हामी भरें. इन हालात में वे केवल समय ले रहे हैं.
बता दें कि बुकर ने साल 2020 में राष्ट्रपति पद का भी चुनाव लड़ा था लेकिन बाद में जो बाइडेन को सपोर्ट किया. फिलहाल डेमोक्रेट्स में वे काफी मुखर हैं और इस स्पीच से अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनका दल अभी से चार साल बाद की तैयारी करने लगा है. बुकर इसमें बड़ा चेहरा हो सकते हैं.
अमेरिकी राजनीति में घंटों चलने वाले भाषण नई बात नहीं
बुकर के पहले ये रिकॉर्ड जेम्स स्ट्रॉम थर्मन्ड के पास था, जिन्होंने बिना ब्रेक लिए 24 घंटों की स्पीच दी. साउथ कैरोलिना के सीनेटर थर्मन्ड ने साल 1957 में स्पीच दी थी, लेकिन बुकर से अलग ये फिलिबस्टर थी, मतलब एक एक्ट के विरोध में थी.
वो अमेरिका का ऐसा दौर था, जिसमें रंगभेद आम था. तभी सिविल राइट्स एक्ट कानून पर बात होने लगी. इसके तहत रेसिज्म गैरकानूनी हो जाता. स्कूलों, बसों, रेस्त्रां या नौकरियों में काले-गोरे के बीच फर्क खत्म हो जाता. संसद में एक तबका एक्ट के पक्ष में था, जबकि दूसरा खिलाफ. थर्मन्ड उसी दूसरी कैटेगरी से थे.
तब राष्ट्रपति हुआ करते थे डी आइजनहावर, जो कि भेदभाव खत्म करने के पक्ष में थे. हालांकि कई सीनेटर्स ने फिलिबस्टर का काम करते हुए इसके खिलाफ बोलना शुरू किया. थर्मन्ड इसमें सबसे आगे रहे. उन्होंने कोशिश की कि अपनी स्पीच इतनी लंबी खींचे कि वोटिंग न हो सके. वोटिंग हुई तो लेकिन एक्ट उस वक्त पास नहीं हो सका.
वक्त बिताने के लिए बच्चों की किताब तक पढ़ डाली
लंबे भाषणों का रिकॉर्ड रिपब्लिकन्स के पास भी रहा. साल 2013 में रिपब्लिकन्स सीनेटर टेड क्रूज ने बराक ओबामा की हेल्थकेयर नीतियों के विरोध में 21 घंटे तक नॉन-स्टॉप बात की थी. लेकिन इतना समय क्रूज को शायद बोलने के लिए ज्यादा लगा, लिहाजा भाषण खत्म होने के बाद वे बच्चों की एक किताब ग्रीन एग्स एंड हैम पढ़ते रहे ताकि स्पीच लंबी खिंच जाए.
जितनी लंबी स्पीच होगी, संसद की कार्यवाही उतनी देर से शुरू हो सकी. उस दिन ओबामाकेयर पर वोटिंग होनी थी, जो नहीं हो सकी क्योंकि सीनेटर बच्चों की किताब पढ़ने में बिजी थे. फिलिबस्टर एक राजनीतिक रणनीति है, जिसमें सांसद बहुत देर तक बोलते रहते हैं ताकि किसी बिल पर चर्चा या वोटिंग टाली जा सके. हालांकि क्रूज के लंबे-चौड़े भाषण के खत्म होने पर वोटिंग हुई और ओबामाकेयर पास भी हो गया.
कब रुक सकते हैं सीनेटर
बहुत से देशों से अलग अमेरिका में सीनेटर को बोलने की पूरी छूट है अगर वो अपनी सीट से खड़ा हुआ है और बिना ब्रेक कुछ न कुछ बोल रहा है. अगर वो सीनेट से जुड़े किसी खास सबजेक्ट पर बात करते हुए थोड़ा भटक भी जाएं तो भी उन्हें रोका नहीं जा सका. यही वजह है कि क्रूज जैसे सीनेटर ने बच्चों की किताब पढ़ी ताकि समय खींचा जा सके. सीनेटर को बोलने से रोकने का वहां एक ही तरीका है- क्लोजर वोट. अगर मेजोरिटी वोट करके कहे कि बहस खत्म करो तो फिलिबस्टर रोक दिया जाता है और बिल पर सीधे वोटिंग होती है.