बांग्लादेश में स्टूडेंट प्रोटेस्ट एकदम से राजनैतिक भूचाल में बदल गया. यहां तक कि वहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा. फिलहाल अस्थाई तौर पर वे भारत में हैं, लेकिन राजनैतिक शरण की तलाश चल रही है. ब्रिटेन इसमें पहला ऑप्शन था जो लगभग बंद होता दिख रहा है. बहुत से राजनेता अमेरिका की शरण भी लेते रहे. लेकिन बांग्लादेशी लीडर के लिए ये भी मुश्किल है. फिर कौन से देश हैं, जो हसीना के लिए संभावित विकल्प हो सकते हैं.
अमेरिका और बांग्लादेश में कैसे रिश्ते
यूएस ने लगातार बांग्लादेश में इस्लामिक चरमपंथ कम करने में मदद करने की मंशा जताई, हालांकि बीते कुछ महीनों में बड़ा बदलाव दिखा. न्यूज18 में एएफपी के हवाले से कहा गया कि अमेरिका ने हसीना को तानाशाह मानते हुए उनपर वीजा पाबंदी लगा दी. यहां तक कि राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बांग्लादेश में हुए चुनाव को अनफेयर एंड नॉट फ्री कह दिया. यूएस इस देश में मानवाधिकारों की अनदेखी का भी आरोप लगाता रहा.
हसीना ने भी पलटवार करते हुए कहा कि वॉशिंगटन उनके देश में दखलंदाजी कर रहा है. आपसी खींचतान का नतीजा ये रहा कि वॉशिंगटन ने हसीना समेत कई बड़े बांग्लादेशी नेताओं का वीजा कैंसल कर दिया. यानी मान सकते हैं कि अमेरिका तो बांग्लादेशी पीएम को शरण देने से रहा.
तो क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं
फिलहाल जैसे हालात हैं, उसमें हसीना या उनके करीबी इस बात पर खुलकर नहीं बोल रहे कि वे किस देश में राजनैतिक शरण ले सकती हैं. यहां तक कि देश संभावित देश भी इसपर खुलकर बोलने से बचते दिखे. कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि चूंकि फिनलैंड में हसीना के कई करीबी रहते हैं तो वे वहां जा सकती हैं. इस देश में अमेरिका और यूके में बसे बच्चे भी आ-जा सकेंगे. हालांकि फिनलैंड ने आधिकारिक तौर पर इसपर कोई हामी या नामंजूरी नहीं दिखाई.
क्या पुतिन देंगे पनाह
रूस एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है लेकिन यहां भी कई पेंच हैं. बीते कुछ समय में हजारों पाबंदियों से जूझ रहे रूस के साथ हसीना के संबंध लगातार अच्छे हुए. यहां तक कि पिछले साल अक्टूबर में रूसी प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि रूस बांग्लादेश के रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (एनपीपी) के लिए न्यूक्लियर फ्यूल देगा. परमाणु पार्टनरशिप के अलावा बांग्लादेश ने BRICS समूह जॉइन करने की मंशा जताई, जो रूस, ब्राजील, चीन, भारत और दक्षिण अफ्रीका का ग्रुप है. हसीना की ब्रिक्स से जुड़ने की इच्छा वेस्टर्न ताकतों से दूर होने को भी बताती है.
फिर रूस क्यों नहीं जा रहीं
न ही रूस और न ही हसीना या उनके परिवार की तरफ से ऐसा कोई बयान आया है. रूस अगर हसीना को पॉलिटिकल असाइलम दे तो इसका मतलब है कि वे उन देशों से रिश्ता कमजोर कर देंगी, जिनके रूस से संबंध उतने अच्छे नहीं, जैसे यूएई और सऊदी अरब. खुद रूस भी एक फ्रंट पर यूक्रेन के साथ जंग को लेकर फंसा हुआ है, ऐसे में तानाशाह कहलाते लीडर को वो कितना सपोर्ट करेगा, ये साफ नहीं.
ये मुस्लिम देश भी हो सकते हैं विकल्प
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में संकेत है कि यूएई और सऊदी अरब भी संभावित ऑप्शन हैं. ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि इन दोनों ही देशों ने अब तक पूरे मामले पर तटस्थ रुख रखा हुआ है. दोनों का ही राजनैतिक शरण देने का इतिहास रहा है. साथ ही ये मुस्लिम देश हैं, जहां हसीना का वेलकम हो सकता है. लेकिन इन देशों पर चर्चा अभी शुरुआती दौर में है. आगे क्या होगा, इसकी कोई भनक नहीं लग रही. कई देश इसलिए भी हाथ खींच सकते हैं क्योंकि अमेरिका और ब्रिटेन ने हसीना के लिए दरवाजे लगभग बंद कर रखे हैं. ऐसे में उन्हें राजनैतिक मदद देना जियोपॉलिटिक्स में बड़े फेरबदल कर सकता है.
क्या होता है राजनैतिक शरण में
ये किसी शख्स का फॉरेन लैंड में रहने का अधिकार है. अगर कोई व्यक्ति राजनैतिक या सामाजिक वजहों से अपने यहां सुरक्षित महसूस न करे तो वो दूसरे देश में शरण खोजता है. यूनाइटेड नेशन्स के ऑर्टिकल 14 में भी इसका जिक्र है. हालांकि कोई देश किसी को पॉलिटिकल असाइलम देगा, या नहीं, इसपर कोई जबर्दस्ती नहीं. ये पूरी तरह से उसकी मर्जी होती है. राजनैतिक शरण देने वाला देश ही शरण लेने वाले की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता है.