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12 साल पहले गृहयुद्ध में दो हिस्सों में बंट गया था सूडान, अब दो जनरलों की लड़ाई में पिस रहा

अफ्रीकी देश सूडान में हालात बिगड़ते जा रहे हैं. 12 साल पहले जो मुल्क गृहयुद्ध की वजह से दो हिस्सों में बंट गया था, वहां अब फिर से गृहयुद्ध जैसे हालात बन गए हैं. आजादी से पहले ही सूडान गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है. वहां इसका लंबा इतिहास रहा है. ऐसे में जानिए उस गृहयुद्ध की कहानी जिसने सूडान के दो टुकड़े कर दिए थे.

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सूडान में दो हफ्तों से गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है. (फाइल फोटो- Reuters)
सूडान में दो हफ्तों से गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है. (फाइल फोटो- Reuters)

अफ्रीकी देश सूडान दो हफ्तों से जल रहा है. वहां सेना और पैरामिलिट्री फोर्स में जंग छिड़ गई है. लगातार गोलीबारी और बमबारी हो रही है. अब तक सैकड़ों मौतें हो चुकीं हैं. 

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सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच ये जंग 15 अप्रैल से शुरू हुई थी. इस जंग से हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि पड़ोसी मुल्कों ने अपनी सीमाएं बंद कर दीं हैं. भारत समेत दुनियाभर के देश वहां फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन चला रहे हैं. 

ये संघर्ष सेना के कमांडर जनरल अब्देल-फतह बुरहान और आरएसएफ के प्रमुख जनरल मोहम्मद हमदान डगलो के बीच हो रहा है. जनरल बुरहान और जनरल डगलो,  दोनों पहले साथ ही थे. 

बहरहाल, सूडान में गृहयुद्ध या सिविल वॉर छिड़ना कोई नई बात नहीं है. यहां गृहयुद्ध का एक लंबा इतिहास रहा है. आखिरी बार जब गृहयुद्ध छिड़ा था तो ये देश दो हिस्सों- दक्षिणी सूडान और उत्तर सूडान में बंट गया था. अब एक बार फिर वहां गृहयुद्ध से हालात बिगड़ गए हैं.

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गृहयुद्ध का रहा है लंबा इतिहास

- सूडान पर मिस्र और ब्रिटेन का शासन हुआ करता था. 1952 में यहां आजादी के लिए जनमत संग्रह हुआ. इसके बाद 1956 में जाकर सूडान को आजादी मिली.

- हालांकि, आजादी मिलने के बाद दक्षिणी सूडान की आबादी बहुत ज्यादा खुश नहीं थी. उनकी मांग और ज्यादा स्वायत्ता देने की थी, जो आजादी से पहले से ही चली आ रही थी.

- नतीजा ये हुआ कि आजादी से पहले ही 1955 में उत्तर और दक्षिणी सूडान के बीच गृहयुद्ध छिड़ गया. ये गृहयुद्ध 1955 से 1972 तक यानी 17 सालों तक चला. अनुमान है कि इसमें पांच लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे. 1972 में शांति समझौते के बाद ये गृहयुद्ध खत्म हुआ.

फिर दो हिस्सों में बंट गया मुल्क

- शांति समझौता हुए 10 साल ही हुए थे कि दूसरा गृहयुद्ध छिड़ गया. ये युद्ध 1983 में सूडान सरकार और सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच हुआ. सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी दक्षिणी सूडान के लिए और ज्यादा स्वायत्ता की मांग को लेकर लड़ रही थी.

- 1983 से 2005 तक 22 साल तक चले इस सिविल वॉर में 20 लाख से ज्यादा लोगों की मारे जाने का अनुमान है. 2005 में सूडान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और सूडान सरकार के बीच शांति समझौता हुआ.

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- समझौते में तय हुआ कि दक्षिणी सूडान को नया देश बनाया जाएगा. असल में दक्षिणी सूडान ईसाई बहुल मुल्क था तो उत्तर सूडान में मुस्लिम आबादी ज्यादा थी.

- इस शांति समझौते के बाद 9 जुलाई 2011 को दक्षिणी सूडान अफ्रीकी महाद्वीप का 54वां देश बना. वो दुनिया का 193वां देश है. 

बंटवारे के बाद भी हुई जंग

- दशकों तक हुए गृहयुद्ध के बाद सूडान के दो हिस्से तो हो गए, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ. उसकी वजह ये थी कि दक्षिणी सूडान में खनिज तेल के भंडार थे.

- दरअसल, दोनों देशों के बीच अबेई पड़ता है जहां तेल का अकूत भंडार है. इसे लेकर ही दक्षिण और उत्तर लड़ते रहे. 

- 2012 में फिर समझौता हुआ, जिसमें तय हुआ कि सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे को डिमिलटराइज किया जाएगा. और दक्षिणी सूडान तेल का निर्यात जारी रखेगा.

(फाइल फोटो- Reuters)

सूडान में अब कैसे बिगड़ गए हालात?

- मौजूदा संघर्ष की जड़ें अप्रैल 2019 से जुड़ी हैं. उस समय सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति उमर अल-बशीर के खिलाफ जनता ने विद्रोह कर दिया था. बाद में सेना ने अल-बशीर की सत्ता को उखाड़ फेंक दिया था. 

- बशीर को सत्ता से बेदखल करने के बावजूद विद्रोह थमा नहीं. बाद में सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच एक समझौता हुआ. समझौते के तहत एक सोवरेनिटी काउंसिल बनी और तय हुआ कि 2023 के आखिर तक चुनाव करवाए जाएंगे. उसी साल अबदल्ला हमडोक को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया. 

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- लेकिन इससे भी बात नहीं बनी. अक्टूबर 2021 में सेना ने तख्तापलट कर दिया. जनरल बुरहान काउंसिल के अध्यक्ष तो जनरल डगालो उपाध्यक्ष बन गए.

आर्मी प्रमुख जनरल बुरहान. (फाइल फोटो)

किस बात को लेकर हो रही है जंग?

- जनरल बुरहान और जनरल डगालो कभी साथ ही थे, लेकिन अब दोनों एक-दूसरे के खिलाफ हो गए हैं. इसकी वजह दोनों के बीच मनमुटाव होना है. 

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, दोनों के बीच सूडान में चुनाव कराने को लेकर एकराय नहीं बन सकी. इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि सेना ने प्रस्ताव रखा था जिसके तहत आरएसएफ के 10 हजार जवानों को सेना में ही शामिल करने की बात थी. 

- लेकिन फिर सवाल उठा कि सेना में पैरामिलिट्री फोर्स को मिलाने के बाद जो नई फोर्स बनेगी, उसका प्रमुख कौन बनेगा. 

- बताया जा रहा है कि बीते कुछ हफ्तों से देशभर के अलग-अलग हिस्सों में पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती बढ़ गई थी, जिसे सेना ने उकसावे और खतरे के तौर पर देखा.

 

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