सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर बड़ा फैसला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि चाइल्ड पोर्न देखना या उसे स्टोर करके रखना भी POCSO और IT कानून के तहत अपराध है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने ये फैसला सुनाया है.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया है. मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी देखना या रखना अपराध के दायरे में नहीं आता. हाईकोर्ट के इस फैसले को कई एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
इससे पहले इसी साल अप्रैल में इसी मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि 'बच्चे का पोर्न देखना शायद अपराध न हो, लेकिन पोर्नोग्राफी में बच्चे का इस्तेमाल होना अपराध है.'
अब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को 'गंभीर गलती' माना है.
मद्रास हाईकोर्ट का क्या था फैसला?
साल 2019 में चाइल्ड पोर्न डाउनलोड करने के आरोप में 28 साल के युवक पर POCSO और IT कानून के तहत केस दर्ज हुआ था.
मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद वेंकटेश ने इस केस को ये कहते हुए रद्द कर दिया था कि चाइल्ड पोर्न देखना POCSO और IT एक्ट के तहत अपराध नहीं है.
कोर्ट ने ये भी कहा था कि आरोपी को पोर्न देखने की आदत थी, लेकिन उसने पहले कभी चाइल्ड पोर्न नहीं देखी थी. न ही उसने डाउनलोड किया वीडियो किसी से शेयर किया था. केस रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि GenZ को पोर्न देखने की लत है और उन्हें सजा देने की बजाय जागरूक करना चाहिए. कोर्ट ने आरोपी को सलाह दी थी कि अगर उसे अभी भी पोर्न देखने की लत है तो उसे काउंसलिंग लेना चाहिए.
हाईकोर्ट ने ये तर्क दिया था कि आरोपी ने केवल चाइल्ड पोर्न देखी थी और इसके लिए उसके किसी बच्चे या बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया था.
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट की धारा 15 के अनुसार, चाइल्ड पोर्न देखना, रखना, प्रकाशित करना या उसे प्रसारित करना अपराध है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि POCSO एक्ट की धारा 15(1) बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट को न हटाने, नष्ट न करने या उसकी जानकारी न देने पर सजा का प्रावधान करती है. वहीं, धारा 15(2) चाइल्ड पोर्न से जुड़े कंटेंट को प्रसारित करने को अपराध बनाती है. जबकि, धारा 15(3) में कारोबारी मकसद से चाइल्ड पोर्न को स्टोर करने को अपराध के दायरे में लाती है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट के सब-सेक्शन 1, 2 और 3 एक-दूसरे से अलग हैं. अगर कोई मामला सब-सेक्शन 1, 2 और 3 में नहीं बनता है तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो मामला धारा 15 के अंतर्गत नहीं आता.
सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये सुझाव
इस फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सुझाव भी दिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को अपने फैसले में 'चाइल्ड पोर्नोग्राफी' शब्द की जगह 'चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉयटेटिव मटैरियल' का इस्तेमाल करना चाहिए.
कोर्ट ने कहा कि 'चाइल्ड पोर्नोग्राफी' की बजाय 'चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉयटेटिव मटैरियल' का इस्तेमाल करने के लिए सरकार को POCSO कानून में संशोधन करना चाहिए.
अदालत ने सुझाव दिया कि सेक्स एजुकेशन पर जोर दिया जाना चाहिए, जिसमें चाइल्ड पोर्न से जुड़े कानूनी और नैतिक प्रभावों की जानकारी शामिल हो.
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार एक एक्सपर्ट कमेटी बना सकती है, जो सेक्स एजुकेशन का एक सिस्टम तैयार करे. कोर्ट ने स्कूलों को सलाह दी कि कम उम्र से ही बच्चों को POCSO कानून के बारे में बताया जाना चाहिए.
पोर्नोग्राफी पर कोर्ट की टिप्पणियां
भारत में पोर्न देखना अपराध नहीं है. हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई फैसलों में साफ कर चुकी हैं कि प्राइवेट स्पेस में पोर्न देखना अपराध नहीं है.
पिछले साल एक मामले में फैसला देते हुए केरल हाईकोर्ट ने कहा था, 'पोर्नोग्राफी सदियों से प्रचलित है. लेकिन आज के नए डिजिटल युग में और ज्यादा सुलभ हो गई है. बच्चों और बड़ों की उंगलियों पर ये मौजूद है. सवाल ये है कि अगर कोई अपने निजी समय में दूसरों को दिखाए बगैर पोर्न वीडियो देख रहा है तो वो अपराध है या नहीं? अदालत इसे अपराध के दायरे में नहीं ला सकती, क्योंकि ये व्यक्ति की निजी पसंद हो सकती है और इसमें दखल करना उसकी निजता में घुसपैठ करने के बराबर होगा.'
इससे पहले 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि निजी स्पेस में पोर्न देखना गलत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि अकेले पोर्न देखने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन चाइल्ड पोर्नोग्राफी या महिलाओं के खिलाफ बलात्कार या हिंसा से जुड़े अश्लील कंटेंट को देखना या इकट्ठा करना अपराध के दायरे में आता है.
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पोर्नोग्राफी पर क्या है कानून
हमारे देश में प्राइवेट में पोर्न देखने में कोई दिक्कत न हो, लेकिन अश्लील वीडियो या फोटो देखने, डाउनलोड करने और उसे वायरल करना अपराध है. ऐसा करने पर इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 67, 67A, 67B के तहत जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है.
धारा 67 के तहत, पोर्न कंटेंट देखने, डाउनलोड करने और वायरल करने पर पहली बार 3 साल की जेल और 5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा है. दूसरी बार पकड़े जाने पर 5 साल की कैद और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है.
धारा 67A के तहत, मोबाइल में पोर्न कंटेंट रखने और वायरल करने पर पहली बार पकड़े जाने पर 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है. दूसरी बार पकड़े जाने पर 7 साल की जेल और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा का प्रावधान है.
वहीं, धारा 67B कहती है कि अगर किसी के मोबाइल में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा वीडियो या फोटो मिलता है तो पहली बार पकड़े जाने पर 5 साल जेल और 10 लाख के जुर्माने की सजा होगी. दूसरी बार पकड़े जाने पर 7 साल जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना चुकाना होगा.
इसी तरह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 294, 295 और 296 में भी सजा का प्रावधान है. धारा 294 के तहत, अश्लील वस्तुओं को बेचने, बांटने, प्रदर्शित करने या प्रसारित करना अपराध है. ऐसा करते हुए पहली बार पकड़े जाने पर 2 साल तक की जेल और 5 हजार तक का जुर्माना लग सकता है. दूसरी बार पकड़े जाने पर 5 साल तक जेल और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है.
जबकि धारा 295 के तहत, किसी बच्चे को अश्लील वस्तु दिखाना, बेचना, किराये पर देना या बांटना अपराध है. ऐसा करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल और 2 हजार रुपये की सजा का प्रावधान है. दूसरी बार दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की जेल और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है.
इसी तरह धारा 296 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील गाना गाने या अश्लील हरकत करने पर 3 महीने की जेल और 1 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर सख्त है कानून
प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट में चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर सख्त सजा का प्रावधान है.
इस कानून की धारा 14 में प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति बच्चे या बच्चों को अश्लील कंटेंट के लिए इस्तेमाल करता है तो उसे 7 साल तक की जेल की सजा हो सकती है. साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
वहीं, पॉक्सो एक्ट की धारा 15 कहती है कि अगर कोई व्यक्ति चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा कंटेंट अपने पास रखता, किसी और को भेजता है या उसका कमर्शियल उपयोग करता है तो उसे 3 से 7 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.